Nationalist Congress Party: महाराष्ट्र की राजनीति से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुट अजीत पवार और शरद पवार खेमा अगले महीने 8 फरवरी को फिर से एक होने वाले थे। हालांकि, बुधवार को बारामती हवाई अड्डे पर हुए विमान हादसे में अजीत पवार के असामयिक निधन ने इस प्लानिंग पर फिलहाल विराम लगा दिया है।
सूत्रों और करीबी सहयोगियों के अनुसार, दोनों गुटों के बीच विलय की बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी। अजीत पवार के दशकों पुराने साथी किरण गुजर ने खुलासा किया कि 'दादा' इस विलय को लेकर 100% उत्सुक थे। गुजर के मुताबिक, अजीत पवार ने केवल पांच दिन पहले ही उन्हें बताया था कि पूरी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अगले कुछ दिनों में आधिकारिक ऐलान होने वाला है।
शरद पवार की मौजूदगी में चाहते थे 'एकजुट NCP'
हाल के नगर निकाय चुनावों (पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़) के दौरान अजीत पवार ने कुछ पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में संकेत दिया था कि वह अपने चाचा शरद पवार के बेहतर स्वास्थ्य के दौरान ही पार्टी को फिर से एकजुट करना चाहते हैं। 15 जनवरी के चुनावों में दोनों गुटों ने मिलकर चुनाव लड़ा था और आगामी जिला परिषद चुनावों के लिए भी उनकी रणनीति तैयार थी।
वरिष्ठ नेताओं की थी सहमति
विलय की इस योजना में केवल अजीत पवार ही नहीं, बल्कि शरद पवार, सुप्रिया सुले और जयंत पाटिल जैसे दिग्गज नेताओं के बीच भी सकारात्मक चर्चा चल रही थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल और शशिकांत शिंदे ने भी इस बात की पुष्टि की है कि विलय की बातचीत एक एडवांस स्टेज पर थी। चर्चा थी कि 8 फरवरी को बारामती या मुंबई में एक भव्य कार्यक्रम के जरिए दोनों गुटों के एक होने की घोषणा की जा सकती थी।
हादसे ने बदली राजनीति की तस्वीर
बीते बुधवार को बारामती एयरपोर्ट पर एक चार्टर्ड प्लेन क्रैश में अजीत पवार और चार अन्य लोगों की मौत हो गई। इस दुखद घटना के बाद बारामती में जब वरिष्ठ नेता अंतिम विदाई देने पहुंचे, तब भी पार्टी की भविष्य की दिशा को लेकर चर्चाएं हुईं। किरण गुजर ने कहा, 'अजीत दादा हमारे बीच से चले गए, लेकिन अब यह और भी अनिवार्य हो गया है कि दोनों गुट एक साथ आएं और बारामती व राज्य की भलाई के लिए मिलकर काम करें।'
जुलाई 2023 से शुरू हुई थी फूट
जुलाई 2023 में अजीत पवार अपने समर्थक विधायकों के साथ तत्कालीन एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल हो गए थे, जिससे शरद पवार द्वारा स्थापित पार्टी दो हिस्सों में बंट गई थी। तब से अजीत पवार गुट सत्ताधारी महायुति का हिस्सा है, जबकि शरद पवार गुट महा विकास अघाड़ी (MVA) के साथ है।