यूपी में संपत्ति रजिस्ट्री के नए नियम: पहचान के लिए आधार अनिवार्य, रिश्तों की पहचान और बाकी चीजों के लिए ये नए 5 Rules जान लें

New rules for property registration in UP: उत्तर प्रदेश सरकार ने संपत्ति रजिस्ट्रेशन, सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कानूनी जटिलताओं से बचने के लिए आधिकारिक मूल्यांकन के दौरान इन 5 नियमों का पालन अनिवार्य किया है

अपडेटेड Jun 25, 2026 पर 7:31 PM
New rules for property registration in UP: संपत्ति रजिस्ट्री और सरकारी योजनाओं में होने वाली कानूनी दिक्कतों को रोकने के लिए फैसला लिया गया है

UP Property Registration New Rules: उत्तर प्रदेश सरकार ने संपत्ति की रजिस्ट्री और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्देश जारी किया है। इस नए नोटिफिकेशन के तहत सरकार ने साफ कर दिया है कि आधार कार्ड पर दर्ज रिश्तों की डिटेल (जैसे- पिता, पति या अभिभावक का नाम) को अब कानूनी रिश्ते का अंतिम या निर्णायक सबूत नहीं माना जाएगा।

हमारे सहयोगी सीएनबीसी टीवी 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा द्वारा इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। इसमें राज्य के सभी रजिस्ट्रेशन कार्यालयों और सहायक महानिरीक्षकों को इन नए दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया गया है।

आइए जानते हैं संपत्ति रजिस्ट्री और सरकारी योजनाओं में होने वाली कानूनी दिक्कतों को रोकने के लिए विभाग द्वारा अनिवार्य किए गए इन 5 नए नियमों के बारे में।


प्रशासनिक मूल्यांकन के लिए अनिवार्य किए गए 5 नए नियम

उत्तर प्रदेश सरकार ने संपत्ति रजिस्ट्रेशन, सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कानूनी जटिलताओं से बचने के लिए आधिकारिक मूल्यांकन के दौरान इन 5 नियमों का पालन अनिवार्य किया है:-

नियम 1 (पहचान और पते का प्रमाण): आधार कार्ड को विशेष रूप से सिर्फ पहचान और पते के वैध प्रमाण के रूप में ही स्वीकार किया जाना चाहिए।

नियम 2 (रिश्तों पर निर्णायक नहीं): आधार कार्ड पर दर्ज परिवार या माता-पिता की डिटेल को किसी भी रिश्ते के निर्णायक या कानूनी रूप से बाध्यकारी सबूत के तौर पर नहीं माना जा सकता है।

नियम 3 (पारिवारिक सत्यापन): ऐसे आवेदन, योजनाएं या कानूनी दस्तावेज जिनमें पारिवारिक रिश्ते का अनिवार्य सत्यापन आवश्यक है, वहां अधिकारी सिर्फ आधार कार्ड के आधार पर अंतिम निर्णय नहीं ले सकते हैं।

नियम 4 (मान्य दस्तावेजों की जांच): रिश्तों के सत्यापन के लिए विभागों को मौजूदा नियमों के तहत मानक और कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त दस्तावेजों की जांच करनी होगी। इसके तहत जन्म प्रमाणपत्र, परिवार रजिस्टर की नकल, उत्तराधिकार प्रमाणपत्र या सक्षम अदालतों/प्राधिकारियों द्वारा जारी संबंध प्रमाणपत्र को ही मान्य माना जाएगा।

नियम 5 (द्वितीयक सूचना): आधार कार्ड पर माता-पिता या पति/पत्नी के नाम के किसी भी उल्लेख को स्थापित कानूनी सबूत के बजाय केवल एक द्वितीयक सूचनात्मक संदर्भ के रूप में देखा जाना चाहिए।

क्या है आधार कार्ड का मूल उद्देश्य?

उत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्देश भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुरूप है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि आधार कार्ड का मूल और प्राथमिक उद्देश्य केवल किसी व्यक्ति की पहचान और पते को स्थापित करना है न कि उसकी वंशावली या वैवाहिक स्थिति को प्रमाणित करना। यही कारण है कि आधार कार्ड पर दर्ज C/o (केयर ऑफ), S/o (पुत्र), D/o (पुत्री), या W/o (पत्नी) जैसे शब्दों के साथ लिखी गई पारिवारिक जानकारी केवल सूचनात्मक प्रकृति की होती है।

दस्तावेजों के मानकों को लेकर देशव्यापी सख्ती

उत्तर प्रदेश सरकार का यह राज्य स्तरीय निर्देश दस्तावेज़ीकरण के मानकों को लेकर देश भर में की जा रही सख्ती का ही एक हिस्सा है। आपको बता दें कि हाल ही में आयोजित 'पासपोर्ट सेवा दिवस' के दौरान विदेश मंत्रालय (MEA) के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इसी तरह की कानूनी सीमा को रेखांकित किया था। उन्होंने स्पष्ट रूप से स्पष्ट किया था कि एक भारतीय पासपोर्ट सिर्फ एक यात्रा दस्तावेज है और इसे नागरिकता का अंतिम या निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता है।

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