टीपू सुल्तान को छत्रपति शिवाजी महाराज के समकक्ष बताने वाली कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल की टिप्पणी के विरोध में महाराष्ट्र में घमासान मचा हुआ है। पुणे में रविवार को विपक्षी दल के कार्यालय के पास भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदर्शन के दौरान दोनों दलों के कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर पथराव किया। BJP और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई। इस घटना में पार्टी कार्यकर्ता, पुलिसकर्मी और पत्रकार समेत कुल नौ लोग घायल हो गए।
जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस रंजन कुमार शर्मा ने बताया कि तीन कांग्रेस कार्यकर्ता, दो BJP कार्यकर्ता, दो पुलिसकर्मी और दो पत्रकारों को हल्की चोटें आई हैं। उन्होंने कहा, “कांग्रेस भवन के पास विरोध प्रदर्शन किया गया था। इस दौरान दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की। कुछ लोग दीवारों पर चढ़ गए और दोनों तरफ से पत्थरबाजी हुई।”ल पुलिस ने बताया कि दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया जा रहा है और आगे की जांच जारी है।
BJP कार्यकर्ता हर्षवर्धन सपकाल के बयान का विरोध करने के लिए कांग्रेस भवन के बाहर इकट्ठा हुए थे। उनके बयान के बाद पूरे राज्य में विवाद और विरोध शुरू हो गया। पुणे शहर कांग्रेस अध्यक्ष अरविंद शिंदे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हमला किया गया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने मेयर मंजुषा नागपुरे और शहर अध्यक्ष धीरज घाटे समेत कई BJP नेताओं के खिलाफ पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। यह विवाद शनिवार को शुरू हुआ, जब सपकाल ने बहादुरी के ऐतिहासिक उदाहरणों का जिक्र करते हुए कहा कि टीपू सुल्तान द्वारा अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई का आह्वान, छत्रपति शिवाजी महाराज के ‘स्वराज्य’ के विचार जैसा था। इस बयान के बाद BJP और कुछ दक्षिणपंथी संगठनों में नाराजगी फैल गई।
कांग्रेस नेताओं ने BJP पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे पर “दोहरे मापदंड” अपना रही है। महाराष्ट्र कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने कहा कि पहले कई मौकों पर BJP नेताओं ने टीपू सुल्तान की सराहना की थी। उन्होंने अकोला और मुंबई की नगर निकायों में लाए गए प्रस्तावों और कुछ BJP नेताओं के टीपू सुल्तान की कब्र पर जाने का उदाहरण दिया। सचिन सावंत ने कहा, “अब BJP वोटरों को बांटने की रणनीति के तहत टीपू सुल्तान को नकारात्मक रूप में पेश कर रही है।” विरोध प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाजी हुई, जिसमें कांग्रेस के दो कार्यकर्ता घायल हो गए। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने हस्तक्षेप किया और स्थिति को काबू में किया। घायल कार्यकर्ताओं ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए धरना भी दिया।