Piyush Goyal: 'ईंधन की कोई कमी नहीं', पश्चिम एशिया तनाव के बीच पीयूष गोयल का बड़ा बयान

Piyush Goyal: पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत में ईंधन की कोई कमी नहीं है। सरकार हालात पर नजर रख रही है। उन्होंने कहा, घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए LPG और गैस की सप्लाई बनाए रखने के लिए विशेष कदम उठाए गए हैं।

अपडेटेड Mar 11, 2026 पर 10:09 AM
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'ईंधन की कोई कमी नहीं', पश्चिम एशिया तनाव के बीच पीयूष गोयल का बड़ा बयान

Piyush Goyal: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में बढ़ती दुविधा के बावजूद भारत को ईंधन की किसी भी कमी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। सप्लाई में संभावित रुकावटों को लेकर जताई जा रही चिंताओं को दूर करते हुए गोयल ने मीडिया को बताया कि सरकार स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है और देश भर में ईंधन की सप्लाई बिना रुकावट जारी रखने के लिए जरूरी कदम उठा रही है।

तिरुचिरापल्ली में बोलते हुए गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि अधिकारी सतर्क हैं और संबंधित विभाग लगातार हालात की समीक्षा कर रहे हैं, ताकि देश में सप्लाई चेन सुरक्षित रहे।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “ईंधन की बिल्कुल भी कमी नहीं है। अधिक जानकारी जुटाई जा रही है। एक गंभीर युद्ध चल रहा है... इस स्थिति में, कुछ चिंताएं हो सकती हैं जिनकी जानकारी संबंधित विभाग समय-समय पर सभी को देते रहेंगे... वे स्थिति पर बहुत बारीकी से नजर रख रहे हैं।”


मंत्री का यह आश्वासन केंद्र सरकार द्वारा मंगलवार को वैश्विक आपूर्ति दबावों के बीच घरेलू ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम (ईसी एक्ट) लागू करने के बाद आया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक नियंत्रण आदेश जारी कर रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का उत्पादन अधिकतम करने और देश भर में खाना पकाने की गैस की निरंतर आपूर्ति बनाए रखने के लिए प्रमुख हाइड्रोकार्बन स्रोतों को एलपीजी पूल में भेजने का निर्देश दिया है।

मंत्री का यह भरोसा ऐसे समय आया है जब केंद्र सरकार ने घरेलू ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने के लिए इस हफ्ते आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) लागू किया है। यह फैसला वैश्विक स्तर पर बढ़ते सप्लाई दबाव के बीच लिया गया है।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक नियंत्रण आदेश जारी कर रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल यूनिट्स को LPG का उत्पादन बढाने और देश भर में रसोई गैस की सप्लाई लगातार बनी रहे इसके लिए प्रमुख हाइड्रोकार्बन संसाधनों को एलपीजी पूल में भेजने का निर्देश दिया है।

नई व्यवस्था के तहत, प्राकृतिक गैस के वितरण में घरेलू उपभोक्ताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। सरकार ने भरोसा दिया है कि घरों के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और वाहनों के लिए कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) की 100% सप्लाई दी जाएगी। अन्य क्षेत्रों को पिछले छह महीनों की खपत के आधार पर निर्धारित मात्रा में गैस सप्लाई की जाएगी।

गैस ग्रिड से जुड़े उद्योंगो, जैसे चाय प्रोसेसिंग यूनिट और अन्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, को उनकी औसत सप्लाई का 80 % गैस मिलेगा, जबकि इंडस्ट्रीयल और कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए भी सप्लाई 80% प्रतिशत तक सीमित है। नई योजना के तहत फर्टिलाइजर प्लांट्स को पिछले छह महीनों के औसत खपत का 70 प्रतिशत गैस दिया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि इस नई व्यवस्था के तहत घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल प्लांट्स को मिलने वाली प्राकृतिक गैस की सप्लाई में 35 प्रतिशत तक कटौती की गई है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब भारत होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधानों के कारण उत्पन्न लॉजिस्टिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिससे होकर देश के प्राकृतिक गैस आयात का लगभग 30 प्रतिशत गुजरता है।

छोटी अवधि की कमी को दूर करने के लिए, सरकार प्राकृतिक गैस की खरीद के लिए वैकल्पिक व्यापार मार्गों की भी खोज कर रही है, साथ ही मौजूदा भू-राजनीतिक संकट के बीच ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए घरों में एलपीजी की उपलब्धता को प्राथमिकता दे रही है।

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