एस. जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री अराघची से की बात, युद्ध शुरू होने के बाद तीसरी बार किया फोन

Israel-US Iran War: अमेरिका और इजरायल की तरफ से ईरान पर संयुक्त सैन्य हमले शुरू करने के बाद से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने तीसरी बार ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची से बात की। जयशंकर ने जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून से भी बात की

अपडेटेड Mar 11, 2026 पर 7:27 AM
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Israel-US Iran War: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की

Israel-US Iran War: पश्चिम एशिया संकट के बाद ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ते असर को लेकर चिंताओं के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार (10 मार्च) शाम को अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर संयुक्त सैन्य हमले शुरू करने के बाद से जयशंकर ने तीसरी बार अराघची से बात की। जयशंकर ने जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून से भी बात की और पश्चिम एशिया के संकट पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा, "आज शाम ईरान के विदेश मंत्री अराघची के साथ संघर्ष से संबंधित नवीनतम घटनाक्रम पर विस्तृत बातचीत हुई। हम संपर्क में रहने पर सहमत हुए।" ईरान द्वारा मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त करने की घोषणा के बाद दोनों विदेश मंत्रियों के बीच यह पहली फोन वार्ता थी। मोजतबा को सर्वोच्च नेता नियुक्त करने की घोषणा उनके पिता, अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका-इजरायल के संयुक्त सैन्य हमले में हत्या के कुछ दिनों बाद की गई।

फिलहाल यह जानकारी नहीं मिल पायी कि चार मार्च को श्रीलंका के पास अमेरिका द्वारा एक ईरानी युद्धपोत को डुबोए जाने की घटना का जयशंकर और अराघची के बीच हुई बातचीत में जिक्र हुआ या नहीं। ईरान द्वारा फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक संकरे समुद्री परिवहन मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बाधित कर दिए जाने के बाद वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में उछाल आया है।


जयशंकर ने अराघची को ईरान और क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रम पर भारत की गहरी चिंता से अवगत कराया। पश्चिम एशिया संकट के चलते ईरान को निर्यात किया जाने वाला करीब 345 करोड़ रुपये का माल कांडला और मुंद्रा बंदरगाहों पर पड़ा हुआ है। लोकसभा में एक लिखित उत्तर में वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध के संकट के कारण पोत परिवहन और बंदरगाह परिचालन बाधित हुआ है, जिससे माल की आवाजाही प्रभावित हो रही है।

ईरान को एक मार्च तक निर्यात किया जाने वाला 35,962 टन चावल, चाय और दवाओं की खेप कांडला बंदरगाह पर अटकी रही। इसका 'फ्री ऑन बोर्ड' (एफओबी) मूल्य 305.67 करोड़ रुपये है। एफओबी में माल और बंदरगाह से जहाज पर लादने तक का खर्च शामिल होता है।

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इसी तरह, मुंद्रा बंदरगाह पर ईरान को निर्यात के लिए 5,676 टन माल अटका हुआ था, जिसका मूल्य 40.72 करोड़ रुपये है। प्रसाद ने कहा, "ईरान के साथ भारत का व्यापार मुख्य रूप से अनाज और दवाओं का है। पश्चिम एशिया के मौजूदा घटनाक्रमों के कारण माल की आवाजाही पर असर पड़ा है।" ईरान पर अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए संयुक्त हमलों के कारण जहाजों की आवाजाही बाधित हुई है। ईरान भारतीय बासमती चावल के प्रमुख खरीदारों में से है।

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