Middle East War: ईरान-US-इजरायल युद्ध के 10 दिन, 4300 से ज्यादा लोगों की मौत, 390 आम नागरिकों ने जान गंवाई

Iran US-Israel War: जांच में सामने आया है कि मारे गए सैनिकों में अधिकतर ईरानी सेना, वायुसेना और IRGC से जुड़े थे। सबसे ज्यादा सैन्य नुकसान तेहरान, करमानशाह, होर्मोज्गन, कुर्दिस्तान प्रांत और सिस्तान और बलूचिस्तान में दर्ज किया गया है। मानवाधिकार संगठन का कहना है कि कई मामलों में सरकार ने सैन्य हताहतों के सही आंकड़े जारी नहीं किए हैं, खासकर कुर्द क्षेत्रों में

अपडेटेड Mar 10, 2026 पर 8:53 PM
Middle East War: ईरान-US-इजरायल युद्ध के 10 दिन, 4300 से ज्यादा लोगों की मौत, 390 आम नागरिकों ने जान गंवाई (FILE PHOTO)

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध में भारी जान-माल का नुकसान हुआ है। हेंगाव मानवाधिकार संगठन (Hengaw Organization for Human Rights) के अनुसार, युद्ध के पहले 10 दिनों में कम से कम 4,300 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें लगभग 390 आम नागरिक शामिल हैं, जबकि करीब 3,910 लोग ईरान की सरकारी सेना और सुरक्षा बलों के सदस्य बताए गए हैं। यह आंकड़े 1 मार्च 2026 से 9 मार्च 2026 के बीच हुए हमलों के आधार पर तैयार किए गए हैं।

24 प्रांतों के 167 शहरों में हमले

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के 24 प्रांतों के 167 शहरों में सैन्य और सरकारी ठिकानों पर हवाई और मिसाइल हमले किए गए।


इन हमलों में कई महत्वपूर्ण ठिकाने निशाने पर रहे, जिनमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बेस, बासिज केंद्र, सैन्य एयरपोर्ट, मिसाइल ठिकाने, पुलिस स्टेशन, खुफिया एजेंसियों के दफ्तर और सेना के कैंप शामिल हैं।

जांच में सामने आया है कि मारे गए सैनिकों में अधिकतर ईरानी सेना, वायुसेना और IRGC से जुड़े थे।

सबसे ज्यादा सैन्य नुकसान तेहरान, करमानशाह, होर्मोज्गन, कुर्दिस्तान प्रांत और सिस्तान और बलूचिस्तान में दर्ज किया गया है।

390 नागरिकों की भी मौत

रिपोर्ट में बताया गया है कि युद्ध के पहले दस दिनों में कम से कम 390 नागरिकों की भी मौत हुई है।

सबसे ज्यादा नागरिक हताहत होर्मोज्गन प्रांत में हुए। यहां एक प्राथमिक स्कूल “शजारेह तैय्येबे” में पढ़ने वाली कई छात्राओं की भी मौत होने की खबर है।

इसके अलावा तेहरान, फार्स, रजावी खुरासान, काज्विन, अल्बोर्ज, वेस्ट अजरबैजान और ईस्ट अजरबैजान में भी नागरिकों की मौत दर्ज की गई है।

रिहायशी इलाकों में सेना की तैनाती का आरोप

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ जगहों पर ईरानी सैन्य बलों ने अपने ठिकाने छोड़कर स्कूलों, छात्रावासों और मस्जिदों में पोजिशन लेना शुरू कर दिया है।

मानवाधिकार संगठन का कहना है कि अगर सेना रिहायशी इलाकों में मौजूद रहेगी, तो इससे नागरिकों के हताहत होने का खतरा और बढ़ सकता है।

कई शहरों में लोगों का विरोध

रिपोर्ट के अनुसा, मारीवन के मोस्क-2 इलाके में स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और सरकारी सैनिकों को एक स्पोर्ट्स हॉल में ठिकाना बनाने से रोक दिया।

जांच के मुताबिक युद्ध के पहले दस दिनों में इलम, करमानशाह, कुर्दिस्तान प्रांत और वेस्ट अजरबैजान के 32 शहरों में लगभग 180 सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए।

इन चार प्रांतों में ही करीब 900 सैनिकों और सुरक्षा बलों के सदस्यों की मौत होने की बात कही गई है।

पारदर्शिता की मांग

मानवाधिकार संगठन का कहना है कि कई मामलों में सरकार ने सैन्य हताहतों के सही आंकड़े जारी नहीं किए हैं, खासकर कुर्द क्षेत्रों में।

संगठन ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अपील की है कि वे युद्ध के दौरान नागरिकों की सुरक्षा और सही जानकारी जारी करने के लिए सभी पक्षों पर दबाव बनाएं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध के दौरान अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक आम नागरिकों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए।

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