PoK की क्रूरता छिपाने के लिए पाकिस्तान ने चली नई चाल, बदले मीडिया के नियम तो उठे ये बड़े सवाल
PoK Protests: भारत ने लगातार पाकिस्तानी सरकार की नापाक हरकतों पर तीखी आपत्ति जताई है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में चल रहे चुनावों को ढोंग करार दिया है। इस बीच, पाकिस्तान सरकार ने देश में काम करने वाले विदेशी पत्रकारों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों के लिए सख्त और नए दिशा-निर्देश लागू कर दिए हैं
PoK Protests: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मुनीर की सेना क्रूरता की सभी हदें पार कर दी है
PoK Protests: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में चुनाव और सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की बर्बरता और मानवाधिकार उल्लंघनों की खबरें लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में बनी हुई हैं। भारत ने लगातार पाकिस्तानी सरकार की नापाक हरकतों पर तीखी आपत्ति जताई है और यहां चल रहे चुनावों को ढोंग करार दिया है। इस बीच हमारी सहयोगी वेबसाइट 'फर्स्टपोस्ट' की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान सरकार ने देश में काम करने वाले विदेशी पत्रकारों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों के लिए सख्त और नए दिशा-निर्देश लागू कर दिए हैं।
पाकिस्तान सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम को अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा प्रेस की आजादी पर कड़ा प्रहार और PoK में जारी हिंसा एवं असंतोष को दबाने की एक नई साजिश के रूप में देखा जा रहा है। यह फैसला कतरी न्यूज चैनल 'अल जजीरा' के प्रसारण पर रोक लगाने के कुछ ही दिनों बाद सामने आया है, जिसने PoK में जारी हिंसक झड़पों और चुनावी गड़बड़ियों की विस्तृत रिपोर्टिंग की थी।
क्या हैं विदेशी पत्रकारों के लिए पाकिस्तान के नए मीडिया नियम?
'फर्स्टपोस्ट' के मुताबिक, पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MOIB) ने मंगलवार को फॉरेन मीडिया फैसिलिटेशन गाइडलैंस 2026 जारी की हैं। इन नियमों के तहत पाकिस्तान में काम करने वाले या उनके लिए योगदान देने वाले सभी विदेशी मीडिया घरानों, पत्रकारों, मीडिया मालिकों, फ्रीलांसरों, फिक्सरों, सोर्स और स्पॉन्सर्स का पंजीकरण और मान्यता अनिवार्य कर दिया गया है।
Pakistan issued new guidelines for Foriegn media for reporting
Foreign media journalists now need No Objection certificate (NOC) to travel Outside Islamabad for reporting After committing crimes against its own people now Pakistan is trying to suppress Global media @OsintTVpic.twitter.com/W8boZdjxri — OSINT Digest (@Indowatchosint) August 4, 2026
इन नए नियमों को बिंदुवार समझिए
1 - सभी विदेशी पत्रकारों को अब इस्लामाबाद, लाहौर और कराची के अलावा देश के किसी भी अन्य शहर या क्षेत्र में रिपोर्टिंग के लिए जाने से पहले सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा।
2 - अगर कोई विदेशी पत्रकार एबटाबाद या मरी जैसी जगहों पर व्यक्तिगत रूप से घूमने या छुट्टियों के लिए भी जाना चाहता है तो भी उसे सरकार से NOC हासिल करना होगा।
3 - डॉक्यूमेंट्री, न्यूज रिपोर्ट, वीडियो या सोशल मीडिया कंटेंट तैयार करने जैसे किसी भी रिपोर्टिंग असाइनमेंट के लिए सरकार से पहले मंजूरी लेनी होगी।
4 - पाकिस्तान में रहने वाले या विदेश में रहकर विदेशी संस्थानों के लिए काम करने वाले पाकिस्तानी नागरिकों को निकटतम पाकिस्तानी दूतावास, उच्चायोग या वाणिज्य दूतावास में रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
5 - पाकिस्तानी सरकार ने दो तरह की मान्यता की व्यवस्था की है। पाकिस्तान में लंबे समय से काम कर रहे विदेशी पत्रकारों के लिए वार्षिक स्थायी मान्यता और आने वाले पत्रकारों के लिए 3 महीने की अस्थायी मान्यता।
6 - अधिकारियों को किसी भी स्तर पर आवेदन को मंजूरी देने, खारिज करने या अतिरिक्त जानकारी मांगने का पूरा अधिकार होगा। नए नियमों में कहा गया है कि अगर कोई पत्रकार पाकिस्तान की 'विचारधारा, संप्रभुता, सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था' के खिलाफ काम करता पाया जाता है तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है। हालांकि इन शर्तों को गाइडलाइंस में स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है।
आखिर क्यों पाकिस्तान ने अचानक बदले नियम?
रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही पाकिस्तान सरकार यह दावा कर रही हो कि इस नीति का उद्देश्य पंजीकरण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना है, लेकिन इसके लागू होने की टाइमिंग पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में इस्लामाबाद ने PoK में हुए चुनावों की कवरेज को लेकर अल जजीरा के डिजिटल और ब्रॉडकास्ट एक्सेस पर रोक लगा दी थी। पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अल जजीरा पर सिलेक्टिव रिपोर्टिंग और मुजफ्फराबाद के चुनिंदा पोलिंग बूथों से चुनाव प्रक्रिया को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया था।
इसके अलावा बीबीसी समेत दूसरे अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने भी PoK में सुरक्षा बलों द्वारा आम नागरिकों पर अंधाधुंध फायरिंग और अस्पतालों में घायलों के इलाज में आ रही दिक्कतों को लेकर रिपोर्ट प्रकाशित की थीं। ताजा रिपोर्टों के मुताबित चुनाव विरोधी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों में कम से कम 37 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि इस्लामाबाद ने आम नागरिकों की मौत से इनकार करते हुए दावा किया है कि प्रदर्शनकारियों के बीच प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के आतंकवादी मौजूद थे।
वैश्विक मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता, जांच की मांग
PoK में हो रही हिंसा और प्रेस पर बंदिशों को लेकर वैश्विक मानवाधिकार संस्थाओं ने पाकिस्तान सरकार की कड़ी आलोचना की है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि रावलकोट से आ रही खबरें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा की जाने वाली गैर-कानूनी हिंसा के लंबे इतिहास से मेल खाती हैं। संस्था ने सुरक्षा बलों द्वारा बल प्रयोग की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग की है।
एमनेस्टी ने यह भी कहा कि इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं के ब्लैकआउट की वजह से जमीनी हकीकत का सही आंकलन करना बेहद मुश्किल हो गया है, इसलिए पाकिस्तान को संचार सेवाएं तुरंत बहाल करनी चाहिए और मीडिया व स्वतंत्र पर्यवेक्षकों को प्रवेश की अनुमति देनी चाहिए। कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ Asia) ने भी हिंसा की निंदा करते हुए दमनकारी कार्रवाइयों को तुरंत रोकने और मानवाधिकार उल्लघनों की पारदर्शी जांच कराने की मांग की है।
रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स का दावा: पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक माहौल
फर्स्टपोस्ट ने रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) का हवाला देते हुए लिखा है कि पाकिस्तान स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए दुनिया के सबसे खतरनाक और प्रतिबंध वाले इलाकों में से एक है। RSF की वेबसाइट के मुताबिक जो भी पत्रकार सेना की मीडिया विंग ISPR द्वारा तय की गई रेखाओं को पार करता है खासकर चुनाव के समय तो वह निगरानी के दायरे में आ जाता है।
इसके चलते पत्रकारों का अपहरण हो सकता है और उन्हें सरकारी या अनधिकृत जेलों में अनिश्चितकाल के लिए बंद किया जा सकता है। इसके अलावा पाकिस्तान की प्रमुख सैन्य खुफिया एजेंसी ISI और इंटेलिजेंस ब्यूरो किसी भी आलोचक की आवाज को हमेशा के लिए दबाने के लिए तैयार रहती है।
क्या सच छुपा पाएगी पाकिस्तान की नई नीति?
विदेशी पत्रकारों पर लगाए गए इन कड़े प्रतिबंधों और नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट की व्यवस्था से साफ है कि पाकिस्तान PoK में अपने सुरक्षा बलों की क्रूरता और जनता के आक्रोश की तस्वीरों को दुनिया के सामने आने से रोकना चाहता है। हालांकि मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की पैनी नजर के बीच यह देखना बाकी होगा कि क्या ये नए नियम इस्लामाबाद की नाकामियों पर पर्दा डाल पाएंगे या इससे वैश्विक मंच पर उसकी फजीहत और बढ़ेगी।