Crude Import: क्या सच में है ईरान के साथ पेमेंट की दिक्कत? सरकार ने दिया जवाब, कहा- सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित

पिछले महीने अमेरिका ने तेल की बढ़ती कीमतों को कम करने के अपने नए प्रयास के तहत, समुद्र में मौजूद ईरानी तेल की खरीद पर लगे प्रतिबंधों में 30 दिनों की छूट दी। भारत ईरानी कच्चे तेल का एक बड़ा खरीदार रहा है। 2018 में प्रतिबंधों के कड़े होने के बाद, मई 2019 में आयात पूरी तरह से बंद हो गया

अपडेटेड Apr 04, 2026 पर 4:33 PM
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अगर यह खेप में भारत आती है, तो यह लगभग 7 वर्षों बाद ईरान से भारत आई कच्चे तेल की पहली खेप होगी।

केंद्र सरकार का कहना है कि ईरान से कच्चे तेल के आयात को लेकर पेमेंट से जुड़ी कोई समस्या नहीं है। रिफाइनरियां ईरान के साथ-साथ दुनिया भर के विभिन्न सप्लायर्स से तेल हासिल कर रही हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने X पर एक पोस्ट के जरिए उन खबरों को भी खारिज किया, जिनमें दावा किया गया था कि पेमेंट की समस्या के चलते ईरानी कच्चा तेल ले जा रहा एक टैंकर भारत के बजाय चीन की ओर मुड़ गया है। अगर यह खेप में भारत आती है, तो यह लगभग 7 वर्षों बाद ईरान से भारत आई कच्चे तेल की पहली खेप होगी। मई 2019 के बाद यह पहला मौका है जब ईरान से कोई तेल टैंकर भारत आ रहा है।

मंत्रालय ने कहा है कि उद्योग की सामान्य प्रथा के तहत व्यापार के अनुकूलन (Trade Optimisation) और संचालन में लचीलेपन (Operational Flexibility) के आधार पर कार्गो अपनी यात्रा के दौरान गंतव्य बदल सकते हैं। मंत्रालय ने उन दावों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है कि भुगतान में बाधाओं के कारण कार्गो को गुजरात के वाडिनार के बजाय चीन की ओर मोड़ा गया।

मंत्रालय ने कहा है कि ईरानी कच्चे तेल के आयात के लिए भुगतान की कोई बाधा नहीं है।'' स्पष्ट किया, ''भारत 40 से अधिक देशों से कच्चे तेल का आयात करता है, और कंपनियों के पास अलग-अलग स्रोतों और भौगोलिक क्षेत्रों से तेल हासिल करने की पूरी फ्लेक्सिबिलिटी है।'' वैश्विक तौर पर तेल के व्यापार में जहाजों की डेस्टिनेशन का बीच रास्ते में बदलना आम बात है, क्योंकि 'बिल ऑफ लैडिंग' में अक्सर माल उतारने के संभावित बंदरगाहों का ही जिक्र होता है। ऑपरेशनल और कमर्शियल कारणों से माल को बीच रास्ते में ही किसी दूसरी जगह भेजा जा सकता है।


मंत्रालय के अनुसार, पश्चिम एशिया से सप्लाई में बाधाओं के बीच भारतीय रिफाइनरियों ने अपनी कच्चे तेल की जरूरतों को सुरक्षित कर लिया है। इसके तहत ईरान से तेल का आयात भी शामिल है। अफवाहों के उलट ईरानी कच्चे तेल के आयात के लिए भुगतान की कोई बाधा नहीं है। मंत्रालय ने कहा है कि भारत की कच्चे तेल की जरूरतें आने वाले महीनों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित हैं।

'पिंग शुन' पर लदा है 6 लाख बैरल कच्चा तेल

जहाजों पर नजर रखने वाली फर्म 'केपलर' ने शुक्रवार को कहा था कि ईरान से तेल लेकर आ रहा टैंकर 'पिंग शुन' अब गुजरात के वाडिनार के बजाय चीन के डोंगयिंग को अपनी डेस्टिनेशन बता रहा है। जबकि इस हफ्ते की शुरुआत में उसने वाडिनार को ही अपनी डेस्टिनेशन बताया था। अनुमान है कि जहाज 'पिंग शुन' में लगभग 6 लाख बैरल कच्चा तेल लदा है। इसे 4 मार्च के आस-पास 'खर्ग द्वीप' से जहाज पर चढ़ाया गया था।

ईरान से कच्चे तेल की खरीद पर बैन में अमेरिका की ओर से हाल ही में दी गई छूट के बाद, भारतीय रिफाइनर समुद्र में मौजूद ईरानी तेल की कुछ खेप खरीदने के मौकों की तलाश में थे। मंत्रालय ने यह भी बताया कि लगभग 44,000 टन ईरानी LPG से लदा एक जहाज सी बर्ड 2 अप्रैल को मंगलौर पहुंचा और इस समय माल उतार रहा है।

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भारत रह चुका है ईरानी कच्चे तेल का बड़ा खरीदार

ऐतिहासिक रूप से, भारत ईरानी कच्चे तेल का एक बड़ा खरीदार रहा है। भारतीय रिफाइनर मुख्य रूप से 'ईरान लाइट' और 'ईरान हेवी' ग्रेड के कच्चे तेल की खरीदारी करते थे। 2018 में प्रतिबंधों के कड़े होने के बाद, मई 2019 में आयात पूरी तरह से बंद हो गया। फिर ईरान के तेल की जगह मध्य-पूर्व, अमेरिका और अन्य जगहों से आने वाले तेल ने ले ली। 2018 में भारत हर दिन 5,18,000 बैरल ईरानी तेल खरीदता था। जनवरी से मई 2019 के बीच यह मात्रा घटकर 2,68,000 बैरल प्रतिदिन रह गई।

पिछले महीने अमेरिका ने तेल की बढ़ती कीमतों को कम करने के अपने नए प्रयास के तहत, समुद्र में मौजूद ईरानी तेल की खरीद पर लगे प्रतिबंधों में 30 दिनों की छूट दी। यह छूट 19 अप्रैल को खत्म हो जाएगी। ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल की चल रही जंग के कारण कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट से व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही लगभग बंद होने से पूरी दुनिया में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। अनुमान है कि समुद्र में मौजूद जहाजों में लगभग 9.5 करोड़ बैरल ईरानी तेल लदा है। इसमें से लगभग 5.1 करोड़ बैरल तेल भारत को बेचा जा सकता है, जबकि बाकी तेल चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के खरीदारों के लिए ज्यादा उपयुक्त है।

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