Wheat-Rice Buffer Stock Data: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव से दुनियाभर की सप्लाई चेन बाधित हो गई है। किसी देश में LPG, पेट्रोल-डीजल तो किसी देश में फूड की किल्लत देखने को मिल रही है। भारत भी इन समस्याओं से अछूता नहीं है। हालांकि, इन सभी बाधाओं के बीच भारत सरकार ने देशवासियों को बड़ी राहत दी है। खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग की संयुक्त सचिव सी. शिखा ने स्पष्ट किया है कि देश के पास अनाज का इतना पर्याप्त भंडार है कि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सकता है।
संयुक्त सचिव सी. शिखा ने अनाज के भंडार का पूरा ब्यौरा पेश करते हुए बताया कि सरकार की तैयारियों में कोई कमी नहीं है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में भारत के पास निर्धारित मानकों से तीन गुना ज्यादा गेहूं और चावल का स्टॉक मौजूद है।
गेहूं का भंडार: सरकार के पास लगभग 222 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपलब्ध है।
चावल का भंडार: चावल का स्टॉक और भी मजबूत है, जो करीब 380 लाख मीट्रिक टन है।
कुल उपलब्धता: कुल मिलाकर देश के पास 602 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न का भंडार है। यह स्टॉक न केवल राशन प्रणाली (PDS) की जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी है, बल्कि किसी भी प्रकार की इमरजेंसी के लिए भी पर्याप्त है।
आयात और घरेलू उत्पादन से सप्लाई चेन है मजबूत
सी. शिखा ने बताया कि सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत की सप्लाई चेन पर कोई बुरा असर न पड़े। इसके लिए रणनीतिक कदम उठाए गए हैं। भारत के सहयोगी देशों से अनाज और अन्य खाद्य वस्तुओं का आयात लगातार जारी है। इनमें इंडोनेशिया, मलेशिया, रूस, यूक्रेन, अर्जेंटीना और ब्राजील जैसे देश शामिल हैं। घरेलू मोर्चे पर भी सरसों की पैदावार बेहतर होने से खाद्य तेलों और घरेलू आपूर्ति को काफी मजबूती मिली है।
संयुक्त सचिव ने भरोसा दिलाया कि देश में खाद्य आपूर्ति की स्थिति पूरी तरह से स्थिर है। सरकार बाजार की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रख रही है। विभाग हर दिन स्टॉक और कीमतों की समीक्षा कर रहा है। अगर बाजार में कीमतों में कोई असामान्य उछाल आता है या आपूर्ति में बाधा दिखती है, तो सरकार तुरंत हस्तक्षेप करने और बाजार में स्टॉक जारी करने के लिए तैयार है।