उत्तर प्रदेश के बहुप्रतीक्षित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से आखिरकार 15 जून से कमर्शियल उड़ानें शुरू होने जा रही हैं। यह इस बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के लिए एक अहम मील का पत्थर माना जा रहा है। एयरपोर्ट मैनेजमेंट के मुताबिक, पहली यात्री उड़ान IndiGo की होगी। इसके बाद जल्द ही Akasa Air और Air India Express भी यहां से अपनी फ्लाइट सर्विस शुरू करेंगी।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था, और अब इसे ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी से सुरक्षा मंजूरी (ASP) भी मिल चुकी है। इसका मतलब है कि एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था और संचालन सभी जरूरी मानकों पर खरे उतरते हैं।
फिलहाल यहां एक रनवे और एक पैसेंजर टर्मिनल तैयार है, जिसकी सालाना क्षमता करीब 1.2 करोड़ (12 मिलियन) यात्रियों की है। भविष्य में इसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर 7 करोड़ (70 मिलियन) यात्रियों तक ले जाने की योजना है।
यह एयरपोर्ट खास तौर पर दिल्ली-NCR और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा। बेहतर कनेक्टिविटी के साथ यह व्यापार, पर्यटन और निवेश को भी बढ़ावा देगा।
आधुनिक सुविधाओं, आसान यात्रा अनुभव और “वर्ल्ड-क्लास” इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ यह एयरपोर्ट भारतीय मेहमाननवाजी और स्विस दक्षता का अनोखा मिश्रण पेश करेगा। साथ ही, पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इसे नेट-जीरो एमिशन के लक्ष्य के साथ डिजाइन किया गया है।
उद्घाटन के बाद भी क्यों नहीं शुरू हुईं फ्लाइट?
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का 28 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री मोदी ने भव्य उद्घाटन तो कर दिया था, लेकिन उड़ानें तुरंत शुरू नहीं हो पाईं। इसके पीछे कुछ तकनीकी और जरूरी प्रक्रियात्मक कारण थे।
इसमें सबसे बड़ा कारण एयरपोर्ट के CEO की नागरिकता वाला मुद्दा था। नियम के मुताबिक, किसी नए (ग्रीनफील्ड) एयरपोर्ट का CEO ही उसका “सिक्योरिटी कोऑर्डिनेटर” भी होता है। इसके लिए उस व्यक्ति का भारतीय नागरिक होना जरूरी है, ताकि उसे गृह मंत्रालय से सुरक्षा मंजूरी मिल सके।
समस्या यह थी कि एयरपोर्ट चलाने वाली कंपनी (YIAPL) के CEO क्रिस्टोफ श्नेलमैन स्विट्जरलैंड के नागरिक थे। इसी वजह से उनकी सुरक्षा मंजूरी लंबे समय तक अटकी रही, और एयरपोर्ट को फाइनल क्लियरेंस नहीं मिल पाया।
आखिरकार इस समस्या को हल करने के लिए कंपनी ने विदेशी CEO की जगह एक भारतीय प्रोफेशनल को नियुक्त किया। इसके बाद 1 मई 2026 को ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) से अंतिम मंजूरी मिल गई।
45-60 दिन की जरूरी तैयारी
फ्लाइट शुरू करने के लिए एयरपोर्ट का सिर्फ उद्घाटन और लाइसेंस मिलना काफी नहीं होता, एयरलाइंस को भी अपनी तैयारी के लिए समय चाहिए होता है।
IndiGo, Air India Express और Akasa Air जैसी कंपनियों को स्टाफ तैनात करने, काउंटर सेट करने और टिकट सिस्टम में फ्लाइट जोड़ने के लिए करीब 45–60 दिन लगते हैं। इस दौरान “ट्रायल रन” और टेस्ट फ्लाइट (Proving Flights) भी की जाती हैं, ताकि सब कुछ सही से काम कर रहा हो।