90-डिग्री का अंधा मोड़ और सालों से प्रशासन की लापरवाही...', नोएडा में इंजीनियर की मौत का 'सिस्टम' जिम्मेदार

Noida Engineer Death Case: जिस स्थान पर युवराज की कार गड्ढे में गिरी वहां सड़क पर 90-डिग्री का एक खतरनाक मोड़ है। इसके बावजूद वहां सुरक्षा के लिए केवल कमजोर फेंसिंग लगाई गई थी, जिसे एक कार आसानी से तोड़ सकती थी

अपडेटेड Jan 20, 2026 पर 11:32 AM
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सड़क की बनावट और बुनियादी सुरक्षा मानकों का अभाव इस हादसे का बड़ा कारण बना

Noida Techie Death Case: नोएडा सेक्टर 150 में एक 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर, युवराज मेहता की दर्दनाक मौत हो गई। उनकी मौत ने नोएडा अथॉरिटी और सिंचाई विभाग की उन बड़ी खामियों को उजागर कर दिया है, जो एक दशक से फाइलों में दबी थीं। शनिवार रात एक पानी से भरे गड्ढे में गिरकर हुए इस हादसे ने यह साबित कर दिया है कि कैसे प्रशासनिक सुस्ती और विभागों के बीच तालमेल की कमी किसी की जान ले सकती है।

क्या था पूरा हादसा?

नोएडा के पॉश इलाके सेक्टर 150 में रहने वाले युवराज मेहता शनिवार रात घर लौटते समय एक गहरे गड्ढे में गिर गए। बारिश के कारण यह गड्ढा पूरी तरह पानी से भरा हुआ था और अंधेरे के कारण इसका अंदाजा नहीं लग सका। यह गड्ढा दरअसल कोई मामूली गड्ढा नहीं था, बल्कि एक निजी मॉल प्रोजेक्ट के लिए आवंटित की गई जमीन पर सालों से खुदी हुई एक खाई थी। उचित ड्रेनेज न होने के कारण आसपास की हाउसिंग सोसायटियों का सीवेज और बारिश का पानी यहां इकट्ठा होकर एक गहरे तालाब में तब्दील हो चुका था।


प्रशासनिक विफलता और ड्रेनेज बना 'मौत का जाल'

नोएडा सेक्टर 150 में हुआ यह दर्दनाक हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिंचाई विभाग और नोएडा अथॉरिटी की संयुक्त लापरवाही का नतीजा है। जांच में सामने आया है कि सड़क के ठीक किनारे एक गहरा और असुरक्षित गड्ढा मौजूद था, जो जलभराव के कारण तालाब बन चुका था। हिंडन और यमुना नदियों के संगम पर स्थित होने के कारण यहां जल प्रबंधन के लिए एक 'रेनवॉटर रेगुलेटर' बनना था, जिस पर 2023 में सहमति भी बनी थी, लेकिन दोनों विभाग एक-दूसरे पर देरी का आरोप लगाते रहे। ड्रेनेज की व्यवस्था न होने के कारण बारिश का पानी एक कमर्शियल प्लॉट में जमा होता गया, जहां न तो कोई फेंसिंग थी और न ही सुरक्षा बैरियर। स्थिति इतनी भयावह थी कि जब सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता गड्ढे में गिरे, तो उन्हें बचाने के लिए एक डिलीवरी एजेंट को अपनी कमर में रस्सी बांधकर उस 'डेथ पॉन्ड' में कूदना पड़ा।

सड़क की बनावट और बुनियादी सुरक्षा मानकों का अभाव इस हादसे का दूसरा बड़ा कारण बना। जिस स्थान पर वाहन गड्ढे में गिरा, वहां सड़क पर 90-डिग्री का एक खतरनाक मोड़ है। इसके बावजूद, वहां सुरक्षा के लिए केवल कमजोर फेंसिंग लगाई गई थी, जिसे एक कार आसानी से तोड़ सकती थी। दुर्घटना स्थल पर न तो कोई 'एडवांस वार्निंग साइन' था और न ही पर्याप्त लाइटिंग की व्यवस्था। रात के अंधेरे और घने कोहरे के कारण विजबिलिटी कम थी, जिसने सड़क की इस डिजाइन संबंधी खामी को और अधिक घातक बना दिया। मजबूत 'क्रैश बैरियर' की अनुपस्थिति ने एक सामान्य ड्राइविंग त्रुटि को जीवन लील लेने वाले हादसे में तब्दील कर दिया।

2015 का 'स्टॉर्मवॉटर प्लान' जो सिर्फ कागजों पर रहा

जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इस समस्या का समाधान 10 साल पहले ही खोज लिया गया था, लेकिन वह कभी धरातल पर नहीं उतरा। दरअसल साल 2015 में सिंचाई विभाग ने हिंडन नदी में अतिरिक्त पानी निकालने के लिए एक 'हेड रेगुलेटर' बनाने का प्रस्ताव दिया था। 2016 में नोएडा अथॉरिटी ने सर्वे और डिजाइन के लिए ₹13.5 लाख जारी किए। IIT-दिल्ली ने भी इस प्रोजेक्ट के डिजाइन की जांच कर इसे मंजूरी दे दी थी। हालांकि, अक्टूबर 2023 में जब एक संयुक्त निरीक्षण हुआ, तो पता चला कि नए विकसित सेक्टरों का पानी भी इसी ड्रेन से जोड़ दिया गया है। इसके कारण डिजाइन बदलने की मांग उठी। सिंचाई विभाग ने फिर से ₹30 लाख मांगे, और यह मामला फिर से फाइलों में उलझ गया।

'एपैथी' और जलभराव का पुराना इतिहास

यह कोई पहली बार नहीं था जब इस क्षेत्र में जलभराव की समस्या आई। 2023 के मानसून के दौरान, ATS, ACE, Godrej, Tata, Eldeco और Samridhi जैसी बड़ी सोसायटियों के बेसमेंट में पानी भर गया था। हेड रेगुलेटर न होने के कारण पानी हिंडन नदी में जाने के बजाय वापस सोसायटियों के सीवर में घुसने लगा। निवासियों ने बार-बार नोएडा अथॉरिटी से गुहार लगाई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सोसायटियों को करोड़ों रुपये की लागत से भारी-भरकम डी-वॉटरिंग पंप लगाने पड़े।

मौत के बाद जागी अथॉरिटी

युवराज मेहता की मौत के बाद शासन और प्रशासन में हड़कंप मच गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। नोएडा अथॉरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) लोकेश एम को पद से हटा दिया गया है। मुख्यमंत्री ने मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जिसे 5 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता बी.के. सिंह ने घोषणा की है कि ₹10.5 करोड़ की लागत से बनने वाले हेड रेगुलेटर का काम एक सप्ताह के भीतर शुरू हो जाएगा।

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