Noida Workers Protest Update: गौतमबुद्ध नगर जिले के नोएडा में सैलरी बढ़ाने को लेकर हुए श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर भ्रामक और भड़काऊ वीडियो शेयर करने के आरोप में पुलिस ने उपद्रवियों पर कार्रवाई तेज कर दी है। नोएडा में मजदूरों के हंगामे से जुड़े मामले में अब तक लगभग 65 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
इनमें ज्यादातर लोगों पर दंगा करने, पत्थरबाजी करने और हिंसा भड़काने के आरोप हैं। इन पर सोशल मीडिया पर उकसाने वाली बातें लिखने, गलत जानकारी फैलाने और WhatsApp या दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए अलग-अलग ग्रुप को भड़काने के आरोप हैं।
'न्यूज 18' के मुताबिक, पुलिस ने मजदूरों को भड़काने के आरोप में कई महिला कार्यकर्ताओं को भी गिरफ्तार किया है। सूत्रों ने बताया कि इन्होंने मानेसर में भी मजदूरों को भड़काया था। इसके अलावा, नोएडा में भी इन्होंने अलग-अलग जगहों पर कई मजदूर यूनियनों के साथ बैठकें कीं, ताकि उन्हें हिंसक कार्रवाई करने के लिए उकसाया जा सके।
इसके अलावा कई और पुरुष कार्यकर्ताओं को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस दंगाइयों की तस्वीरें और पोस्टर सड़कों पर लगाने पर भी विचार कर रही है। नोएडा स्थित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में बीते एक सप्ताह से जारी हिंसक धरना प्रदर्शन के बाद बुधवार को अधिकतर कंपनियां खुल गईं। वहां कामगार काम करने के लिए आए।
मजदूर बिगुल दस्ता का मुखिया गिरफ्तार
पीटीआई के मुताबिक, नोएडा में श्रमिकों के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के सिलसिले में 'मजदूर बिगुल दस्ता' नामक संगठन का हाथ सामने आया है। पुलिस ने बताया कि उसके मुखिया रूपेश राय और कुछ अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि संगठन से जुड़े कई अन्य लोगों को भी पकड़ा गया है। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने अब तक 17 WhatsApp ग्रुप की पहचान भी की है, जिनके जरिए हिंसक आंदोलन को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया था।
पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने मीडिया को बताया कि कुछ वॉट्सऐप ग्रुप बनाए गए और QR कोड के जरिए इसमें लोगों को जोड़कर उन्हें भड़काया गया। सिंह ने कहा कि पुलिस इन ग्रुप को बनाने वालों और श्रमिकों को भड़काने वालों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। उन्होंने कहा कि हिंसा में शामिल रहे लोगों की पहचान की जा रही है। पुलिस ने 300 से अधिक लोगों को एहतियातन गिरफ्तार किया है।
हिंसा का 'अर्बन नक्सल' से कनेक्शन!
न्यूज 18 के मुताबिक, डिजिटल सबूतों से 'अर्बन नक्सल' से जुड़े तार सामने आने के बाद नोएडा पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। जांच से संकेत मिले हैं कि 'अर्बन नक्सल' नेटवर्क से जुड़े लोग अप्रैल की शुरुआत से ही नोएडा में अलग-अलग जगहों पर मजदूरों को गुमराह कर रहे थे। अप्रैल के पहले सप्ताह के दौरान, नोएडा में कई जगहों पर अलग-अलग मजदूर यूनियनों के साथ बैठकें हो रही थीं। गिरफ्तार किए गए ज्यादातर लोगों की उम्र 25 से 30 साल के बीच है।
हिंसा भड़काने में 'बाहरी तत्वों' की अहम भूमिका
नोएडा में श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन के सिलसिले में गिरफ्तार 66 लोगों में से 45 के मजदूर नहीं होने की बात सामने आई है। विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा एवं आगजनी भड़काने में 'बाहरी तत्वों' की अहम भूमिका रही। उत्तर प्रदेश सरकार ने बुधवार को जारी बयान में यह जानकारी दी।
सरकार ने कहा कि उसने मजदूर आंदोलन की आड़ में अराजकता फैलाने की सुनियोजित साजिश को नाकाम करने के लिए त्वरित कार्रवाई की। कुछ ही घंटों में स्थिति पर काबू पा लिया गया। इसके बाद औद्योगिक गतिविधियां सामान्य हो गईं।
सोमवार को सैलरी वृद्धि की मांग को लेकर मजदूरों का विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया था। इस दौरान नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में पुलिस की एसयूवी समेत कई वाहनों में आगजनी की गई, सार्वजनिक संपत्ति में तोड़फोड़ की गई और पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आईं।