NSA Ajit Doval: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने शनिवार (19 सितंबर) को भारतीय प्रोद्यौगिकी संस्थान (IIT) रुड़की के छात्रों को संबोधित करते हुए अपने शुरुआती दिनों का एक किस्सा शेयर किया जब उन्हें लगा था कि उनका करियर समाप्त हो जाएगा। डोभाल ने बताया कि करियर के शुरुआती दिनों में उन्हें सिक्किम में तैनाती मिली जहां सीमा क्षेत्र में निगरानी के लिए भेजी गई उनकी एक टीम को चीनी सेना ने पकड़ लिया था। बाद में जांच में इसकी वजह सीमा के गलत नक्शे और स्केच होना पता चला।
उन्होंने बताया कि यह तब की बात है जब सिक्किम का भारत में विलय होने वाला था। डोभाल ने कहा कि एक युवा आईपीएस अधिकारी के रूप में वह सिक्किम में खुफिया तंत्र से जुड़े थे। उनकी जिम्मेदारी सीमा पर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखना भी थी। डोभाल ने बताया कि सीमा पार की स्थिति पर नजर रखने के लिए एक टीम को पांच-छह दिनों के मिशन पर भेजा गया था। लेकिन 10-11 दिन बीतने के बाद भी टीम वापस नहीं लौटी। इसके बाद मुख्यालय से उन्हें फोन आया और टीम के चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की हिरासत में होने की जानकारी दी गई।
'लगा था कि उनका करियर लगभग समाप्त हो गया'
एनएसए के अनुसार, उन्हें तब लगा था कि उनका करियर लगभग समाप्त हो गया। हालांकि, उन्होंने कहा कि टीम के सदस्यों को बाद में बिना किसी नुकसान के रिहा कर दिया गया। उन्होंने बताया कि घटना की जांच कराई गई, जिसमें पाया गया कि टीम को उपलब्ध कराए गए स्केच और नक्शों में गलतियां थीं, जिसके कारण सीमा की पहचान को लेकर भ्रम पैदा हुआ। जांच में डोभाल को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया।
इसके बावजूद, उन्होंने कहा कि घटना ने उन्हें बेहद निराश और दुखी कर दिया था। डोभाल ने कहा, "मैं बहुत दुखी था। यह जीवन का वह दौर था जब आप खुद को बहुत निराश महसूस करते हैं।" NSA ने कहा कि इसी मुश्किल दौर में खुफिया ब्यूरो में उनके साथ काम करने वाले एक तिब्बती शेरपा ने उन्हें सलाह दी जिसे उन्होंने जीवनभर याद रखा। उन्होंने कहा कि शेरपा ने कहा, "ये सब मैप-रीडिंग का चक्कर है। कुछ लोग नक्शा सही पढ़ते हैं और कुछ गलत।"
24 साल बर्फ की चोटियों पर गुजारे
उन्होंने कहा कि इस शेरपा ने माउंट एवरेस्ट को आठ बार फतेह किया। 24 साल उन्होंने बर्फ की चोटियों पर गुजारे थे।डोभाल ने कहा कि शेरपा ने उन्हें जीवन के तीन मंत्र बताए। पहला-तुम कहां खड़े हो। दूसरा- तुम्हें कहां जाना है।और तीसरा- वहां जाने और वहां से आने का रास्ता क्या है। एनएसए ने कहा कि समय के साथ यह सलाह उनके लिए सिर्फ पहाड़ों में रास्ता तलाशने का तरीका नहीं रही। बल्कि जीवन को देखने का एक नजरिया बन गई।