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'मुझे लगा करियर खत्म हो गया...'; NSA अजीत डोभाल ने सुनाया वो किस्सा, जब चीनी सेना ने भारतीय एजेंटों को पकड़ लिया था

NSA Ajit Doval: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने अपने करियर के शुरुआती दौर की एक बेहद तनावपूर्ण घटना का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि जब वह 20 की उम्र में सिक्किम में इंटेलिजेंस प्रमुख के तौर पर तैनात थे, तब सीमा क्षेत्र में भेजी गई एक खुफिया टीम कई दिनों तक वापस नहीं लौटी थी। बाद में पता चला कि टीम के सदस्यों को चीनी सेना ने हिरासत में लेकर पूछताछ की थी

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Sep 20, 2026 पर 8:38 AM
'मुझे लगा करियर खत्म हो गया...'; NSA अजीत डोभाल ने सुनाया वो किस्सा, जब चीनी सेना ने भारतीय एजेंटों को पकड़ लिया था
NSA Ajit Doval: चीन में एजेंटों के पकड़े जाने के बाद क्या हुआ था इसके बारे में अजीत डोभाल ने पहली बार जानकारी दी

NSA Ajit Doval: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने शनिवार (19 सितंबर) को भारतीय प्रोद्यौगिकी संस्थान (IIT) रुड़की के छात्रों को संबोधित करते हुए अपने शुरुआती दिनों का एक किस्सा शेयर किया जब उन्हें लगा था कि उनका करियर समाप्त हो जाएगा। डोभाल ने बताया कि करियर के शुरुआती दिनों में उन्हें सिक्किम में तैनाती मिली जहां सीमा क्षेत्र में निगरानी के लिए भेजी गई उनकी एक टीम को चीनी सेना ने पकड़ लिया था। बाद में जांच में इसकी वजह सीमा के गलत नक्शे और स्केच होना पता चला।

उन्होंने बताया कि यह तब की बात है जब सिक्किम का भारत में विलय होने वाला था। डोभाल ने कहा कि एक युवा आईपीएस अधिकारी के रूप में वह सिक्किम में खुफिया तंत्र से जुड़े थे। उनकी जिम्मेदारी सीमा पर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखना भी थी। डोभाल ने बताया कि सीमा पार की स्थिति पर नजर रखने के लिए एक टीम को पांच-छह दिनों के मिशन पर भेजा गया था। लेकिन 10-11 दिन बीतने के बाद भी टीम वापस नहीं लौटी। इसके बाद मुख्यालय से उन्हें फोन आया और टीम के चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की हिरासत में होने की जानकारी दी गई।

'लगा था कि उनका करियर लगभग समाप्त हो गया'

एनएसए के अनुसार, उन्हें तब लगा था कि उनका करियर लगभग समाप्त हो गया। हालांकि, उन्होंने कहा कि टीम के सदस्यों को बाद में बिना किसी नुकसान के रिहा कर दिया गया। उन्होंने बताया कि घटना की जांच कराई गई, जिसमें पाया गया कि टीम को उपलब्ध कराए गए स्केच और नक्शों में गलतियां थीं, जिसके कारण सीमा की पहचान को लेकर भ्रम पैदा हुआ। जांच में डोभाल को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया।

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