कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने मंगलवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दाखिल किया। लेकिन अब लगता है कि ये नोटिस पहले ही पायदान पर ढेर सकता है। उसका कारण है विपक्ष की एक गलती, जो उन्होंने नोटिस में की। बीजेपी प्रवक्ता ने प्रदीप भंडारी ने विपक्ष के नोटिस के फोटो X पर शेयर कर बताया कि इसमें फरवरी 2026 की जगह फरवरी 2025 लिखा है।
प्रदीप भंडारी ने पोस्ट में लिखा, "पप्पू ब्रिगेड तो ठीक से नोटिस भी जमा नहीं कर पाई। देखिए, नोटिस में साल 2025 लिखा है; जबकि बजट सत्र 2026 में शुरू हुआ था। कांग्रेस सचमुच एक "बालक बुद्धि पार्टी" है।"
नियम कहते हैं कि तथ्यात्मक रूप से नोटिस सही होना चाहिए। लेकिन नोटिस में वर्ष 2026 के बजाय 2025 लिखा गया है, जो तफैक्चुअल एरर के कारण इसे अस्वीकार करने का पर्याप्त आधार है।
दरअसल लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को ''बोलने की इजाजत नहीं देने'' और कांग्रेस की महिला सांसदों पर सदन में अनुचित स्थिति पैदा करने के आरोपों पर विपक्ष ने अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस मंगलवार को लोकसभा सचिवालय को सौंप दिया।
निचले सदन में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई, कांग्रेस के मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश और सांसद मोहम्मद जावेद और अन्य ने लोकसभा सचिवालय को यह नोटिस सौंपा।
नोटिस पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, DMK और कई अन्य विपक्षी दलों के 110 से ज्यादा सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
संविधान के अनुच्छेद 94 (C) के तहत यह प्रस्ताव संबंधी नोटिस लोकसभा सचिवालय को सौंपा गया है।
बीते दो फरवरी को, राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे के बिना छपी किताब से जुड़ा विषय उठाने की अनुमति नहीं मिलने, सदन की अवमानना के मामले में आठ विपक्षी सांसदों को निलंबित किए जाने और दूसरे मुद्दों पर सदन में गतिरोध की स्थिति बनी हुई है।
विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा में विपक्षी नेताओं को बोलने नहीं दिया जा रहा है, जबकि सत्तापक्ष के लोगों को कुछ भी बोलने की छूट दी गई है।