Amazon Fraud Case: ₹2.9 लाख का ग्राफिक्स कार्ड ऑर्डर किया तो मिला 1 किलो का डिटर्जेंट, पीड़ित ने Amazon पर लगाया ठगी का आरोप

Amazon Fraud Case: एक व्यक्ति ने शिकायत की है कि उसे 2.9 लाख रुपये के महंगे ग्राफिक्स कार्ड के बजाय डिटर्जेंट का पैकेट मिला है। खरीदार ने सोशल मीडिया पर बताया कि जब उसने पार्सल खोला, तो देखा कि पैकेट की सील पहले से कटी हुई थी और दोबारा चिपकाई गई थी।

अपडेटेड Mar 24, 2026 पर 7:55 AM
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₹2.9 लाख का ग्राफिक्स कार्ड ऑर्डर किया तो मिला 1 किलो का डिटर्जेंट

Amazon Fraud Case: एक व्यक्ति ने शिकायत की है कि उसे 29 लाख रुपये के महंगे ग्राफिक्स कार्ड के बजाय डिटर्जेंट का पैकेट मिला है। खरीदार ने सोशल मीडिया पर बताया कि जब उसने पार्सल खोला, तो देखा कि पैकेट की सील पहले से कटी हुई थी और दोबारा चिपकाई गई थी। साथ ही, पैकेजिंग पर फर्जी आफ्टरमार्केट बारकोड लगाया गया था। इन गड़बड़ियों के बावजूद, Amazon ने 15 मिनट के भीतर ही सपोर्ट टिकट बंद कर दिया और फिलहाल रिफंड की अर्जी भी नामंजूर कर दी है।

खरीदार, जिसने अपना नाम स्वागत नायक बताया, ने X (पहले ट्विटर) पर लिखा, "AmazonIN पर 2.9 लाख रुपये की धोखाधड़ी हुई। मैंने अपने स्टार्टअप के लिए GIGABYTE RTX 5090 ऑर्डर किया था, लेकिन मुझे 1 किलो घड़ी डिटर्जेंट मिला।"

उन्होंने आगे कहा, "यह 'फुलफिल्ड बाय Amazon' (FBA) था, जिसका मतलब है कि इसे सीधे Amazon के गोदाम में रखा गया था और वहीं से भेजा गया था।"


अनबॉक्सिंग का वीडियो शेयर करते हुए यूजर ने बताया कि शिपिंग लेबल पर पैकेज का वजन 1.56 किलोग्राम लिखा था, जबकि रिटेल में पैक किए गए RTX 5090 का वजन आमतौर पर लगभग 3 किलोग्राम होता है।

"गणित झूठ नहीं बोलता, लेकिन Amazon की 'जांच' झूठ बोल रही है। उनके अपने शिपिंग लेबल पर वजन 1.56 किलोग्राम लिखा है। रिटेल में पैक किए गए RTX 5090 का वजन लगभग 3 किलोग्राम होता है। 1.56 किलोग्राम तो डिटर्जेंट और पैकेजिंग के वजन के बराबर है। यह वेयरहाउस स्कैन से कैसे पास हो गया?"

सोशल मीडिया पर लोगों के रिएक्शन

जैसे ही यह पोस्ट वायरल हुई, सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ यूजर्स ने ऑनलाइन रिटेलर्स के साथ अपने इसी तरह के बुरे अनुभव शेयर किए और ऐसे मामलों पर चिंता जताई।

वहीं, कुछ लोगों ने स्वगत नायक के दावे पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि अनबॉक्सिंग वीडियो के साथ छेड़छाड़ (एडिटिंग) भी की गई हो सकती है।

एक यूज़र ने लिखा, “दो साल पहले मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था। मैंने 3,700 रुपये के Nike जूते ऑर्डर किए थे, लेकिन मुझे बिना ब्रांड वाले जूते मिले। मैंने तुरंत रिफंड के लिए आवेदन किया, लेकिन अभी तक मुझे रिफंड नहीं मिला है।” वहीं दूसरे ने कहा, “मैंने आपका वीडियो देखा, यह बहुत ज्यादा एडिट किया हुआ लग रहा है। मुझे ओरिजिनल वीडियो देखना है।”

तीसरे यूजर ने कमेंट किया, “GoPro 12 खरीदते समय मेरा भी कुछ ऐसा ही अनुभव रहा। विक्रेता ने रिटर्न का ऑप्शन बंद कर दिया था, और जब पैकेज आया तो बॉक्स पहले से ही थोड़ा खुला हुआ था। मुझे यह देखकर बहुत हैरानी हुई कि ओरिजिनल GoPro की जगह एक सस्ता कैमरा दे दिया गया था।”

चौथे यूजर ने कहा, “मैं यह नहीं कह रहा कि आप गलत हैं, लेकिन 2.9 लाख रुपये की चीज के लिए आपने अनबॉक्सिंग को ठीक से रिकॉर्ड भी नहीं किया। ऐसा दोबारा कभी मत करना। मैं हमेशा महंगी चीजों की अनबॉक्सिंग को हर तरफ से रिकॉर्ड करता हूं।”

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