कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में जो लोग बचे हैं, वे ऊपर वाले का शुक्रिया अदा कर रहे हैं, या खुश हैं कि किसी न किसी कारण से वहां से बच निकले या पहुंच नहीं पाए। ऐसा ही महाराष्ट्र के 28 लोगों का एक ग्रुप था, बैसरन घाटी जा ही रहा था, लेकिन वह टट्टू वाले से किराये में मोल-भाव करने के कारण वहां पहुंच नहीं पाए और उनके पहुंचने से पहले ही वहां आतंकी हमला हो गया, जिसमें 26 बेगुनाहों की जान चली गई।
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस ग्रुप में सांगली, रत्नागिरी, पुणे और कोल्हापुर के पर्यटक शामिल थे। रिपोर्ट में एक पर्यटक अनिल कुराने के हवाले से कहा गया है कि उन्हें पहलगाम पहुंचने में देरी हुई, क्योंकि पहले टट्टू चलाने वाले ने सवारी के लिए प्रति व्यक्ति 3,200 रुपए मांगे थे।
फिर, जब उन्होंने कीमत पर सहमति जताई, तो उन्होंने सवारी शुरू करने के लिए 28 घोड़ों को एक जगह पर इकट्ठा करने में कुछ और मिनट लगाए।
कुराने ने यह भी बताया कि उनके समूह ने अपनी यात्रा शुरू कर दी थी, और जब उन्होंने 2 Km की यात्रा में से मुश्किल से 500 मीटर की दूरी पूरी की थी, तो एक स्थानीय व्यक्ति दौड़ता हुआ आया और उन्हें आगे न बढ़ने की चेतावनी दी।
कुराने ने कहा, "वह चिल्लाया, रुको, उधर फायरिंग शुरू है, आगे मत जाओ।" ये ग्रुप तुरंत वहीं लौट आया, जहां से उन्होंने यात्रा शुरू की थी।
ग्रुप के एक और पर्यटक ने बताया कि उन्होंने पहलगाम के वन क्षेत्र में ठहरने के लिए बुकिंग कराई थी, लेकिन हमले के बाद वे श्रीनगर लौट आए, क्योंकि उन्हें वहां ठहरना सुरक्षित नहीं लगा।
रिपोर्ट में कुराने के हवाले से कहा गया है, "अगर देरी नहीं होती, तो हम आतंकी हमले के समय घटनास्थल पर होते।" उन्होंने कहा, "हताहतों की लिस्ट में हमारे नाम भी शामिल थे।"
22 अप्रैल को पहलगाम में सशस्त्र आतंकवादियों ने 26 पर्यटकों - 25 भारतीयों और एक नेपाली नागरिक - की गोली मारकर हत्या कर दी थी।