कंबोडिया जॉब स्कैम में पाकिस्तानी साजिश का पर्दाफाश, हाई-पेइंग जॉब का झांसा देकर भारतीय युवाओं को बनाते थे शिकार

Pakistan Linked Job Scam: फॉरेंसिक जांच में भर्ती से जुड़े चैट और कॉल्स के डिजिटल फुटप्रिंट्स सीधे तौर पर पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स और वहां के IP एड्रेस से जुड़े पाए गए है। यह खुलासा केवल एक साइबर अपराध नहीं, बल्कि भारतीय युवाओं के खिलाफ एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय साजिश की ओर इशारा करता है

अपडेटेड Jan 19, 2026 पर 1:32 PM
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इस पूरे गोरखधंधे के पीछे पाकिस्तानी एजेंटों का एक सक्रिय नेटवर्क काम कर रहा था

Cambodia Job Scam: कंबोडिया में हुए 'जॉब स्कैम' की उच्च स्तरीय जांच में एक चौंकाने वाला पाकिस्तानी लिंक सामने आया है। CBI और NIA केंद्रीय एजेंसियों की जांच में पता चला है कि कंबोडिया में फंसे सैकड़ों भारतीय युवाओं को फंसाने के पीछे पाकिस्तानी एजेंटों का हाथ था। इस पूरे गोरखधंधे के पीछे पाकिस्तानी एजेंटों का एक सक्रिय नेटवर्क काम कर रहा था। ये एजेंट सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए उत्तर प्रदेश, पंजाब, मुंबई और केरल जैसे राज्यों के बेरोजगार युवाओं को निशाना बना रहे थे।

फॉरेंसिक जांच में भर्ती से जुड़े चैट और कॉल्स के डिजिटल फुटप्रिंट्स सीधे तौर पर पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स और वहां के IP एड्रेस से जुड़े पाए गए है। यह खुलासा केवल एक साइबर अपराध नहीं, बल्कि भारतीय युवाओं के खिलाफ एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय साजिश की ओर इशारा करता है।

हाई-पेइंग जॉब का झांसा देकर बनाते थे शिकार


2024 में जब यह स्कैम पहली बार सामने आया, तब अनुमान लगाया गया था कि करीब 5,000 भारतीय कंबोडिया में फंसे हुए हैं। इन युवाओं को 'कॉल सेंटर' और 'कैसीनो' में हाई-पेइंग जॉब का झांसा देकर ले जाया गया था, लेकिन वहां पहुंचते ही हकीकत बदल गई। युवाओं को जबरन साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय ठगी के काम में झोंक दिया गया। मना करने पर पीड़ितों को बिजली के झटके दिए गए, बेरहमी से पीटा गया और कई मामलों में तो अंग तस्करी तक की धमकियां दी गईं।

अधिकारियों के अनुसार, ये स्कैम दक्षिण-पूर्व एशिया के किलेनुमा परिसरों से मुख्य रूप से चीनी ऑपरेटरों द्वारा चलाए जा रहे हैं, जहां भारतीयों को मानव तस्करी के जरिए लाकर गुलामों की तरह रखा जाता है।

एक्शन में सरकार

इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए इसे दिसंबर 2025 में आयोजित 'आतंकवाद विरोधी सम्मेलन' में भी उठाया गया था। अब भारत सरकार ने इस नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए कड़े कदम उठाए है। इंडियन सायबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने पाकिस्तान से जुड़े IP एड्रेस और संदिग्धों को एक 'सस्पेक्ट रजिस्ट्री' में डाल दिया है, जिसमें 14 लाख सायबर अपराधियों का डेटा है। इस डेटा की मदद से अब तक 5,54,865 बैंक खातों को फ्रीज किया गया है और करीब ₹7,980 करोड़ की लूट को रोका गया है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले 6 वर्षों में भारतीयों ने इस तरह की धोखाधड़ी में ₹52,976 करोड़ से अधिक की भारी-भरकम राशि गंवाई है।

'डिजिटल अपराध' के खिलाफ बड़ी चेतावनी

जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह केवल पैसा ऐंठने का जरिया नहीं है, बल्कि भारतीय युवाओं का शोषण कर देश की आंतरिक सुरक्षा को अस्थिर करने का प्रयास है। भारतीय दूतावास ने कई बार एडवाइजरी जारी कर युवाओं को कंबोडिया में अनधिकृत एजेंटों से बचने की सलाह दी है। वर्तमान में CBI और NIA ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है ताकि इस 'चीनी-पाकिस्तानी गठजोड़' वाले सिंडिकेट को पूरी तरह उखाड़ फेंका जा सके।

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