राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दिल्ली की एक अदालत को बताया कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पड़ोसी देशों से हथियार खरीदने और अपने सदस्यों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देने की कोशिश कर रहा था। ये दलीलें शनिवार (20 दिसंबर) को एनआईए के स्पेशल जज प्रशांत शर्मा के समक्ष पेश की गईं। शर्मा पीएफआई के 20 आरोपी नेताओं के खिलाफ आरोपों पर दलीलें सुन रहे थे। मीडियाकर्मियों को बंद कमरे में हुई अदालती कार्यवाही को कवर करने की अनुमति नहीं थी।
NIA के स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर राहुल त्यागी ने शनिवार (20 दिसंबर) को अदालत के बाहर पत्रकारों से कहा कि उन्होंने अदालत के समक्ष यह तर्क दिया कि पीएफआई नेता पड़ोसी देशों से हथियार खरीदने और अपने सदस्यों को हथियार की ट्रेनिंग देने की कोशिश कर रहे थे।
पीएफआई नेताओं पर लगे आरोपों पर त्यागी ने कहा, "वे अपने कार्यकर्ताओं को आईएसआईएस से रणनीति सीखने के लिए सीरिया भेज रहे थे ताकि इन्हें भारत में लागू किया जा सके। उन्होंने विशेष दस्ते बनाये थे जो BJP, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) नेताओं की सूची तैयार रखते थे और उन पर नजर रखते थे।"
अभियोजक ने आरोप लगाया कि इस समूह का गठन युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के मकसद से किया गया था। त्यागी ने कहा, "पीएफआई और उसके नेतृत्व के खिलाफ मामला यह है कि उन्होंने भारत में खिलाफत स्थापित करने और शरिया कानून लागू करने के उद्देश्य से मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के लिए संगठन का गठन किया।"
अभियोजक ने कहा, "वे ट्रेनिंग कैंप आयोजित कर रहे थे। उन्हें हथियार चलाने का ट्रेनिंग दे रहे थे, उन्हें कट्टरपंथी बना रहे थे और भारत के खिलाफ 'जिहाद' छेड़ने के लिए उन्हें ट्रेनिंग कर रहे थे, जिसके लिए वे धन इकट्ठा कर रहे थे।" अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए 23 दिसंबर की तारीख तय की है।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने दिल्ली की एक कोर्ट को बताया है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने इंडिया-पाकिस्तान के बीच जारी युद्ध के दौरान कथित तौर पर दक्षिण भारत पर कब्जा करने की योजना बनाई थी।
PFI लीडरशिप केस में आरोपों पर आखिरी बहस के दौरान NIA ने कहा कि एक गवाह ने बताया कि कैडरों को सिखाया गया था कि अगर भारत पाकिस्तान के साथ युद्ध करता है तो फोकस उत्तर पर होगा। उस समय वे दक्षिण से हमला करेंगे और फिर दक्षिण भारत पर कब्जा कर लेंगे।
यह मामला PFI लीडरशिप द्वारा मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बनाने की कथित साजिश पर आधारित है। रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी ने कहा कि संगठन ने यह दावा करते हुए प्रोपेगेंडा फैलाया कि भारत में इस्लाम खतरे में है। ऐसे युवाओं की पहचान की जो इस तरह के मैसेजिंग के प्रति संवेदनशील थे।
NIA के अनुसार, इन युवाओं को कथित तौर पर हिंसक गतिविधियों के लिए ट्रेंड किया गया था। एजेंसी ने कहा कि PFI के लेक्चर का मकसद हिंदुओं और मुसलमानों के बीच दुश्मनी पैदा करना था। फिर उसने इस संगठन को राष्ट्रीय एकता के लिए एक बड़ा खतरा बताया।