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'वंदे मातरम के खिलाफ जिन्ना ने नारा दिया और नेहरू ने...',  पीएम मोदी ने जब सदन में सुनाया ये किस्सा

पीएम मोदी ने कहा, “जब ‘वंदे मातरम’ ने अपनी 100वीं वर्षगांठ मनाई, तब देश इमरजेंसी में फंसा हुआ था… संविधान को दबा दिया गया था। अब जब इस गीत के 150 साल पूरे हो रहे हैं, यह सही समय है कि हम इसकी शान और इसकी स्वतंत्रता की भावना को फिर से उभारें—क्योंकि इसी ने हमें 1947 में आज़ादी दिलाई थी

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 08, 2025 पर 5:37 PM
'वंदे मातरम के खिलाफ जिन्ना ने नारा दिया और नेहरू ने...',  पीएम मोदी ने जब सदन में सुनाया ये किस्सा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर हुई ऐतिहासिक बहस की शुरुआत की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर हुई ऐतिहासिक बहस की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने जवाहरलाल नेहरू पर सीधी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि नेहरू ने राष्ट्रगीत पर मुहम्मद अली जिन्ना के एतराज का समर्थन किया और इससे कांग्रेस की लंबे समय से चली आ रही “असहजता” को बढ़ावा मिला। PM मोदी ने अपने भाषण में इंदिरा गांधी द्वारा 50 साल पहले लगाई गई इमरजेंसी का भी जिक्र किया और कहा कि कांग्रेस ने उस दौर में ‘वंदे मातरम’ की भावना को कमजोर किया।

पीएम ने साधा जमकर निशाना 

पीएम मोदी ने कहा, “जब ‘वंदे मातरम’ ने अपनी 100वीं वर्षगांठ मनाई, तब देश इमरजेंसी में फंसा हुआ था… संविधान को दबा दिया गया था। अब जब इस गीत के 150 साल पूरे हो रहे हैं, यह सही समय है कि हम इसकी शान और इसकी स्वतंत्रता की भावना को फिर से उभारेंक्योंकि इसी ने हमें 1947 में आज़ादी दिलाई थी।” एक और पूर्व प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू ने भी ‘वंदे मातरम’ का वही विरोध किया था जैसा जिन्ना ने किया था, क्योंकि उन्हें डर था कि इससे “मुसलमान नाराज हो सकते हैं।”

PM मोदी ने लोकसभा में कहा कि पिछली सदी में “कुछ ताकतों ने राष्ट्रगीत के साथ विश्वासघात किया,” जिसके बाद सदन में “शर्म करो, शर्म करो” के नारे भी सुने गए। उन्होंने कहा, “हमारा कर्तव्य है कि हम आने वाली पीढ़ियों को बताएं कि यह सब किसने किया।” PM मोदी ने बताया कि 1937 में आज़ादी से पहले, मोहम्मद अली जिन्ना की अगुवाई में मुस्लिम लीग ने ‘वंदे मातरम’ के खिलाफ अभियान चलाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और नेहरू ने इस विरोध का सामना करने के बजाय, खुद ही वंदे मातरम की “जांच” शुरू कर दी थी।

पीएम मोदी ने किया इस चिट्ठी का जिक्र

PM मोदी ने आगे कहा, “1937 में जब जिन्ना ने ‘वंदे मातरम’ का विरोध किया, तो उसके सिर्फ पाच दिन बाद नेहरूजी ने सुभाष चंद्र बोस को एक पत्र लिखा। उसमें कहा गया था कि इस गीत का ‘मठ वाले संदर्भ’ का हिस्सा मुसलमानों को परेशान कर सकता है। यह बात सुनकर पूरा देश हैरान रह गया।” उन्होंने बताया कि बाद में, 26 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस ने एक समझौता किया और ‘वंदे मातरम’ को हिस्सों में बांट दिया, और इसका कारण बताया गया—“साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए।”

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