Israel-Iran War: 'नागरिकों की सुरक्षा प्राथमिकता'; ईरान-इजरायल युद्ध के बीच पीएम मोदी ने नेतन्याहू को किया फोन, क्या हुई बात?

US-Israel attack Iran: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (1 मार्च) रात पश्चिम एशिया में मौजूदा क्षेत्रीय हालात के बीच इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब हाल के सैन्य घटनाक्रमों के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है। पीएम मोदी ने आम नागरिकों की सुरक्षा की चिंताओं पर जोर दिया

अपडेटेड Mar 02, 2026 पर 9:05 AM
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US-Israel attack Iran: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों की सुरक्षा की चिंताओं पर जोर दिया

US-Israel attack Iran: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में मौजूदा क्षेत्रीय हालात के बीच रविवार (1 मार्च) रात इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब हाल के सैन्य घटनाक्रमों के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है। भारत ने नागरिकों की सुरक्षा की चिंताओं पर जोर दिया। पीएम मोदी ने दोहराया कि जल्द से जल्द संघर्ष रोकना जरूरी है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उन्होंने हाल के घटनाक्रम पर भारत की चिंता जाहिर की। साथ ही कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने X पर लिखा, "वर्तमान क्षेत्रीय हालात पर चर्चा करने के लिए PM बेंजामिन नेतन्याहू से फ़ोन पर बात की। हाल के घटनाक्रमों पर भारत की चिंताओं से अवगत कराया और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताया। भारत दुश्मनी को जल्द खत्म करने की जरूरत पर जोर देता है।"

प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार रात संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से भी बात की। पीएम ने खाड़ी देश पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की। पीएम मोदी ने कहा कि भारत इस मुश्किल घड़ी में यूएई के साथ पूरी एकजुटता से खड़ा है।


पीएम मोदी ने खाड़ी देश में रहने वाले भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यूएई के राष्ट्रपति को धन्यवाद भी दिया। उन्होंने कहा कि भारत तनाव कम करने, क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता का समर्थन करता है।

प्रधानमंत्री ने कहा, "मैंने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति, मेरे भाई शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से बात की। मैंने संयुक्त अरब अमीरात पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की और इन हमलों में जान गंवाने वालों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। भारत इस कठिन समय में यूएई के साथ एकजुटता से खड़ा है।"

PM मोदी ने X पर एक पोस्ट में कहा, "हमने संयुक्त अरब अमीरात में रहने वाले भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। हम तनाव कम करने, क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता का समर्थन करते हैं।"

सीसीएस बैठक की अध्यक्षता की

प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार रात को सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) की बैठक की अध्यक्षता की। ऐसा माना जा रहा है कि इसमें पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की गई। यह बैठक अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद मौजूदा वैश्विक स्थिति और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने के बाद उत्पन्न स्थिति का जायजा लेने के लिए बुलाई गई थी। सीसीएस देश के सुरक्षा और रणनीतिक मामलों पर निर्णय लेने वाला सर्वोच्च निकाय है।

पीएम मोदी के राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु और पुडुचेरी के दो दिवसीय दौरे के बाद रात लगभग साढ़े 9 बजे राष्ट्रीय राजधानी पहुंचने के तुरंत बाद सीसीएस की बैठक आयोजित की गई। सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत समिति के सदस्य उपस्थित थे। बैठक में शीर्ष अधिकारियों ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और भारत पर इसके प्रभावों के बारे में जानकारी दी।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी के मिश्रा और शक्तिकांत दास, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, कैबिनेट सचिव टी वी सोमनाथन और विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी बैठक में उपस्थित थे। सूत्रों के अनुसार, ऐसा माना जा रहा है कि बैठक में पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, साथ ही फंसे हुए लोगों की सुरक्षा और स्थिति बिगड़ने पर उससे निपटने के तरीकों पर चर्चा हुई।

फिलहाल, पश्चिम एशिया का हवाई क्षेत्र लगभग बंद है। पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव बढ़ने के कारण हवाई सेवाएं बाधित हो गई हैं। इससे सैकड़ों भारतीय दुबई और अन्य प्रमुख हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं। इनमें से कई लोग सोशल मीडिया पर भारतीय सरकार से सहायता की अपील कर रहे हैं।

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सूत्रों के अनुसार, बैठक में ईरानी अधिकारियों द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से उत्पन्न स्थिति का भी जायजा लिया गया, जो भारतीय तेल वाहक जहाजों के लिए एक प्रमुख मार्ग है। ईरान में लगभग 10,000 भारतीय नागरिक, जबकि इजरायल में 40,000 से अधिक भारतीय नागरिक रहते हैं। खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीयों की संख्या लगभग 90 लाख है।

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