PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को बहरीन के राजा हमद बिन ईसा अल खलीफा और बहरीन की जनता को ईद-उल-फितर की हार्दिक शुभकामनाएं दीं, साथ ही पश्चिम एशिया में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हालिया हमलों की निंदा की।
PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को बहरीन के राजा हमद बिन ईसा अल खलीफा और बहरीन की जनता को ईद-उल-फितर की हार्दिक शुभकामनाएं दीं, साथ ही पश्चिम एशिया में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हालिया हमलों की निंदा की।
टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद एक पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा, “बहरीन के राजा महामहिम हमद बिन ईसा अल खलीफा से सार्थक बातचीत हुई। मैंने उन्हें और बहरीन की जनता को ईद-उल-फितर की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।”
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि दोनों नेताओं ने क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की और जारी तनाव के प्रभाव पर चिंता व्यक्त की।
Had a fruitful discussion with the King of Bahrain, His Majesty King Hamad Bin Isa Al Khalifa. Conveyed warm greetings on the occasion of Eid al-Fitr to him and the people of Bahrain.
We discussed the current situation in the West Asian region. Condemned attacks on the energy… — Narendra Modi (@narendramodi) March 20, 2026
प्रधानमंत्री मोदी ने एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों के गंभीर परिणामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि असर दुनिया भर में खाने-पीने की चीजों, ईंधन और खाद की सप्लाई पर पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि समुद्री रास्तों पर आवाजाही की आजादी बनी रहनी चाहिए और शिपिंग रूट्स को खुला और सुरक्षित रखना जरूरी है, क्योंकि ये वैश्विक व्यापार और स्थिरता के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
प्रधानमंत्री ने खाड़ी देश में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए बहरीन के राजा के लगातार समर्थन के लिए उनका आभार व्यक्त किया। यह बातचीत क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच भारत की निरंतर राजनयिक पहल को दर्शाती है।
28 फरवरी को ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद संघर्ष बढ़ने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी और बहरीन के राजा के बीच यह दूसरी बातचीत थी। ईरान ने बाद में कई खाड़ी देशों को निशाना बनाकर हमले किए, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ गई।
संघर्ष शुरू होने के बाद से, प्रधानमंत्री मोदी ने सऊदी अरब, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, मलेशिया, इजारायल और ईरान सहित कई विश्व नेताओं से बात की है। भारत का यही मानना रहा है कि बातचीत और स्थिरता सबसे जरूरी हैं, और स्थिति के विकास के साथ-साथ सभी पक्षों के साथ बातचीत जारी रखनी चाहिए।
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