PM Modi: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण नौकरियां जाने के वैश्विक डर के बीच पीएम मोदी ने युवाओं को जीत का मंत्र दिया है। समाचार एजेंसी ANI को दिए एक इंटरव्यू में पीएम मोदी ने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब भी कोई नया आविष्कार होता है, वह डर नहीं बल्कि नए अवसर लेकर आता है। उन्होंने युवाओं से कहा कि तकनीक से घबराने के बजाय भविष्य के लिए खुद को तैयार करना ही सबसे बड़ी समझदारी है।
'तैयारी है डर को खत्म करने की औषधि'
पीएम मोदी ने माना कि युवाओं के मन में एआई को लेकर चिंताएं हैं, लेकिन उन्होंने एक बहुत बड़ी बात 'तैयारी ही डर का सबसे अच्छा तोड़ है' कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार एआई को भविष्य की समस्या के रूप में नहीं, बल्कि वर्तमान की जरूरत के रूप में देख रही है। इसीलिए सरकार लोगों को 'स्किलिंग' और 'री-स्किलिंग' पर जोर दे रही है ताकि वे तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें।
नौकरियां खत्म नहीं होंगी, उनका स्वरूप बदलेगा
प्रधानमंत्री ने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए समझाया कि सदियों से हर तकनीकी क्रांति के समय नौकरियां जाने का डर रहा है, लेकिन असल में तकनीक ने कभी काम को खत्म नहीं किया। उन्होंने कहा, एआई के आने से कुछ नौकरियों का स्वरूप बदल सकता है, लेकिन यह अर्थव्यवस्था में नए तकनीकी रोजगार भी पैदा करेगा। पीएम मोदी एआई को एक 'फोर्स-मल्टीप्लायर' मानते हैं। यह डॉक्टरों, शिक्षकों और वकीलों को अधिक लोगों तक पहुंचने और उनकी मदद करने में सक्षम बनाएगा।
एआई की दुनिया में भारत की मजबूत स्थिति
पीएम मोदी ने गर्व से बताया कि भारत इस बदलाव के लिए पूरी तरह तैयार है। स्टैनफोर्ड ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी इंडेक्स 2025 में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर है, जो दिखाता है कि हमारे पास एआई रिसर्च, टैलेंट और इकोनॉमी में जबरदस्त बढ़त है। उन्होंने विश्वास जताया कि सही कौशल और तैयारी के साथ भारत के युवा 'फ्यूचर ऑफ वर्क' यानी भविष्य के काम का नेतृत्व करेंगे।
'विकसित भारत 2047' का बड़ा जरिया
प्रधानमंत्री के अनुसार, एआई सिर्फ एक तकनीक नहीं बल्कि 'विकसित भारत 2047' के सपने को पूरा करने का एक शक्तिशाली माध्यम है। अगर इसका सही और रणनीतिक इस्तेमाल किया जाए, तो यह शहरी और ग्रामीण भारत के बीच की दूरी को मिटा सकता है, विकास की चुनौतियों को हल कर सकता है और समावेशी विकास को बढ़ावा दे सकता है।