प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को लोकसभा में महिला आरक्षण पर अपना संबोधन दिया। इस दौरान उन्होंने कई बार विपक्ष पर निशाना साधा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण बिल पर सभी विपक्षी दलों से साथ आने की अपील करते हुए कहा कि इस बिल को राजनीतिक तराजू से न तौलें। उन्होंने कहा कि आधी आबादी को हमें रोकना नहीं चाहिए। इसलिए सभी दलों से अपील करते हैं कि सभी मिलकर इस बिल को पारित कराएं। वहीं गुरुवार को शुरू हुए संसद के विशेष सत्र में राजनीति का दिलचस्प नज़ारा देखने को मिला, जहां एक तरफ तीखी बहस चली तो दूसरी तरफ हल्का-फुल्का माहौल भी नजर आया।
जब पीएम मोदी ने अखिलेश यादव को बताया दोस्त
बता दें कि, लोकसभा में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को आगे बढ़ाने की बात की, तब लोकसभा में अपने भाषण के दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर मजाकिया अंदाज में चुटकी ली। प्रधानमंत्री ने अखिलेश यादव को “दोस्त” कहकर संबोधित किया और मुस्कुराते हुए कहा कि वे “कभी-कभी समर्थन भी देते हैं।” पीएम मोदी के इस बयान पर अखिलेश यादव हाथ जोड़ते हुए मुस्कुराते रहे। वहीं सांसद धर्मेंद्र यादव के बयान पर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टिप्पणी की। पीएम मोदी ने कहा कि धर्मेंद्र जी आपने सही किया मेरी पहचान करा दी।
बता दें कि लोसभा में चर्चा के दौरान धर्मेंद्र यादव ने तीनों बिलों का खिलाफ करते हुए सीधे तौर पर संविधान की भावना के खिलाफ बताया। इसके बाद पीएम मोदी ने कहा कि मैं आपका आभारी हूं, आपने मेरी पहचान करा दी और फिर अपने सामाजिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए कहा कि वे अति पिछड़े वर्ग से आते हैं। पीएम मोदी ने आगे मुस्कुराते हुए कहा कि अखिलेश उनके 'मित्र' हैं और कभी-कभी उनकी मदद भी कर देते हैं। यह सुनते ही सदन में हल्की हंसी गूंज गई और खुद अखिलेश यादव भी मुस्कुरा उठे।
बता दें कि, लोकसभा में आज पीएम मोदी ने सांसदों से अपील की कि इस मौके को राजनीति के चश्मे से न देखें। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक बिल नहीं है, बल्कि देश की शासन व्यवस्था को ज्यादा संवेदनशील और संतुलित बनाने की कोशिश है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि 'विकसित भारत' का मतलब सिर्फ सड़कों और इमारतों से नहीं है, बल्कि यह भी है कि समाज के हर वर्ग को बराबर हिस्सा मिले।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के उन नेताओं को भी साथ लाने की कोशिश की है, जो इस बिल का समर्थन कर सकते हैं। उन्होंने साफ संकेत दिया कि सरकार इस फैसले का श्रेय बांटने के लिए तैयार है, लेकिन इसे लागू करने के लिए पूरी तरह दृढ़ भी है। इस आत्मविश्वास को उस समय और मजबूती मिली, जब सदन में हुई वोटिंग में 251 सदस्यों ने बिल पेश करने के पक्ष में वोट दिया, जबकि 185 सदस्य इसके खिलाफ थे। यह आंकड़ा 17 अप्रैल को होने वाले अंतिम मतदान से पहले सरकार के लिए एक मजबूत बढ़त दिखाता है।