'पुलिस स्टेशन TMC के ऑफिस बन गए हैं', सुवेंदु अधिकारी का ममता सरकार पर बड़ा हमला

सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि TMC ताकत का गलत इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल के कुछ नेताओं के बयान हालात को और बिगाड़ रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य में डर का माहौल बनाया जा रहा है और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं

अपडेटेड Feb 08, 2026 पर 9:59 PM
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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सियासी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सियासी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। रविवार (8 फरवरी) को राणाघाट में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर जमकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में आम लोग डर के माहौल में जी रहे हैं और कई परिवार राज्य छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब पीड़ित लोग थाने में शिकायत दर्ज कराने जाते हैं, तो उन्हें कोई मदद नहीं मिलती। उन्होंने TMC पर हमला करते हुए कहा, "पुलिस स्टेशन पार्टी ऑफिस बन गए हैं। तृणमूल कांग्रेस के पैसे इकट्ठा करने के सेंटर बन गए हैं। वे वोट चुराने वाली मशीन बन गए हैं।"

इसके साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में पैसे लेकर केस को कमजोर किया जा रहा है, ताकि बड़े आरोपियों पर कार्रवाई न हो। उन्होंने कहा, "डेकोरेटर और मोमो के लिए 5 लाख रुपए दिए, जो जेल में है, उसने 5 लाख दिए। और जिसे जेल जाना था, वह चीफ मिनिस्टर की मेहरबानी की वजह से जेल नहीं गया। उसने 5 लाख रुपए दिए तो, इस केस को कमज़ोर किया जा रहा है ताकि यह मोमो कंपनी के मालिक के खिलाफ न हो।"

सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि TMC ताकत का गलत इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल के कुछ नेताओं के बयान हालात को और बिगाड़ रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य में डर का माहौल बनाया जा रहा है और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।


वहीं, उन्होंने वोटर लिस्ट को लेकर भी सवाल उठाए हैं। सुवेंदु का कहना है कि आगामी चुनाव से पहले वोटर लिस्ट पूरी तरह साफ होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि मरे हुए, नकली, डबल-ट्रिपल एंट्री वाले और बांग्लादेशी अवैध घुसपैठियों, और रोहिंग्याओं का नाम फ़ाइनल लिस्ट में न हो।" साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा होता है तो हम हाइकोर्ट जाएंगे। उन्होंने कहा, "अगर ऐसा होता है तो पहले CEO के पास जाएंगे। अगर वे अपील खारिज करते है, तो हम हाई कोर्ट जाएंगे।"

कुल मिलाकर, बंगाल चुनाव से पहले राणाघाट समेत कई इलाकों में राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है। कई जगहों पर राज्य कर्मियों का प्रदर्शन भी देखने को मिल रहा है। ऐसे में यह साफ है कि आने वाले दिनों में वोटर लिस्ट, कानून-व्यवस्था और घुसपैठ जैसे मुद्दे चुनावी हथियार बनने वाले है।

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