पूरे देश को हिला देने वाले पुणे के केतन अग्रवाल मर्डर केस की आरोपी सिया गोयल और उसके बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी को 16 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दोनों की 11 दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद अब जांच एजेंसियां उनसे पूछताछ की बजाय मामले से जुड़े सबूतों की जांच और उन्हें मजबूत करने पर ध्यान दे रही हैं।
इस मामले में अब जांच का सबसे बड़ा फोकस डिजिटल सबूतों पर है। जांच एजेंसियां सिया गोयल के मोबाइल से मिले डेटा और कोड में लिखे गए मैसेज को समझने की कोशिश कर रही हैं। पुणे ग्रामीण पुलिस को हाल ही में स्नैपचैट की एक चैट मिली है। इसमें सिया ने कथित तौर पर अपनी एक दोस्त से आधार कार्ड की जानकारी मांगी थी ताकि टिकट बुक किया जा सके। चैट में उसने यह भी लिखा था कि यह "ऐसी शादी के लिए है जो कभी नहीं होगी।" अब जांचकर्ता दूसरे संदिग्ध कोड वाले मैसेज भी खंगाल रहे हैं। उनका पता लगाना है कि क्या इस कथित साजिश में सिया और चेतन के अलावा कोई तीसरा व्यक्ति भी शामिल था।
इस मामले में लोहगढ़ किले से कथित तौर पर धक्का देने की घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है। इसलिए पुलिस पूरे मामले को परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर मजबूत बनाने में जुटी है। कानूनी प्रक्रिया के तहत अभियोजन पक्ष को ऐसे सबूत पेश करने होंगे, जिनसे घटनाओं की पूरी कड़ी साफ तौर पर जुड़ जाए और यह साबित हो सके कि आरोपियों की भूमिका ही अपराध की ओर इशारा करती है।
जांच में पुलिस कई अहम सबूतों को जोड़कर मामला मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसमें घटनास्थल का पंचनामा, घटना का री-क्रिएशन (दोबारा घटनाक्रम तैयार करना) और वह जगह भी शामिल है, जहां आरोपियों ने कथित तौर पर केतन को धक्का देने की प्रैक्टिस की थी। इसके अलावा, घटना के समय पहने गए बताए जा रहे कपड़ों और केतन के जले हुए पासपोर्ट की फोरेंसिक जांच भी की जा रही है।
पंचशील टेस्ट सुप्रीम कोर्ट का एक अहम कानूनी सिद्धांत है। इसका इस्तेमाल तब किया जाता है, जब किसी मामले में सीधे गवाह नहीं होते और फैसला परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर करना होता है। साल 1984 में 'शरद बिरधीचंद सारडा बनाम महाराष्ट्र राज्य' मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इसके पांच मुख्य सिद्धांत बताए थे।इन पांच सिद्धांतों में यह जरूरी है कि सभी तथ्य पूरी तरह साबित हों, सबूत अपराध से साफ तौर पर जुड़े हों, उनकी विश्वसनीयता मजबूत हो, किसी दूसरी संभावना की गुंजाइश न बचे और सभी सबूत मिलकर ऐसी अटूट कड़ी बनाएं जो सीधे आरोपी की ओर इशारा करे।
शुरुआत में पुलिस दोनों आरोपियों के अलग-अलग बयानों की सच्चाई जानने के लिए उनका पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराना चाहती थी। लेकिन कोर्ट में पेशी के दौरान सिया गोयल और चेतन चौधरी, दोनों ने इन टेस्ट के लिए अपनी मंजूरी देने से इनकार कर दिया। भारतीय कानून के अनुसार, किसी आरोपी की सहमति के बिना पॉलीग्राफ या नार्को टेस्ट नहीं किया जा सकता। इसलिए पुलिस को इन टेस्ट की मांग वापस लेनी पड़ी और अब जांच दूसरे सबूतों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।
कोर्ट में अब जमानत की लड़ाई शुरू
सिया गोयल और चेतन चौधरी अब पुलिस हिरासत की जगह न्यायिक हिरासत में हैं। ऐसे में दोनों की ओर से जमानत के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उनके वकीलों का कहना है कि पुलिस जरूरी डिजिटल डिवाइस पहले ही जब्त कर चुकी है, इसलिए अब उन्हें लंबे समय तक जेल में रखने की जरूरत नहीं है। वहीं, सिया गोयल की ओर से अदालत में कौन वकील पेश होगा, इसे लेकर भी नया कानूनी विवाद सामने आया है। इस मामले में एक चर्चित वकील का नाम सामने आया है और 10 करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस की भी चर्चा हो रही है।