Pune Porsche Case: सुप्रीम कोर्ट ने पुणे पोर्श कार हादसा मामले में 3 आरोपियों को दी जमानत, ब्लड सैंपल बदलने का था आरोप

Pune Porsche Case: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (2 फरवरी) को तीन लोगों को जमानत दे दी, जिन पर मई 2024 में पुणे पोर्श क्रैश के बाद ब्लड सैंपल से छेड़छाड़ करने में मदद करने का आरोप है। इस हादसे में दो युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत हो गई थी

अपडेटेड Feb 02, 2026 पर 2:11 PM
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Pune Porsche Case: सुप्रीम कोर्ट ने 2024 पुणे पोर्श केस में ब्लड सैंपल बदलने के आरोपी 3 लोगों को जमानत दे दी

Pune Porsche Case: सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में पुणे में पोर्श कार दुर्घटना मामले में तीन आरोपियों को सोमवार (2 फरवरी) को जमानत दे दी, जिसमें दो लोगों की जान चली गई थी। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि नाबालिगों से जुड़ी ऐसी घटनाओं के लिए माता-पिता ही जिम्मेदार हैं। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जल्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों को काबू में रखने में सक्षम नहीं हैं। पीठ ने कहा, "नशीली दवाओं का सेवन एक अलग मसला है। लेकिन उन्हें (बच्चों को) कार की चाबियां और मौज-मस्ती करने के लिए पैसे देना अस्वीकार्य है।"

सुप्रीम कोर्ट ने 23 जनवरी को इस मामले में आरोपी अमर संतिश गायकवाड़ द्वारा दायर जमानत याचिका पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा था। गायकवाड़ पर आरोप है कि वह एक बिचौलिए के रूप में काम कर रहा था। इसने नाबालिग आरोपी के ब्लड सैंपल को बदलने के लिए अस्पताल में एक डॉक्टर के सहायक को तीन लाख रुपये दिए थे।

पुणे के कल्याणी नगर इलाके में 19 मई 2024 को कथित तौर पर शराब के नशे में धुत 17 वर्षीय लड़के द्वारा चलाई जा रही एक पोर्श कार ने दो आईटी पेशेवरों को टक्कर मार दी। इससे उनकी मौत हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सात जनवरी को इस मामले में जमानत का अनुरोध कर रहे दो अन्य आरोपियों द्वारा दायर याचिकाओं पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा था।


आदित्य अविनाश सूद (52) और आशीष सतीश मित्तल (37) को पिछले साल 19 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। उनके ब्लड सैंपल का इस्तेमाल दो नाबालिगों के संबंध में टेस्ट के लिए किया गया था जो दुर्घटना के समय 17 वर्षीय मुख्य आरोपी के साथ कार में थे। पिछले साल 16 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में गायकवाड़, सूद और मित्तल सहित आठ आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं।

किशोर न्याय बोर्ड ने नाबालिग आरोपी को मामूली शर्तों पर जमानत दे दी थी। इससे पूरे देश में आक्रोश फैल गया था। जमानत की शर्तों में सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों का निबंध लिखना शामिल था। आरोपी नाबालिग को जमानत दिए जाने पर मचे बवाल के बाद पुणे पुलिस ने किशोर न्याय बोर्ड से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया। इसके बाद बोर्ड ने आदेश में संशोधन करते हुए नाबालिग को एक सुधार गृह में भेज दिया। जून में हाई कोर्ट ने नाबालिग को रिहा करने का आदेश दिया।

इस मामले में शामिल नाबालिग को सुधार गृह से रिहा कर दिया गया। जबकि उसके माता-पिता विशाल अग्रवाल और शिवानी अग्रवाल, डॉक्टर अजय तावरे और श्रीहरि हलनोर, ससून अस्पताल के कर्मचारी अतुल घाटकांबले, आदित्य अविनाश सूद, आशीष मित्तल और अरुण कुमार सिंह तथा दो बिचौलियों सहित 10 आरोपियों को ब्लड सैंपल बदलने के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया।

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