Raghav Chadha: राघव चड्ढा को लगा झटका! 12 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स ने किया अनफॉलो

Raghav Chadha: राघव चड्ढा ने युवाओं के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। इसकी वजह यह थी कि वे ऐसे मुद्दे उठाते थे, जो सीधे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े होते हैं और जिन्हें अक्सर राजनीति में नजरअंदाज कर दिया जाता है। इनमें पैटरनिटी लीव, ट्रैफिक की परेशानी, टेलीकॉम कंपनियों की रोज की डेटा सीमा, हवाई अड्डों पर महंगे खाने-पीने के सामान जैसे मुद्दे शामिल थे

अपडेटेड Apr 25, 2026 पर 4:52 PM
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राघव चड्ढा जिस तरह से आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए हैं, लगता है कि उनकी लोकप्रियता को जबरदस्त झटका लगा है

आम आदमी पार्टी में बड़ी फूट पड़ गई है। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha), संदीप पाठक, अशोक मित्तल समेत सात सांसदों ने पार्टी छोड़ दिया है और भाजपा में शामिल हो गए हैं। वहीं राघव चड्ढा जिस तरह से आम आदमी पार्टी छोड़ा तो लगता है कि उनकी लोकप्रियता को जबरदस्त झटका लगा है। कम से कम सोशल मीडिया के इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म को देखने से तो यही लग रहा है।

24 घंटे में घटे 12 लाख फॉलोअर्स

आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया फॉलोअर्स को किसी नेता की लोकप्रियता का एक अहम पैमाना माना जाता है। इसी बीच आंकड़े बताते हैं कि राघव चड्ढा को भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद सोशल मीडिया पर नुकसान उठाना पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी में जाने के 24 घंटे के अंदर ही उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से करीब 12 लाख फॉलोअर्स कम हो गए। शुक्रवार को उनके करीब 14.6 मिलियन फॉलोअर्स थे, जो शनिवार दोपहर तक घटकर लगभग 13.4 मिलियन रह गए।


राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस विरोध में सबसे आगे युवा वर्ग, खासकर नई पीढ़ी (Gen Z), नजर आ रही है। अब देखना यह होगा कि डेटा और ट्रेंड्स की राजनीति समझने वाले राघव चड्ढा इस स्थिति से कैसे निपटते हैं और अपनी छवि को फिर से मजबूत बना पाते हैं या नहीं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रवक्ता अनीश गावंडे ने एक पोस्ट में कहा कि इंस्टाग्राम पर नई पीढ़ी (Gen Z) द्वारा चलाए गए ‘अनफॉलो’ अभियान के कारण राघव चड्ढा के फॉलोअर्स 24 घंटे के भीतर करीब 10 लाख कम हो गए। उन्होंने आगे कहा कि इंटरनेट किसी को भी रातों-रात हीरो बना सकता है, लेकिन यही इंटरनेट किसी को उतनी ही तेजी से नीचे भी ला सकता है।

राघव चड्ढा की लोकप्रियता को झटका लगा है?

दरअसल, राघव चड्ढा ने युवाओं के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। इसकी वजह यह थी कि वे ऐसे मुद्दे उठाते थे, जो सीधे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े होते हैं और जिन्हें अक्सर राजनीति में नजरअंदाज कर दिया जाता है। इनमें पैटरनिटी लीव, ट्रैफिक की परेशानी, टेलीकॉम कंपनियों की रोज की डेटा सीमा, हवाई अड्डों पर महंगे खाने-पीने के सामान जैसे मुद्दे शामिल थे। इसके अलावा, उन्होंने 10 मिनट डिलीवरी मॉडल के जरिए काम करने वाले गिग वर्कर्स (अस्थायी कर्मचारियों) के शोषण जैसे मुद्दों को भी उठाया। गिग वर्कर्स की समस्याओं को समझने के लिए उन्होंने एक दिन ब्लिंकिट के डिलीवरी पार्टनर के तौर पर काम भी किया था। इससे उनकी छवि एक ऐसे नेता की बनी, जो आम लोगों की समस्याओं को समझता है और उन पर खुलकर बात करता है।

उनकी कोशिशों का असर तब देखने को मिला, जब केंद्र सरकार ने डिलीवरी कंपनियों के लिए 10 मिनट में डिलीवरी करने की अनिवार्य समय-सीमा को हटाना जरूरी कर दिया। इन कदमों से राघव चड्ढा की छवि एक ऐसे नेता के रूप में बनी, जो आम लोगों की समस्याओं को समझता है और उनके लिए हमेशा उपलब्ध रहता है। राज्यसभा में उन्होंने खास तौर पर युवाओं (Gen Z) से जुड़े मुद्दों पर ध्यान दिया, जिससे पारंपरिक राजनीति और नई पीढ़ी की सोच के बीच की दूरी कुछ हद तक कम हुई। इसी वजह से उन्हें एक अलग तरह के नेता के रूप में देखा जाने लगा।

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