राजस्थान के एक सरकारी अस्पताल में अपने घायल बेटे की देखभाल कर रहे 60 साल के शख्स को ही सर्जरी के लिए टेबल पर लिटा दिया गया और ये सब उनके नाम की वजह से हुआ। जगदीश के बेटे मनीष को एक दुर्घटना के बाद कोटा के सरकारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने कहा कि उसके पैर का ऑपरेशन करना पड़ेगा। जगदीश को स्ट्रोक के कारण बोलने में दिक्कत आती है। वह अपने बेटे की देखभाल के लिए 12 अप्रैल को अस्पताल आए थे। मनीष को ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया और जगदीश बाहर बैठकर सर्जरी खत्म होने का इंतजार कर रहे थे।
जब वह ऑपरेशन थिएटर के बाहर बैठे थे, तो कार्डियोथोरेसिक और वैस्कुलर सर्जरी विभाग के कुछ स्वास्थ्य कर्मचारियों ने एक नाम पुकारा, 'जगदीश'। बेटे की सर्जरी खत्म होने का इंतजार कर रहे बुजुर्ग व्यक्ति ने अपना हाथ उठाया, जिसके बाद उन्हें तुरंत दूसरे ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया।
जैसा कि स्ट्रोक के बाद से जगदीश को बोलने में परेशानी हो रही थी, तो वह कर्मचारियों को यह बता नहीं पाए कि वो मरीज नहीं बल्कि अपने बेटे की सर्जरी के लिए यहां आए हैं।
स्वास्थ्य कर्मचारियों ने जगदीश के बाएं हाथ पर डायलिसिस फिस्टुला लगाया। डायलिसिस फिस्टुला, डायलिसिस के लिए ब्लड फ्लो को आसान बनाने के लिए आर्टरी और वेन के बीच सर्जिकली बनाया गया कनेक्शन होता।
शुक्र है कि इस बीच ऑपरेशन करने वाला डॉक्टर आ गया और उसने बताया कि स्वास्थ्य कर्मचारियों ने गलत आदमी को बुला लिया है। तभी ऑपरेशन रोक दिया गया और जगदीश के हाथ में हुए घाव पर पट्टी बांध दी गई।
जगदीश के बेटे मनीष के बाएं पैर में अब प्लास्टर लगा हुआ है और वह अस्पताल के वार्ड में रिकवरी कर रहा है। उसके पिता जगदीश, हाथ में पट्टी बांधकर उससे मिलने आते हैं।
मनीष ने कहा, "जब मुझे सर्जरी के लिए ले जाया गया, तो मेरे पिता को बाहर ले जाया गया। जब मुझे सर्जरी के बाद ऑपरेशन थियेटर से बाहर लाया गया, तो मैंने उन्हें नहीं देखा। मुझे वार्ड में लाया गया और मैंने स्टाफ से कहा कि मुझे मेरे पिता नहीं मिले। किसी ने कहा कि उन्हें ऑपरेशन के लिए ले गए हैं। मैंने पूछा कि किस ऑपरेशन के लिए, वे तो मेरे साथ थे।" उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन को इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
अस्पताल प्रशासन ने अब मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. संगीता सक्सेना ने कहा, "जैसे ही मुझे इस प्रक्रिया के बारे में पता चला, मैंने तीन सदस्यीय समिति बनाने के लिए कहा, जो मामले की जांच करेगी और 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपेगी।"