Rajsthan: इन गांवों में महिलाओं के स्मार्ट फोन इस्तेमाल करने पर लगा बैन, पंचायत ने सुनाया अजीबोगरीब फैसला

पंचायत के आदेश के अनुसार, अब इन गांवों की महिलाएं स्मार्टफोन या कैमरे वाले मोबाइल फोन का उपयोग नहीं कर सकेंगी। उन्हें केवल की-पैड वाले सामान्य मोबाइल फोन रखने की अनुमति होगी। इतना ही नहीं, शादी समारोह. यहां तक कि पड़ोसी के घर जाते समय भी मोबाइल फोन साथ ले जाने पर पाबंदी रहेगी

अपडेटेड Dec 23, 2025 पर 5:34 PM
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राजस्थान के जालौर जिले में पंचायत ने एक ऐसा अजीबोगरीब फरमान सुनाया है

राजस्थान के जालौर जिले में पंचायत ने एक ऐसा अजीबोगरीब फरमान सुनाया है, जिसे सुनकर आपको भी हैरानी होगी। पंचायत का ये फैसला बिल्कुल तुगलकी फरमान जैसा लगेगा। बता दें कि जालौर जिले में पंचायत ने 15 गांव की बहू-बेटियां को कैमरे वाला फोन यूज करने पर बैन लगा दिया जाएगा। इतना ही नहीं सार्वजनिक समारोह से लेकर पड़ोसी के घर पर भी फोन ले जाने पर पाबंदी रहेगी। बता दें कि पंचायत ने इस फैसले को लागू करने के लिए बकायदा एक तारीख का भी ऐलान किया है। पंचायत का ये फैसला 26 जनवरी से लागू होगा।

पंचायत ने दिया अजीब फरमान 

पंचायत के आदेश के अनुसार, अब इन गांवों की महिलाएं स्मार्टफोन या कैमरे वाले मोबाइल फोन का उपयोग नहीं कर सकेंगी। उन्हें केवल की-पैड वाले सामान्य मोबाइल फोन रखने की अनुमति होगी। इतना ही नहीं, शादी समारोह, सामाजिक कार्यक्रम, सार्वजनिक आयोजन या यहां तक कि पड़ोसी के घर जाते समय भी मोबाइल फोन साथ ले जाने पर पाबंदी रहेगी। पंचायत का कहना है कि यह फैसला इसलिए किया गया है, क्योंकि महिलाओं के पास मोबाइल होने से बच्चे इसका उपयोग करते हैं। जिससे उनकी आंखें खराब होने का डर रहता है।


पांबदी के पीछे बताई ये वजह 

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो समाज के अध्यक्ष सुजनाराम चौधरी ने बताया कि बैठक में पंच हिम्मताराम ने फैसला पढ़कर सुनाया। हिम्मतराम ने बताया कि देवाराम कारनोल वालों ने ये प्रस्ताव रखा था। इसमें सभी पंचों और लोगों ने चर्चा करते हुए निर्णय लिया कि 15 गांवों की बहू-बेटियां फोन पर बात करने के लिए की-पैड वाला फोन रखेंगी। इसके साथ ही पढ़ाई करने वाली बच्चियों को मोबाइल रखना अगर जरूरी होगा तो वे अपने घर में ही मोबाइल से पढ़ाई करेंगी। यानि वे घर में ही मोबाइल का यूज कर सकेंगी।

वहीं पंचायत के इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों के अलग-अलग रिएक्शन सामने आ रहे हैं। कुछ लोग इसे बच्चों के स्वास्थ्य के हित में बताया जा रहा है, तो वहीं कुछ इसे महिलाओं की स्वतंत्रता पर पाबंदी के रूप में देख रहे हैं।

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