Ayodhya Ram temple donation case: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में श्री राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित हेराफेरी के आरोपों की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने मंगलवार (23 जून) को यूपी सरकार को अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट सौंप दी। लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) संजय प्रसाद को यह शुरुआती रिपोर्ट सौंपी। उन्होंने बताया कि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच अभी भी चल रही है। मामले में अभी जानकारी जुटाई जा रही है।
अयोध्या राम मंदिर में मिले चंदे के गलत इस्तेमाल के आरोपों के बाद मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को SIT का गठन किया था। SIT द्वारा शुरुआती रिपोर्ट सौंपने के बाद, पंत ने PTI वीडियो को बताया कि SIT अगले 10 से 15 दिनों के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने की कोशिश कर रही है। पंत ने कहा, "अब तक सामने आई जानकारी और हमारे पास मौजूद तथ्यों के आधार पर हमने आज पहली रिपोर्ट सौंपी है। यह केवल शुरुआती रिपोर्ट है और अंतिम रिपोर्ट कुछ समय बाद सौंपी जाएगी।"
उन्होंने कहा कि रिपोर्ट गोपनीय है। उन्हें इस चरण में मीडिया के साथ जांच के नतीजों का विवरण साझा करने की अनुमति नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि क्या टीम आगे की जांच के लिए अयोध्या लौटेगी क्योंकि सौंपी गई रिपोर्ट केवल शुरुआती थी? इस पर पंत ने PTI से कहा, "बिल्कुल, हम जरूरत के हिसाब से ऐसा करेंगे।"
अखिलेश यादव ने उठाया था मामला
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 7 जून को उन रिपोर्टों का हवाला दिया था जिनमें दावा किया गया था कि राम मंदिर में दिए गए चंदे में से करोड़ों रुपये गायब हैं। उन्होंने अदालतों से इस मामले का संज्ञान लेने का आग्रह किया था। यादव ने SIT जांच पर रोज़ाना जानकारी देने की मांग की थी। साथ ही आरोप लगाया था कि एजेंसी पर जनता का भरोसा कम हो गया है, जिसे उन्होंने BJP सरकार के तहत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का नतीजा बताया था।
मंदिर से जुड़े लोगों को जांच पूरी होने तक अयोध्या न छोड़ने का निर्देश
राम मंदिर के दान में कथित हेराफेरी की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों को जांच पूरी होने तक अयोध्या नहीं छोड़ने के निर्देश दिए। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने रविवार को लखनऊ रवाना होने से पहले यह निर्देश दिए। सूत्रों ने बताया कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों और जांच से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ सहित रोजाना की जांच रिपोर्ट डिजिटल रूप में सुरक्षित की जा रही हैं। सूत्रों ने बताया कि एसआईटी अपनी जांच रिपोर्ट रोजाना मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज रही है।
सूत्रों के मुताबिक, सबसे बड़ी कथित अनियमितता कुंभ मेले के दौरान सामने आई, जब करीब दो महीने की अवधि में रोजाना लगभग 10 लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे थे। दान पेटियां दो घंटे के भीतर ही नोटों से भर जाती थीं। यही वजह है कि एसआईटी इस दान की निगरानी एवं हिसाब-किताब की गहराई से जांच कर रही है। सूत्रों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में भगवान राम को चढ़ाए गए सोने, चांदी के आभूषणों, हीरे और अन्य कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी सामने आई है।