अयोध्या राम मंदिर में दान और चढ़ावे की चोरी का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में अब तक 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जो मंदिर के दान में धांधली करने के आरोपी हैं। पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) अब उन सभी लोगों की भूमिका की जांच कर रही है, जिनका मंदिर के धन प्रबंधन से कोई भी संबंध हो सकता है। वहीं यह विवाद तब और बढ़ गया, जब दावा किया गया कि इस मामले के आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव की समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से लगातार फोन पर बातचीत के दावे किए गए।
सपा प्रमुख ने दी कार्रवाई की चेतावनी
बता दें कि, इस मामले में आरोपी टिन्नू यादव और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच कथित फोन पर बातचीत को लेकर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की सोशल मीडिया पोस्ट पर विवाद छिड़ गया है। अब अखिलेश यादव ने भाजपा सांसद और अन्य नेताओं को चेतावनी दी है कि अगर विवादित पोस्ट नहीं हटाई गई और सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी गई, तो वे उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।
भाजपा सांसद ने किया गया था ये दावा
दावों के अनुसार, आरोपी टिन्नू यादव की समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से लगभग हर दिन एक या दो बार फोन पर बात होती थी। खबरों में यह भी दावा किया गया है कि गिरफ्तारी से पहले टिन्नू यादव ने एक ही दिन में अखिलेश यादव से तीन बार बातचीत की थी। इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया, जब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा, "टिन्नू टिप्पू से बात कर रहा था।" उन्होंने अखिलेश यादव के लिए भाजपा नेताओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले उपनाम का प्रयोग किया। इसके साथ ही उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट भी साझा की, जिसमें दावा किया गया कि टिन्नू यादव और अखिलेश यादव के बीच कथित संपर्कों ने राम मंदिर दान की कथित चोरी के मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया है।
मामले की टाइमलाइन खंगाल रही है पुलिस
जांच एजेंसियां अब इस पूरे मामले की टाइमलाइन भी खंगाल रही हैं। दान की कथित चोरी का पहला मामला 5 जून को सामने आया था, लेकिन उस समय तुरंत कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसी देरी के कारण यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या गिरफ्तारी और मामला सार्वजनिक होने से पहले ही इसकी जानकारी राजनीतिक नेताओं तक पहुंच गई थी। आरोपी टिन्नू यादव पेशे से टेम्पो चालक बताया जाता है। आरोप है कि उसने विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता के रूप में मंदिर प्रशासन का भरोसा जीता। इसके बाद उसे श्रद्धालुओं के चढ़ावे को इकट्ठा करने और उसकी गिनती करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
अखिलेश यादव ने कही थी ये बात
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोपी टिन्नू यादव का खुलकर बचाव किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "फुंगी को फांसी, शाख को माफी"। उनका कहना है कि छोटे लोगों पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि बड़े और प्रभावशाली लोगों को बचाया जा रहा है। अखिलेश यादव ने दावा किया कि टिन्नू यादव निर्दोष है और असली जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं हो रही।
सपा को मिलेगा इस मुद्दे का फायदा?
वहीं, राजनीतिक विश्लेषक राजेंद्र कुमार का कहना है कि यह मामला सत्तारूढ़ पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदायक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस विवाद के जरिए समाजवादी पार्टी को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर हमला करने का बड़ा मुद्दा मिल गया है। उनके मुताबिक, विपक्ष इस कथित चोरी के मामले को भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े लोगों और संस्थाओं से जोड़कर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषक राजेंद्र कुमार का कहना है कि उत्तर प्रदेश में चुनाव में अब करीब छह महीने का समय बचा है। ऐसे में यह मामला काफी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि राम मंदिर सिर्फ आस्था का विषय नहीं है, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सबसे बड़े राजनीतिक मुद्दों में भी शामिल है।
हालांकि, जांच एजेंसियों के सामने अभी कई सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि टिन्नू यादव और अखिलेश यादव के बीच इतनी बार फोन पर बातचीत क्यों हुई और उन बातचीत में क्या चर्चा हुई। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि क्या इन बातचीत का राम मंदिर के दान की कथित चोरी के मामले से कोई संबंध था। इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही साफ होगा कि यह मामला केवल आपराधिक जांच तक सीमित रहेगा या फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन जाएगा।