अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे विवाद की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने ट्रस्ट और मंदिर से जुड़े अधिकारियों को फिलहाल अयोध्या छोड़कर कहीं न जाने के निर्देश दिए हैं। मंदिर से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान चढ़ावे में मिले सोने, चांदी और अन्य कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड और दस्तावेजों में कुछ गड़बड़ियां सामने आई हैं। जांचकर्ताओं को इन चीजों के डॉक्यूमेंटेशन में कई गड़बड़ियां मिली हैं, जिनकी अब विस्तार से जांच की जा रही है।
सोना-चांदी और हीरों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी
तीन सदस्यीय एसआईटी ने रविवार को लखनऊ लौटने से पहले यह निर्देश जारी किया। सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान सबसे अहम मुद्दों में से एक भगवान राम को भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों, हीरों और अन्य कीमती रत्नों के रिकॉर्ड से जुड़ा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन चढ़ावों का सही तरीके से हिसाब-किताब रखा गया था या नहीं।
CMO को रोज भेजी जा रही रिपोर्ट
जानकारी के मुताबिक, दो महीने से अधिक समय तक प्रतिदिन करीब 10 लाख श्रद्धालु मंदिर आए। इस दौरान दान-पात्र कुछ ही घंटों में नोटों से भर जाते थे। इसी वजह से दान में मिली राशि और अन्य चढ़ावों की निगरानी तथा उनके हिसाब-किताब की प्रक्रिया एसआईटी जांच का प्रमुख विषय बन गई है।
मंदिर से जुड़े सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के अधिकारियों और जांच से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ के आधार पर तैयार की गई दैनिक जांच रिपोर्ट को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा गया है। इन रिपोर्टों को अंतिम रूप देने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा जाएगा।
सूत्रों ने बताया कि एसआईटी अपनी जांच की प्रगति रिपोर्ट रोजाना मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) को भेज रही थी। उन्होंने यह भी कहा कि जांच केवल कथित फंड गबन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मंदिर ट्रस्ट द्वारा विभिन्न चरणों में की गई जमीन की खरीद और निर्माण सामग्री की खरीद प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है। जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि मंदिर ट्रस्ट ने जिन जमीनों की खरीद की, उनकी कीमत बाजार दरों की तुलना में कहीं अधिक तो नहीं थी। इन सभी पहलुओं की विस्तृत जांच के बाद एसआईटी अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
समाजवादी पार्टी सहित कई राजनीतिक दलों ने इस मामले को जोरदार तरीके से उठाया था। अयोध्या राम मंदिर में मिले दान के कथित दुरुपयोग के आरोपों के बाद मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। इस तीन सदस्यीय एसआईटी में लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है। सरकार ने इस टीम को आरोपों की निष्पक्ष और विस्तृत जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि मामले से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाया जा सके और जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई की जा सके।