छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक बड़े फैसले में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को 2003 में एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की बैंच ने 2 अप्रैल को दिए अपने आदेश में निचली अदालत के 2007 के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। बता दें कि, यह फैसला सोमवार को हाई कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किया गया।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि, निचली अदालत द्वारा दिया गया बरी करने का निर्णय कानून के अनुसार सही नहीं था और यह उपलब्ध सबूतों के खिलाफ था, इसलिए इसे रद्द किया जाता है। इसके बाद अदालत ने अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी माना और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही उन पर 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है, जिसे न भरने की स्थिति में उन्हें छह महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
रामअवतार जग्गी की हत्या 4 जून 2003 को उस समय हुई थी, जब अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री थे। इस मामले की शुरुआती जांच राज्य पुलिस ने की थी, लेकिन बाद में केस को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया। सीबीआई ने जांच के बाद अमित जोगी सहित कई लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। मई 2007 में रायपुर की एक अदालत ने इस मामले में 28 लोगों को दोषी माना था, लेकिन अमित जोगी को पर्याप्त सबूत न होने के कारण बरी कर दिया गया था। इसके बाद सीबीआई ने इस फैसले को चुनौती दी, लेकिन वर्ष 2011 में हाई कोर्ट ने देरी का हवाला देते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी। साथ ही राज्य सरकार और रामअवतार जग्गी के बेटे की ओर से दायर अपील भी अदालत ने स्वीकार नहीं की थी।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद बड़ा मोड़ आया। पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को निर्देश दिया था कि वह सीबीआई की उस याचिका पर दोबारा विचार करे, जिसमें अमित जोगी को बरी किए जाने को चुनौती दी गई थी। इसके बाद हाई कोर्ट ने पिछले महीने इस केस को फिर से खोला और अब अमित जोगी को दोषी ठहराते हुए फैसला सुनाया है। इस निर्णय के साथ करीब 20 साल पुराने मामले में अहम प्रगति देखने को मिली है।