Pawan Khera Bail: पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत, हिमंता की पत्नी वाले केस में आया ये फैसला

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदूरकर की बेंच ने खेड़ा को अग्रिम जमानत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। यह मामला असम के सीएम की पत्नी से जुड़ा है।

अपडेटेड May 01, 2026 पर 12:21 PM
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पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत

Pawan Khera Bail: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदूरकर की बेंच ने खेड़ा को अग्रिम जमानत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा द्वारा लगाए गए जालसाजी और मानहानि के आरोपों से जुड़ा है।

क्या है पूरा मामला?

पवन खेड़ा पर आरोप है कि उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान असम के मुख्यमंत्री की पत्नी के खिलाफ झूठे और भ्रामक आरोप लगाए थे। आरोपों के अनुसार, खेड़ा ने दावा किया था कि रिंकी भुइयां सरमा के पास एक से अधिक पासपोर्ट हैं और विदेशों में अघोषित संपत्तियां हैं। इन दावों के बाद रिंकी भुइयां सरमा ने गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया था।


अदालत में हुई तीखी बहस

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से जोरदार दलीलें दी गईं। खेड़ा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि उन पर लगाए गए आरोप ट्रायल (मुकदमे) का विषय हैं और इसके लिए उन्हें गिरफ्तार कर अपमानित करना जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन धाराओं में मामला दर्ज है, उनमें से कुछ जमानती हैं और कुछ में गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं है। खेड़ा ने यह भी कहा कि अगर उन्हें अग्रिम जमानत नहीं मिलती है, तो गिरफ्तारी-पूर्व जमानत का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा।

असम सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि खेड़ा ने मुख्यमंत्री की पत्नी के फर्जी और 'डॉक्टर्ड' (छेड़छाड़ किए गए) पासपोर्ट की प्रतियां दिखाई थीं। उन्होंने खेड़ा को फरार बताते हुए कहा कि वे वीडियो जारी कर रहे हैं और दोहरी नागरिकता के उनके सभी आरोप पूरी तरह झूठे हैं।

हाईकोर्ट के फैसले को दी थी चुनौती

पवन खेड़ा ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के 24 अप्रैल के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। इससे पहले तेलंगाना हाईकोर्ट ने उन्हें सात दिनों की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, लेकिन असम पुलिस ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। तब शीर्ष अदालत ने ट्रांजिट बेल पर रोक लगाते हुए खेड़ा को गौहाटी हाईकोर्ट जाने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब पवन खेड़ा की गिरफ्तारी की तलवार फिलहाल टल गई है। अदालत ने माना कि मामले की जांच के लिए खेड़ा की हिरासत जरूरी नहीं है, हालांकि उन्हें ट्रायल की प्रक्रिया में सहयोग करना होगा।

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