PM Modi Foreign Tour: पीएम मोदी करेंगे UAE समेत 4 यूरोपीय देशों का दौरा, ऊर्जा और टेक्नोलॉजी पर रहेगा जोर
PM Modi Foreign Tour: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अपनी पांच देशों की यात्रा की शुरुआत संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से की। इसके बाद वह यूरोप के देशों - नीदरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और इटली का दौरा करेंगे। यह यात्रा ईरान युद्ध के कारण बढ़ती ऊर्जा और सप्लाई चेन की चिंताओं के बीच हो रही है।
PM Modi Foreign Tour: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अपनी पांच देशों की यात्रा की शुरुआत संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से की। इसके बाद वह यूरोप के देशों - नीदरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और इटली का दौरा करेंगे। यह यात्रा ईरान युद्ध के कारण बढ़ती ऊर्जा और सप्लाई चेन की चिंताओं के बीच हो रही है।
खाड़ी क्षेत्र के समुद्री रास्तों और होर्मुज स्ट्रेट में हो रही रुकावटों की वजह से तेल और गैस बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है, जिससे भारत सहित ऊर्जा आयात करने वाली अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है।
हालांकि, यह दौरा भारत की उस बड़ी रणनीति का भी हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत देश अपने आर्थिक और रणनीतिक साझेदारों को मजबूत और विविध बनाना चाहता है। साथ ही भारत खुद को मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।
यूएई (संयुक्त अरब अमीरात)
प्रधानमंत्री मोदी 15 मई को UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करने के लिए UAE की यात्रा पर जाएंगे।
प्रधानमंत्री मोदी 2014 से अब तक सात बार UAE की यात्रा कर चुके हैं और शेख मोहम्मद पांच बार भारत की यात्रा कर चुके हैं। उनकी पिछली यात्रा जनवरी में हुई थी, जिसमें UAE के भावी नेता भी उनके साथ थे। यह द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती को दर्शाता है, जो पीढ़ियों से और भी मजबूत होते गए हैं।
मौजूदा उथल-पुथल के बावजूद, UAE भारत के सबसे भरोसेमंद ऊर्जा साझेदारों में से एक रहा है और आगे भी रहेगा। दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों के चलते भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली है। ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा देना इस यात्रा का एक प्रमुख एजेंडा होगा।
सूत्रों के अनुसार, इस यात्रा के दौरान LPG और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves) के क्षेत्र में दो अहम समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।
भारत और UAE के बीच व्यापार लगातार मजबूत हो रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार पहली बार 100 अरब अमेरिकी डॉलर के पार पहुंच गया और यह 101.25 अरब डॉलर तक पहुंचा। जनवरी 2026 में यूएई के नेता की यात्रा के दौरान, दोनों पक्षों ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 200 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का संकल्प लिया था।
UAI भारत का 7वां सबसे बड़ा निवेशक है, जिसका कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 25.19 अरब अमेरिकी डॉलर है। भारत और यूएई के बीच लोकल करेंसी सेटलमेंट (LCS) सिस्टम भी लागू है, जिसके तहत दोनों देश भारतीय रुपये (INR) और यूएई दिरहम (AED) में व्यापार और पैसे का लेनदेन कर सकते हैं। इससे डॉलर पर निर्भरता कम होती है और लेनदेन की लागत भी घटती है।
संयुक्त अरब अमीरात में रहने वाले प्रवासियों में भारतीयों का सबसे बड़ा समूह है। वे संयुक्त अरब अमीरात की अर्थव्यवस्था और समाज की रीढ़ हैं। उनका कल्याण दोनों देशों के लिए अहम है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली चुनौतियों के बावजूद, प्रवासी भारतीय भारत को लगातार धन भेजते रहते हैं, जिसका विदेशी मुद्रा भंडार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
नीदरलैंड्स
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नीदरलैंड दौरा 2017 के बाद दूसरा दौरा होगा। यह यात्रा भारत और यूरोपीय संघ (India-EU FTA) के बीच मुक्त व्यापार समझौते के बाद के माहौल में हो रही है।
आज नीदरलैंड भारत को सिर्फ एक बड़े बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक बड़ी वैश्विक ताकत के तौर पर देखता है। नीदरलैंड की आधुनिक तकनीक और भारत की बड़े स्तर पर काम करने की क्षमता मिलकर “Innovation meets Scale” यानी “नवाचार और बड़े स्तर की ताकत” जैसी साझेदारी बना रही है। यह सहयोग खास तौर पर सेमीकंडक्टर, जल प्रबंधन, ग्रीन हाइड्रोजन और समुद्री तकनीक जैसे क्षेत्रों में तेजी से दिखाई दे रहा है।
नीदरलैंड्स, भारत का दुनिया में 11वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। यह भारत के लिए तीसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य और यूरोप में सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार भी है। FY24-25 में दोनों देशों के बीच व्यापार 27.8 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था। यह भारत का चौथा सबसे बड़ा निवेशक भी है, जिसका कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 55.6 अरब अमेरिकी डॉलर है, और नीदरलैंड्स के साथ भारतीय विदेशी विदेशी निवेश (DOD) 28 अरब अमेरिकी डॉलर है, जिसमें भारत और नीदरलैंड्स में 300 से अधिक कंपनियां मौजूद हैं। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से इस साझेदारी को और मजबूती मिलेगी।
इस दौरे के दौरान Tata Electronics और ASML के बीच गुजरात के धोलेरा में बनने वाले सेमीकंडक्टर प्लांट के लिए एक अहम समझौता किया जाएगा।
नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री, भारत-नीदरलैंड सहयोग के तहत अफ्सलाउटडाइक डैम (Afsluitdijk Dam) का दौरा करेंगे। यह सहयोग स्वच्छ ऊर्जा, जल प्रबंधन और सतत मत्स्य पालन (Sustainable Fisheries) जैसे क्षेत्रों में किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाना है।
दोनों पक्ष प्रवासन और आवागमन को सुगम बनाने के लिए काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री का संबोधन 90,000 से अधिक भारतीय मूल के प्रवासियों और 200,000 से अधिक सूरीनामी हिंदुस्तानियों तक पहुंचेगा, जो मुख्य भूमि यूरोप में भारतीय मूल का सबसे बड़ा समुदाय है। इसके अलावा, नीदरलैंड से भारत आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ाने की भी काफी संभावनाएं हैं।
स्वीडन
प्रधानमंत्री की स्वीडन यात्रा 8 सालों के बाद हो रही है। उन्होंने पिछली बार अप्रैल 2018 में पहले भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के लिए स्वीडन का दौरा किया था।
स्वीडन रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 3% से अधिक निवेश करता है और यूरोपीय इनोवेटिव स्कोरबोर्ड में लगातार शीर्ष प्रदर्शन करने वाले देशों में शुमार है। स्वीडन ने चीन पर रणनीतिक निर्भरता कम करने के लिए यूरोप में सबसे सख्त कदम उठाए हैं। उसने अपने टेलीकॉम नेटवर्क से चीनी कंपनियों को हटाया है और रिसर्च सुरक्षा के नियम भी कड़े किए हैं। ऐसे में एशिया में भारत, स्वीडन के लिए एक अहम रणनीतिक साझेदार बनकर उभरा है। आज स्वीडन भारत को केवल एक बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रमुख शक्ति के रूप में देखता है।
वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार 2025 में 7.75 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं, 280 से ज्यादा स्वीडिश कंपनियां भारत में काम कर रही हैं। इस यात्रा का मुख्य आकर्षण बिजनेस इवेंट होगा, जिसमें यूरोपियन राउंड टेबल ऑफ इंडस्ट्रीज (European Round Table of Industries) के साथ बातचीत की जाएगी। माना जा रहा है कि India-EU FTA के बाद इससे यूरोप के बड़े औद्योगिक सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं।
स्वीडन के बाहर, साब कंपनी झज्जर में अपना पहला Carl-Gustaf मैन्युफैक्चरिंग यूनिट बना रही है, जो भारत की पहली 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) से संचालित रक्षा विनिर्माण परियोजना है। वहीं, यूरोप के सबसे बड़े महत्वपूर्ण खनिज भंडारों में से एक स्वीडन में स्थित होने के कारण, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), सेमीकंडक्टर और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को मजबूत बनाने के लिए भारत और स्वीडन के बीच सहयोग तेजी से बढ़ रहा है।
Sweden-India Technology and AI Corridor (SITAC) के लिए एक आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसमें 6G, AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, जीवन विज्ञान और डिजिटल इंडिया की प्राथमिकताएं शामिल हैं। AI Impact Summit 2026 में 80 से अधिक स्वीडिश कंपनियों ने भाग लिया था। वहीं, भारत और स्वीडन द्वारा संयुक्त रूप से शुरू किए गए LeadIT 3.0 में अब 18 देशों के 50 सदस्य हैं। मार्च 2025 के महाराष्ट्र-कंडेला समझौता ज्ञापन के तहत स्वीडन से इलेक्ट्रिक नावों में 1,990 करोड़ रुपये का निवेश आएगा।
नॉर्वे
यह 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे की पहली स्वतंत्र द्विपक्षीय यात्रा होगी। इस दौरे के दौरान ओस्लो में तीसरा इंडिया-नॉर्डिक समिट आयोजित होगा। इससे पहले यह समिट 2018 में स्टॉकहोम और 2022 में कोपेनहेगन में हुई थी। इस समिट के जरिए भारत को नॉर्डिक देशों के साथ उसी स्तर की अहमियत मिल रही है, जैसी अमेरिका को मिलती है।
नॉर्वे और व्यापक नॉर्डिक क्षेत्र भारत को एक प्रमुख शक्ति के रूप में तेजी से शामिल कर रहे हैं, जहां भारतीय क्षमता नॉर्डिक देशों की विशेषज्ञता से मेल खाती है। यह यात्रा दोनों पक्षों के बीच इस रणनीतिक सहयोग को सबसे ऊंचे स्तर पर मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
इटली
इटली की यह यात्रा सक्रिय रणनीतिक साझेदारी की पुष्टि करती है। प्रधानमंत्री मोदी 19 से 21 मई तक प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर इटली की यात्रा करेंगे। यह यात्रा नेतृत्व स्तर पर गहन विचार-विमर्श के बाद हो रही है और संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-29 पर आधारित है, जो साझेदारी के लिए परिचालन रोडमैप का काम करती है।
इटली भारत को न केवल एक बाजार के रूप में, बल्कि एक प्रमुख शक्ति और यूरोप के लिए एक जरूरी साझेदार के रूप में देखता है। इटली, IMEEC (India-Middle East-Europe Economic Corridor) परियोजना का संस्थापक सदस्य है। Sparkle-Airtel Blue-Raman समुद्री केबल अब जेनोआ तक सक्रिय हो चुकी है, जिससे इटली इस कॉरिडोर का पश्चिमी केंद्र बन गया है। IMEEC परियोजना न केवल सप्लाई चेन को मजबूत और स्थिर बनाएगी, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती देने में अहम भूमिका निभाएगी।
यूरोपीय संघ में इटली भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसके साथ द्विपक्षीय व्यापार 2025 में 16.77 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का लक्ष्य है और 2029 तक इसे 20 अरब यूरो तक पहुंचाने का लक्ष्य है। टाटा मोटर्स द्वारा 3.8 अरब यूरो में इवेको समूह का अधिग्रहण इटली में अब तक का सबसे बड़ा भारतीय निवेश है, वहीं इटली ने दिल्ली में 500 मिलियन यूरो की फंडिंग के साथ SIMEST का कार्यालय खोला है और SACE ने लघु एवं मध्यम उद्यमों (SMEs) के लिए 200 मिलियन यूरो की फंडिंग जोड़ी है। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के बाद का माहौल दोनों पक्षों के लिए नए आयाम खोलता है।