Rare-earth metals : चीन ने शुक्रवार को कहा कि वह देश से सिविलियन इस्तेमाल के लिए रेयर-अर्थ मेटल्स के एक्सपोर्ट की इजाज़त देगा। चीन ने यह ऐलान ऐसे समय किया है जब भारत लगातार चीन से कीमती धातुओं के एक्सपोर्ट पर लगी पाबंदियों को हटाने की मांग कर रहा है। इन धातुओं का इस्तेमाल कई आधुनिक प्रोडक्ट्स बनाने में होता है। PTI ने चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन (Guo Jiakun) के हवाले से कहा कि कानूनों और नियमों के अनुसार रेयर अर्थ से जुड़ी चीज़ों पर चीन का एक्सपोर्ट कंट्रोल किसी खास देश को टारगेट नहीं करता है। जियाकुन भारत की उन मांगों पर जवाब दे रहे थे जिसमें रेयर अर्थ की सप्लाई फिर से शुरू करने की बात कही गई थी, जिस पर बीजिंग का लगभग एकाधिकार है।
डिफेंस प्रोडक्ट बनाने के लिए मेटल्स का एक्सपोर्ट न करने के चीन के रुख पर ज़ोर देते हुए जियाकुन ने कहा, "जब तक इन मेटल्स का एक्सपोर्ट सिविलियन इस्तेमाल के लिए होता है और नियमों का पालन किया जाता है,चीनी सरकार इनके लिए समय पर किए गए आवेदन को मंज़ूरी दे देगी।" उन्होंने आगे कहा, "चीन ग्लोबल इंडस्ट्रियल और सप्लाई चेन को स्थिर रखने के लिए संबंधित देशों और क्षेत्रों के साथ बातचीत और सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है।" हालांकि, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि ये परमिट नागरिक इस्तेमाल के लिए होंगे। चीन से खरीदें गए इन मेटल्स का इस्तेमाल रक्षा उपकरण बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
गुओ जियाकुन ने कहा, "हम इस बात पर ज़ोर देना चाहेंगे कि मीडियम और हेवी रेयर अर्थ और संबंधित चीज़ों के डुअल-यूज़ नेचर को देखते हुए, इन चीज़ों पर एक्सपोर्ट कंट्रोल करना इंटरनेशनल प्रैक्टिस के मुताबिक है और यह दुनिया में शांति और क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने और इंटरनेशनल नॉन-प्रोलिफरेशन कोशिशों में एक्टिव रूप से हिस्सा लेने के चीन के लगातार रुख की पुष्टि करता है।"
चीन ने गुरुवार को रेयर-अर्थ मेटल्स के एक्सपोर्ट फिर से शुरू होने की पुष्टि की और इस साल की शुरुआत में लगाए गए प्रतिबंधों को हटा दिया। वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ही याडोंग ने मीडिया को बताया कि उनके मंत्रालय को कुछ चीनी एक्सपोर्टर्स से रेयर अर्थ से जुड़ी चीज़ों के लिए जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस के लिए आवेदन मिले हैं और उन्हें मंज़ूरी दे दी गई है, जिससे इस बाक की पुष्टि होती है कि चीन ने रेयर-अर्थ मेटल्स का एक्सपोर्ट फिर से शुरू कर दिया है।
बता दें कि चीन दुनिया भर में रेयर अर्थ माइनिंग में लगभग 70 प्रतिशत और उनकी प्रोसेसिंग में लगभग 90 प्रतिशत हिस्सेदार रखता है। यह इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, विंड एनर्जी और रक्षा उपकरणों के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले इन खनिजों का दुनिया का सबसे बड़ा सप्लायर है। अमेरिका, EU और भारत चीन के रेयर अर्थ मेटल्स के सबसे बड़े इंपोर्टर हैं। अमेरिका के साथ टैरिफ वॉर के बीच, चीन ने रेयर अर्थ पर एक्सपोर्ट कंट्रोल लगा दिया था, जिससे इन कीमती धातुओं की सप्लाई बाधित हो गई थी।