RBI MPC Meeting Highlights: गवर्नर संजय मल्होत्रा ने जानकारी दी कि पिछले साल की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 7.6% रहने का अनुमान है। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी बाधा के कारण इस साल की विकास दर प्रभावित हो सकती है
RBI Monetary Policy Committee Highlights: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नए वित्त वर्ष की अपनी पहली मौद्रिक नीति में ब्याज दरों को यथास्थिति पर रखने का निर्णय लिया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल और रुपये की कमजोरी
RBI Monetary Policy Committee Highlights: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नए वित्त वर्ष की अपनी पहली मौद्रिक नीति में ब्याज दरों को यथास्थिति पर रखने का निर्णय लिया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल और रुपये की कमजोरी को देखते हुए, केंद्रीय बैंक ने फिलहाल दरों में कोई बदलाव न करना ही उचित समझा है। दिसंबर 2025 में हुई आखिरी कटौती के बाद से आरबीआई लगातार सतर्क रुख अपनाए हुए है, ताकि पिछले नीतिगत बदलावों का असर अर्थव्यवस्था पर पूरी तरह से दिख सके।
पॉलिसी के रुख की बात करें, तो एमपीसी ने अपना 'न्यूट्रल' स्टांस बरकरार रखा है। गवर्नर मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि यद्यपि घरेलू महंगाई वर्तमान में नियंत्रण में है, लेकिन वैश्विक स्तर पर आपूर्ति बाधाओं और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भविष्य के लिए जोखिम बढ़ा दिए हैं। 'न्यूट्रल' रुख बनाए रखकर आरबीआई ने संकेत दिया है कि वह आने वाले समय में आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक हालातों के आधार पर लचीला बना रहेगा। बैंक का प्राथमिक लक्ष्य महंगाई को टिकाऊ तरीके से 4% के लक्ष्य के करीब लाना और साथ ही देश की आर्थिक विकास दर को मजबूती देना है।
वैश्विक जोखिमों के बीच RBI की 'वेट एंड वॉच' की रणनीति
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान ने महंगाई और विकास दर के लिए नए जोखिम पैदा कर दिए हैं। वर्तमान में अर्थव्यवस्था 'सप्लाई शॉक' का सामना कर रही है, जिसे देखते हुए समिति ने बदलती परिस्थितियों और भविष्य के आंकड़ों की प्रतीक्षा करना ही समझदारी माना है। हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और किसी भी झटके को सहने में सक्षम है। इन्हीं वैश्विक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला किया गया है। साथ ही, 'न्यूट्रल' स्टांस बरकरार रखा गया है, ताकि आने वाली सूचनाओं के आधार पर बैंक भविष्य में जरूरत पड़ने पर तुरंत और सटीक कदम उठाने के लिए स्वतंत्र रहे।
FDI में 20% का जोरदार उछाल
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने जानकारी दी कि भारत के प्रति विदेशी निवेशकों का उत्साह बना हुआ है और नेट FDI में लगभग 20% की शानदार बढ़त दर्ज की गई है। हालांकि, विदेशी व्यापार के मोर्चे पर चुनौतियां बनी हुई हैं। इस साल के शुरुआती दो महीनों में भारत का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट सालाना आधार पर 0.2% घटा है। गवर्नर ने चेतावनी दी कि टैरिफ संबंधी अनिश्चितताओं के कारण 2025 की तुलना में 2026 में वैश्विक व्यापार की रफ्तार धीमी रह सकती है। रुपये की स्थिति पर उन्होंने स्पष्ट किया कि आरबीआई विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप केवल अस्थिरता को रोकने के लिए करता है, उसका उद्देश्य किसी विशेष स्तर या कीमत को लक्षित करना नहीं है।
पिछले एक साल का सफर (2025-2026)
राहत का दौर: फरवरी से जून 2025 के बीच दरों में 100 bps की कटौती की गई।
स्थिरता: अगस्त-अक्टूबर 2025 और फरवरी 2026 में दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
अंतिम कटौती: दिसंबर 2025 में 25 bps की छोटी कटौती की गई थी।