RBI Policy : रुपये पर दबाव के बावजूद RBI की जून में होने वाली पॉलिसी मीट से पहले ब्याज दरों में बढ़त की योजना नहीं: रिपोर्ट

CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक RBI के भीतर मौजूदा माहौल से ऐसा कोई संकेत नहीं मिलता कि वह करेंसी की अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों को एक साधन के तौर पर इस्तेमाल करने का इच्छुक है। सूत्रों के मुताबिक आरबीआई अपने लचीले मंहगाई को नियंत्रण में रखने रुख पर कायम है

अपडेटेड May 22, 2026 पर 10:48 AM
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RBI Policy : यह खबर गुरुवार को ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट आने के एक दिन बाद सामने आई है जिसमें कहा गया था कि भारतीय रिज़र्व बैंक रुपये को स्थिर करने के लिए अपने सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार कर रहा है

RBI Policy : शुक्रवार को आई एक खबर के मुताबिक,कच्चे तेल की कीमतों को लेकर बढ़ती चिंताओं और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच रुपये पर पड़ रहे दबाव के बावजूद भारतीय रिज़र्व बैंक ब्याज दरों में 'ऑफ-साइकिल' (तय समय से अलग हटकर) बढ़ोतरी पर विचार नहीं कर रहा है। CNBC-TV18 को सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक RBI अभी करेंसी को बचाने के लिए ब्याज दरों को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने के मूड में नहीं दिख रहा है और वह अपने फ्लेक्सिबल इन्फ्लेशन-टारगेटिंग फ्रेमवर्क के तहत महंगाई और ग्रोथ के बीच संतुलन बनाने पर ही फोकस कर रहा है।

CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक RBI के भीतर मौजूदा माहौल से ऐसा कोई संकेत नहीं मिलता कि वह करेंसी की अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों को एक साधन के तौर पर इस्तेमाल करने का इच्छुक है। सूत्रों के मुताबिक आरबीआई अपने लचीले मंहगाई को नियंत्रण में रखने रुख पर कायम है। इसके तहत मॉनेटरी पॉलिसी तय करते समय महंगाई और आर्थिक विकास,दोनों को ध्यान में रखा जाता है।

रिटेल महंगाई RBI की तय सीमा के अंदर


सूत्रों का कहना है कि रिटेल महंगाई RBI की तय सीमा के अंदर ही बनी हुई है। अप्रैल में रिटेल महंगाई दर 3.48 प्रतिशत रही। उन्होंने आगे कहा कि वित्त वर्ष 2027 के लिए RBI का महंगाई का अनुमान 4.6 प्रतिशत है जो कि तय सीमा के दायरे में ही आता है।

6.7 प्रतिशत पर बनी रह सकती है ग्रोथ रेट

सूत्रों ने आगे बताया कि अनुकूल बेस इफेक्ट वित्त वर्ष 2028 में रिटेल महंगाई को और भी कम रख सकता हैं। उन्होंने RBI की मॉनीटरी पॉलिसी रिपोर्ट का भी हवाला दिया,जिसमें अनुमान लगाया गया है कि अगर वित्त वर्ष 2027 में कच्चे तेल की औसत कीमतें बढ़कर 95 डॉलर प्रति बैरल भी हो जाती हैं तो भी रिटेल महंगाई का औसत लगभग 5 प्रतिशत रहने की संभावना है,जबकि आर्थिक विकास दर 6.7 प्रतिशत पर बनी रह सकती है।

सूत्रों ने 18 मई को IMF के एक कार्यक्रम में दिए गए RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​के बयान का भी ज़िक्र किया,जिसमें उन्होंने कहा था कि आरबीआई अपनी नीति बनाते समय,सप्लाई साइड के अस्थायी झटकों के पहले दौर के असर को नजरअंदाज़ करेगा।

बता दें कि यह खबर गुरुवार को ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट आने के एक दिन बाद सामने आई है जिसमें कहा गया था कि भारतीय रिज़र्व बैंक रुपये को स्थिर करने के लिए अपने सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार कर रहा है,जिनमें ब्याज दरों में बढ़ोतरी,अधिक करेंसी स्वैप और विदेशी निवेशकों से डॉलर जुटाना शामिल है।

गौरतलब है कि RBI की अगली पॉलिसी का एलान 5 जून को होना है। यह भी बता दें कि केंद्रीय बैंक ने इससे पहले मई 2022 में एक 'ऑफ-साइकिल' (तय समय से अलग हटकर) नीतिगत कदम उठाया था।

 

 

RBI Policy : RBI रुपये को स्थिर करने के लिए कई उपायों पर कर रहा विचार, ब्याज दरों में भी हो सकती है बढ़ोतरी

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