RBI Policy : भारतीय रिज़र्व बैंक रुपये को स्थिर करने के लिए अपने सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार कर रहा है,जिनमें ब्याज दरों में बढ़ोतरी,अधिक करेंसी स्वैप और विदेशों में निवेशकों से डॉलर जुटाना शामिल है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक गवर्नर संजय मल्होत्रा सहित RBI के शीर्ष अधिकारियों इस हफ्ते रुपये के गिरकर डॉलर के मुकाबले लगभग 97 के नए निचले स्तर पर पहुंचने के बाद,आगे उठाए जा सकने वाले संभावित कदमों पर चर्चा करने के लिए कई बैठकें की हैं।
सूत्रों का कहना है कि उपलब्ध विकल्पों में से एक विकल्प ब्याज दरें बढ़ाना भी है। मौद्रिक नीति पर अगला फैसला 5 जून को होना है,हालांकि RBI ने इससे पहले मई 2022 में भी तय समय से अलग हटकर (out-of-cycle) बदलाव किया था।
इसके अलावा दूसरे विकल्पो में अनिवासी भारतीयों के लिए एक डिपॉजिट योजना के ज़रिए विदेशों से डॉलर जुटाना और सॉवरेन डॉलर बॉन्ड बेचना शामिल है। इन दूसरे उपायों पर फैसला सरकार करेगी।
अभी जिन उपायों पर विचार किया जा रहा है वे कुछ हद तक 2013 के'टेपर टैंट्रम'(taper tantrum) दौर में उठाए गए कदमों जैसे ही हैं। उस समय भारत ने विदेशी मुद्रा के निवेश को बढ़ाने के लिए स्थानीय बैंकों के ज़रिए अनिवासी भारतीयों के लिए एक जमा योजना शुरू की थी। एक सूत्र मुताबिक RBI का अनुमान है कि इस बार ये जमा योजनाएं लगभग 50 अरब डॉलर तक की राशि जुटा सकती हैं,जबकि पिछली बार यह आंकड़ा लगभग 30 अरब डॉलर रहा था।
RBI की योजना के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक पॉलिसी मेकर्स के बीच यह सोच बढ़ रही है कि रुपया उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से गिर रहा है। उन्होंने बताया कि पॉलिसी मेकर्स का मानना है कि भारत के इकोनॉमिक फंडामेंटल्स मज़बूत हैं और बैंकिंग सिस्टम भी सुदृढ़ है,लेकिन यह मजबूती विनिमय दर में दिखाई नहीं दे रही है।
RBI ने अभी तक इस बारे में और जानकारी मांगने वाले ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया।
मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया कि आरबीआई की अब सबसे पहली प्राथमिकता करेंसी के अवमूल्यन को रोकना है और ऐसा करने के लिए RBI हर जरूरी कदम उठाने को तैयार है।
कर्ज लेने की लागत बढ़ाने से विदेशी बॉन्ड निवेश को मिलेगा बढ़ावा
बताते चलें कि कर्ज लेने की लागत बढ़ाने से विदेशी बॉन्ड निवेश को बढ़ावा मिलेगा,क्योंकि इससे अमेरिका और भारत के बीच ब्याज दर का अंतर बढ़ जाएगा जो एक दशक से भी ज्यादा समय के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। इस साल निवेशकों ने भारतीय एसेट्स को बड़े पैमाने पर बेचा है। 2026 में अब तक इक्विटी मार्केट से विदेशी फंड की जो निकासी हुई,वह पिछले साल के रिकॉर्ड 19 अरब डॉलर के आंकड़े को भी पार कर गई है।
RBI की छह-सदस्यीय MPC की बैठक 3-5 जून को होनी है। MPC ने इस साल अपनी बेंचमार्क दर को 5.25% पर बरकरार रखा है,हालांकि ज़्यादातर अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ने के साथ ही इस दर में बढ़ोतरी की जाएगी।
बुधवार को RBI ने बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी डालने और साथ ही कम समय के लिए RBI के डॉलर रिज़र्व को बढ़ाने के लिए 5 बिलियन डॉलर की स्वैप नीलामी की घोषणा की है। सूत्रों में बताया है कि ऐसी और भी स्वैप नीलामियां हो सकती हैं।