Gyan Bharatam Mission: भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को सहेजने की दिशा में केंद्र सरकार के ज्ञान भारतम मिशन को एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। देशभर में चलाए गए राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के दौरान 1.19 करोड़ से भी अधिक पांडुलिपियों (Manuscripts) के रिकॉर्ड दर्ज किए गए हैं। संस्कृति और पर्यटन केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए इस स्कीम से जुड़ी अहम जानकारियां शेयर की हैं। आपको बता दें कि संस्कृति मंत्रालय की यह पहल भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, पांडुलिपियों के संरक्षण, इनके डिजिटलाइजेशन और ग्लोबल रिसर्च कम्युनिटी के लिए इसे उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
क्या है ज्ञान भारतम मिशन और बजट 2025-26 में क्यों हुई थी घोषणा?
ज्ञान भारतम मिशन (GBM) भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय का एक विशेष कार्यक्रम है। इसका ऐलान केंद्रीय बजट 2025-26 के दौरान पांडुलिपियों से जुड़ी गतिविधियों को गति देने के लिए की गई थी। इस पैन-इंडिया पहल का मुख्य उद्देश्य किसी भी लिपि, भाषा, ज्ञान परंपरा, क्षेत्र या समुदाय की संरक्षक परंपराओं से परे हटकर संपूर्ण भारत की पांडुलिपि विरासत का संरक्षण करना है। पांडुलिपियों के सर्वेक्षण, कैटलॉगिंग, डिजिटलाइजेशन और प्रिजर्वेशन को फाइनेंशियल और एडमिनिस्ट्रेटिव मजबूती देने के लिए स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी ने साल 2025 से 2031 के लिए 491।66 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट मंजूर किया है। इसी फंड का इस्तेमाल देश की बहुमूल्य प्राचीन धरोहरों को नष्ट होने से बचाने और आधुनिक तकनीक से जोड़ने में किया जा रहा है।
क्या हैं ज्ञान भारतम मिशन के मुख्य उद्देश्य?
ज्ञान भारतम मिशन के तहत कई लक्ष्य तय किए गए हैं। इसमें मॉडर्न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके पांडुलिपियों के डिजिटलाइजेशन और उनके डॉक्युमेंटशन की स्पीड को बढ़ाना है। देशभर में मौजूद पांडुलिपियों का सर्वे करने के साथ इसमें उनका ऑफिशियल रजिस्ट्रेशन भी कराया जा रहा है। भारतीय पांडुलिपियों की सटीक कैटलॉगिंग करने से लेकर उन्हें अप टू डेट बनाने का टास्क भी है। पांडुलिपियों सभी तक पहुंचें और ये किताब के साथ-साथ मशीन रीडेबल यानी डिजिटल फॉर्मेट में भी उपलब्ध हैं, ये भी इस मिशन का एक बड़ा लक्ष्य है।
पांडुलिपियों को बचाने के लिए ट्रेनिंग, जागरूकता अभियानों और फाइनेंशियल मदद देने की तैयारी है। इसके अलावा भारतीय भाषाओं और पांडुलिपिविज्ञान की स्डडी, स्कॉलपशिप और रिसर्च को बढ़ावा देने की भी तैयारी की गई है। सरकार का लक्ष्य है कि पांडुलिपियों की एक विशाल नेशनल डिजिटल रिपॉजिटरी भी तैयार की जाए।
मार्च 2026 में शुरू हुआ राष्ट्रीय सर्वेक्षण: 1.19 करोड़ से ज्यादा पांडुलिपियां रिपोर्ट की गईं
पांडुलिपियों के धारकों, संग्रहकर्ताओं और अलग अलग भाषाओं व लिपियों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्थाओं की पहचान करने के लिए मार्च 2026 में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण शुरू किया गया था। इस सर्वे के दौरान देशभर से 1.19 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों की मौजूदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई है। अभी देशभर में 8 लाख से अधिक डिजिटल पांडुलिपियां उपलब्ध हैं। इनमें से 4.40 लाख से अधिक पांडुलिपियों को ज्ञान भारतम पोर्टल पर आम जनता के देखने के लिए उपलब्ध करा दिया गया है, जिन्हें राज्यवार आसानी से एक्सेस किया जा सकता है।
क्लस्टर सेंटर्स और राज्यों के साथ संस्थागत ढांचा
मिशन को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक मजबूत संस्थागत तंत्र स्थापित किया गया है। इसके तहत क्लस्टर सेंटर्स और इंडिपेंडेंट सेंटर्स बनाए गए हैं। इनमें यूनिवर्सिटी, रिसर्च इंस्टिट्यूट, पुस्तकालय, अभिलेखागार, निजी संरक्षक, धार्मिक संस्थान और दूसरे स्टेकहोल्डर्स शामिल हैं। इसके अलावा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने-अपने क्षेत्रों में ज्ञान भारतम के कार्यान्वयन के लिए नोडल कोआर्डिनेटिंग अथॉरिटी के रूप में जोड़ा गया है। उदाहरण के तौर पर, बिहार की कई प्रमुख संस्थाएं इस मिशन से जुड़ चुकी हैं, जिनमें नवा नालंदा महाविहार (नालंदा), खुदा बख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी (पटना) और श्री बोधगया मठ (बोधगया) शामिल हैं।
कॉपीराइट और सुरक्षा का रखा जा रहा पूरा ध्यान
डिजिटल पांडुलिपियों तक एक्सेस देते समय इनके कस्टोडियनों और अधिकार धारकों के अधिकारों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। जिन पांडुलिपियों पर कोई कानूनी या तकनीकी रोक नहीं है उन्हें राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी के माध्यम से सार्वजनिक और विद्वानों के शोध के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं संवेदनशील, प्रतिबंधित या अधिकार-संरक्षित पांडुलिपियों तक पहुंच के लिए उचित शर्तें और नियम लागू किए जाएंगे।