US टैरिफ रोलबैक से भारतीय निर्यातकों को रिफंड की उम्मीद कम, समझिए क्या है इसके पीछे का 'पेच'

US Tariff Rollback: व्हाइट हाउस के आदेश के अनुसार, रूसी तेल खरीदने के कारण लगाए गए 25% के एक्स्ट्रा टैरिफ से भारत को 7 फरवरी से राहत मिल गई है। हालांकि, आदेश में यह तो कहा गया है कि रिफंड स्टैन्डर्ड प्रक्रियाओं के तहत होगा, लेकिन पात्रता मानदंड या समय सीमा को लेकर चुप्पी साधी गई है

अपडेटेड Feb 11, 2026 पर 4:04 PM
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सबकी नजर इस बात पर है कि जो पैसा पहले ही टैक्स के रूप में दिया जा चुका है, उसकी वापसी की राह बहुत मुश्किल है

US Tariff Rollback: पिछले दिनों भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील हुई। इस डील के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगाए गए दंडात्मक 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ को वापस ले किया। इस फैसले से भारतीय निर्यातकों के चेहरे पर मुस्कान तो आई है, लेकिन अब सबकी नजर इस बात पर है कि इससे पहले के हुए एक्सपोर्ट में जो एक्स्ट्रा टैरिफ दिया जा चुका है उसका 'रिफंड' मिलेगा या नहीं? इसे लेकर अभी भी काले बादल छाए हुए है। जानकारों का मानना है कि इस कटौती का लाभ भविष्य के सौदों पर तो मिलेगा, लेकिन जो पैसा पहले ही टैक्स के रूप में दिया जा चुका है, उसकी वापसी की राह बहुत मुश्किल और धुंधली है।

रिफंड की चाबी अमेरिकी आयातकों के हाथ

इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ा तकनीकी पेंच यह है कि अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (CBP) विभाग ड्यूटी का भुगतान 'इंपोर्टर ऑफ रिकॉर्ड' यानी अमेरिकी आयातक से लेता है। ऐसे में अगर रिफंड की अनुमति मिलती भी है, तो वह सीधे भारतीय निर्यातक को नहीं बल्कि अमेरिकी खरीदार को मिलेगा। अब यह पूरी तरह उस खरीदार पर निर्भर करेगा कि वह उस पैसे को भारतीय निर्यातक को पास ऑन करता है या नहीं। अभी तक इस प्रक्रिया को लेकर अमेरिकी अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट गाइडलाइन जारी नहीं की गई है।


एंटी-डंपिंग जैसा नहीं है यह मामला

आमतौर पर 'एंटी-डंपिंग' जैसे मामलों में जब अंतिम ड्यूटी हटती है, तो रिफंड की प्रक्रिया काफी हद तक तय होती है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला 'रेसिप्रोकल' या प्रतिशोधात्मक टैरिफ का है, जो एक कार्यकारी आदेश के जरिए लगाया गया था। अमेरिका में ऐसा कोई पिछला उदाहरण नहीं है जहां कार्यकारी आदेश के जरिए हटाए गए टैरिफ का रिफंड स्वतः मिल गया हो। इसके लिए कंपनियों को अदालती आदेशों या जटिल प्रशासनिक दावों का सहारा लेना पड़ सकता है, जो काफी समय लेने वाली प्रक्रिया है।

7 फरवरी से मिली राहत, लेकिन चुनौतियां अभी भी बरकरार

व्हाइट हाउस के आदेश के अनुसार, रूसी तेल खरीदने के कारण लगाए गए इस एक्स्ट्रा टैरिफ से भारत को 7 फरवरी से राहत मिल गई है। हालांकि, आदेश में यह तो कहा गया है कि रिफंड स्टैन्डर्ड प्रक्रियाओं के तहत होगा, लेकिन पात्रता मानदंड या समय सीमा को लेकर चुप्पी साधी गई है। अगस्त में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए इस अतिरिक्त बोझ की वजह से कई भारतीय सामानों पर प्रभावी ड्यूटी 50 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, जो अब नए व्यापार ढांचे के तहत घटकर 18 प्रतिशत पर या गई है।

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