Cyber Fraud: साइबर धोखाधड़ी का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ताजा मामला वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. उषा गोस्वामी के ‘डिजिटल अरेस्ट’ का है। इस फ्रॉड में उन्होंने अपने जीवन भर की कमाई खो दी। जानकारी के मुताबिक, जालसाजों ने उन्हें डिजिटली अरेस्ट कर लिया जिसके बाद उनके अकाउंट में मौजूद सारा पैसा खाली कर दिया। यह घटना तब सामने आई जब उनकी बेटी, ऋचा गोस्वामी ने सोशल मीडिया पर इस भयावह अनुभव को शेयर किया। ऋचा ने अपने पोस्ट में लिखा कि यह उनके लिए उनके लाइफ कि सबसे मुश्किल सोशल मीडिया पोस्ट है। उन्होंने दूसरों को चेतावनी दी कि ऐसा फ्रॉड किसी के भी माता-पिता या प्रियजनों के साथ हो सकता है।
स्कैमर ने पुलिस अधिकारी बनकर किया था वीडियो कॉल
ऋचा के पोस्ट के अनुसार, इस घोटाले में फिशिंग लिंक या ईमेल शामिल नहीं थे। इसकी शुरुआत एक पुलिस अधिकारी बनकर किए गए एक वीडियो कॉल से हुई, जिसमें दावा किया गया था कि डॉ. गोस्वामी का आधार नंबर मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी के मामलों से जुड़ा हुआ है। धोखेबाजों ने डॉ. उषा गोस्वामी को नकली दस्तावेज दिखाए, वीडियो में हेरफेर किया, और उन्हें लगातार धमकियों और दबाव में रखा। ‘डिजिटल अरेस्ट’ की रणनीति के माध्यम से उन्हें घंटों तक बंधक बनाकर रखा। कई दिनों तक उन्होंने उन पर मानसिक रूप से दबाव डालकर उनसे उनकी पूरी जीवन भर की बचत ट्रांसफर करवा ली।
इसे साइकोलॉजिकल वार बताते हुए, ऋचा ने कहा कि इस तरह से किया जाने वाले फ्रॉड में विशेष रूप से बुजुर्ग, शिक्षित, सामान्य लोगों को टारगेट किया जा रहा है। खासकर जो अकेले रहते हैं। परिवार ने अधिकारियों को मामले की सूचना दी है और कानूनी कार्रवाई कर रहा है। वे लोगों से भी ऐसे घोटालों के बारे में जागरूक रहने और शिकार होने पर तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह कर रहे हैं।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या है?
डिजिटल अरेस्ट स्कैम साइबर अपराध का एक सोफिस्टिकेटेड तरीका है जिसमें धोखाधड़ी करने वाले खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसियों, सरकारी अधिकारियों या जांच एजेंसियों के रूप में दिखाते करते हैं ताकि पीड़ितों को यह विश्वास दिलाया जा सके कि वे मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स या मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराध में शामिल हैं। फिर पीड़ितों को 'उनकी पहचान वेरीफाई करने' या 'कानूनी पचड़े से अपना नाम हटवाने' के बहाने बड़ी मात्रा में पैसा ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता है।