मुंबई में बढ़ा Covid-19 का खतरा! लोगों पर स्वाइन फ्लू और वायरल संक्रमण का डबल अटैक, जानिए क्या है वजह

Covid Back In Mumbai: मुंबई में कोविड-19, H1N1 (स्वाइन फ्लू), इन्फ्लूएंजा A और रेस्पिरेटरी सिन्सिटियल वायरस (RSV) के मामलों में एक साथ बढ़ोतरी देखी जा रही है। प्राइवेट क्लीनिक और मुंबई के बड़े अस्पतालों में तेज बुखार और सांस की नली के ऊपरी हिस्से में गंभीर तकलीफ वाले मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है

अपडेटेड Jun 21, 2026 पर 1:56 PM
Covid Back In Mumbai: क्या देरी से आया मानसून बना वजह? लोगों पर स्वाइन फ्लू और वायरल संक्रमण का डबल अटैक

Covid Back In Mumbai: मुंबई में एक बार फिर कोरोना वायरस (Covid-19) एच1एन1 (स्वाइन फ्लू), इन्फ्लुएंजा ए और रेस्पिरेटरी सिंशियल वायरस (RSV) के मामलों में एक साथ बढ़ोतरी देखी जा रही है। शहर के बड़े अस्पतालों और निजी क्लीनिकों में तेज बुखार, शरीर में दर्द, गले और छाती में गंभीर संक्रमण जैसे लक्षणों वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि पिछले करीब एक महीने से जहां स्वाइन फ्लू के मरीज ज्यादा आ रहे थे। 'न्यूज 18' के मुताबिक, देश की आर्थिक राजधानी में अब पिछले एक हफ्ते में कोविड-19 के केस भी अचानक बढ़े हैं।

मुंबई के कई बड़े अस्पतालों की लैब में रोजाना कोविड या H1N1 के कई पॉजिटिव केस सामने आ रहे हैं। इन संक्रमणों की वजह से मरीजों में 102°F से 103°F तक तेज बुखार, शरीर टूटना, गले में दर्द और छाती में भारीपन जैसे लक्षण दिख रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इन वायरस के लक्षण काफी हद तक एक जैसे हैं। इसलिए बिना PCR टेस्ट या विशेष जांच के यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि मरीज किस संक्रमण से पीड़ित है।

क्या देरी से आया मानसून बना संक्रमण बढ़ने की वजह?


स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मुंबई नगर निकाय के अधिकारियों के मुताबिक, मौसम में बदलाव इस बढ़ते संक्रमण की एक बड़ी वजह हो सकता है। बताया जा रहा है कि मानसून के देरी से आने के कारण शहर में लंबे समय तक हाई ह्यूमिडिटी और भारी, ठहरी हुई हवा बनी रही। ऐसी परिस्थितियों में सांस से फैलने वाले वायरस हवा में ज्यादा देर तक टिक सकते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब मुंबई में लगातार और तेज बारिश शुरू होगी, तो हवा की गुणवत्ता और वातावरण में बदलाव आने से इन मामलों में कुछ कमी आ सकती है। हालांकि, डॉक्टर यह भी साफ कर रहे हैं कि सिर्फ मौसम को ही जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। लेकिन यह संक्रमण बढ़ने में एक अहम कारक जरूर हो सकता है।

डॉक्टरों की क्या है चिंता?

डॉक्टरों का कहना है कि इस समय सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि कोविड, स्वाइन फ्लू, इन्फ्लुएंजा और RSV इन सभी के शुरुआती लक्षण काफी मिलते-जुलते हैं। मरीज तेज बुखार, बदन दर्द, गले में खराश, खांसी और कमजोरी के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। कई मामलों में छाती में कंजेशन, सांस लेने में तकलीफ और लगातार थकान भी देखी जा रही है।

मुंबई के कुछ अस्पतालों में सिर्फ सांस से जुड़ी बीमारियां ही नहीं। बल्कि वायरल गैस्ट्रोएंटेराइटिस (स्टमक फ्लू) के मामले भी बढ़े हैं। यानी एक तरफ लोग बुखार, खांसी और गले की तकलीफ से जूझ रहे हैं, तो दूसरी तरफ उल्टी-दस्त और पेट के संक्रमण के मरीज भी बढ़ रहे हैं।

किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा?

डॉक्टरों का कहना है कि मौजूदा कोविड स्ट्रेन अधिकतर लोगों में हल्का हो सकता है। लेकिन कुछ वर्गों के लिए यह अब भी खतरनाक साबित हो सकता है। खासतौर पर ये लोग ज्यादा जोखिम में हैं:-

बुजुर्ग

गर्भवती महिलाएं

डायबिटीज के मरीज

दमा या फेफड़ों की पुरानी बीमारी वाले लोग

कमजोर इम्यूनिटी वाले मरीज

अन्य गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोग

एक्सपर्ट के मुताबिक, जब एक ही समय में कई तरह के वायरल संक्रमण फैल रहे हों, तो कमजोर मरीजों के फेफड़ों पर ज्यादा असर पड़ सकता है। इससे फेफड़ों में सूजन, ऑक्सीजन की कमी और दूसरे बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।

बिना डॉक्टर की सलाह दवा लेना क्यों खतरनाक?

स्वास्थ्य विभाग और डॉक्टरों ने लोगों को सख्त सलाह दी है कि बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या कोई भी दवा न लें। ऐसा करने से कई बार बीमारी के असली लक्षण दब जाते हैं। सही बीमारी का पता लगाने में देरी होती है। साथ ही गलत दवाओं के इस्तेमाल से शरीर पर उल्टा असर भी पड़ सकता है।

खासतौर पर एंटीबायोटिक दवाओं का गलत इस्तेमाल ड्रग रेजिस्टेंस जैसी गंभीर समस्या पैदा कर सकता है, जिसमें बाद में दवाएं असर करना बंद कर देती हैं। इसलिए अगर बुखार, खांसी या सांस से जुड़ी तकलीफ लंबे समय तक बनी रहे, तो खुद इलाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

भीड़भाड़ वाली जगहों पर फिर मास्क की सलाह

मुंबई में बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है:-

भीड़भाड़ वाली जगहों, जैसे लोकल ट्रेन, बाजार, मॉल और अस्पताल में मास्क पहनें।

बार-बार हाथ धोएं या सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।

खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकें।

बुखार या खांसी होने पर दूसरों से दूरी बनाकर रखें।

बुजुर्ग और गंभीर मरीजों का ऑक्सीजन लेवल और तापमान नियमित रूप से जांचें।

अगर घर में कोई व्यक्ति हाई-रिस्क कैटेगरी में आता है, तो उसके लिए पल्स ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन की जांच करना और बुखार पर नजर रखना बहुत जरूरी है।

कोविड, स्वाइन फ्लू और RSV के लक्षणों में क्या फर्क है?

इन तीनों संक्रमणों के लक्षण कई बार एक जैसे लगते हैं, लेकिन कुछ खास संकेत इनके बीच फर्क समझने में मदद कर सकते हैं।

1. कोविड-19 के लक्षण

मौजूदा कोविड स्ट्रेन अधिकतर ऊपरी श्वसन तंत्र को प्रभावित कर रहे हैं। लेकिन इसमें पूरे शरीर पर असर डालने वाली गहरी थकान प्रमुख लक्षण मानी जा रही है।

मुख्य लक्षण

अचानक बुखार या ठंड लगना।

शरीर और मांसपेशियों में तेज दर्द।

बहुत ज्यादा कमजोरी और थकान।

गले में खराश या दर्द।

सूखी खांसी।

हल्का नाक बंद होना।

कुछ मामलों में दस्त, मतली या पेट की दिक्कत।

2. स्वाइन फ्लू (H1N1 / Influenza A) के लक्षण

स्वाइन फ्लू अक्सर तेजी से और जोरदार तरीके से हमला करता है। इसमें बुखार अचानक बहुत ज्यादा बढ़ सकता है और छाती पर असर भी जल्दी दिख सकता है।

मुख्य लक्षण

अचानक 102°F से 104°F तक तेज बुखार।

गहरी और दर्दनाक खांसी।

तेज सिरदर्द।

बहुत ज्यादा ठंड लगना और पसीना आना।

गले में तेज दर्द।

नाक बहना।

भूख कम लगना और कमजोरी।

3. RSV (Respiratory Syncytial Virus) के लक्षण

RSV में आमतौर पर बहुत ज्यादा बलगम और नाक से पानी की शिकायत होती है। स्वस्थ वयस्कों में यह सामान्य सर्दी-जुकाम जैसा लग सकता है। लेकिन बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर मरीजों में यह ज्यादा खतरनाक हो सकता है।

मुख्य लक्षण

नाक का बहुत ज्यादा बंद होना या लगातार बहना।

बार-बार छींक आना।

बलगम वाली खांसी आना।

हल्का या मध्यम बुखार होना।

सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज (व्हीजिंग)।

नाक बंद होने के कारण खाने-पीने में दिक्कत या भूख कम लगना।

कब तुरंत अस्पताल जाना जरूरी है?

अगर मरीज में नीचे दिए गए रेड फ्लैग लक्षण दिखें, तो देरी किए बिना तुरंत अस्पताल या डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:-

सांस लेने में तकलीफ या तेजी से सांस फूलना।

छाती में लगातार दर्द या दबाव महसूस होना।

मरीज का भ्रमित होना, बेहोशी जैसा लगना या उठाने पर भी ठीक से न जागना।

होंठ या चेहरा नीला पड़ना।

लगातार उल्टी होना या शरीर में पानी की कमी।

ऑक्सीजन लेवल गिरना।

बहुत तेज बुखार जो दवा के बाद भी कंट्रोल न हो।

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मुंबई के लिए इस समय सबसे जरूरी संदेश

मुंबई में इस समय एक साथ कई वायरल संक्रमण फैल रहे हैं। ऐसे में सिर्फ यह मान लेना कि यह साधारण वायरल है या सिर्फ मौसम का असर है खतरनाक हो सकता है। अगर तेज बुखार, लगातार खांसी, गले में दर्द, शरीर टूटना, सांस लेने में तकलीफ या बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस हो रही है, तो लापरवाही न करें। खासतौर पर अगर मरीज बुजुर्ग है, गर्भवती है या पहले से किसी बीमारी से जूझ रहा है, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। सही समय पर जांच, दवा और निगरानी ही गंभीर स्थिति से बचा सकती है।

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