S-400 का 'सुदर्शन चक्र' से क्या है संबंध? रूसी राजनयिक ने दिया हैरान करने वाला जवाब

S-400: यह एक वायु रक्षा प्रणाली है। भारत ने रूस से S-400 मिसाइल प्रणाली खरीदी है, जिसे भारत में 'सुदर्शन चक्र' भी कहा जाता है। मई में भारत का पाकिस्तान के साथ हुए सैन्य संघर्ष के दौरान इस सिस्टम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और पाकिस्तान के कई मिसाइल मार गिराए थे

अपडेटेड Aug 20, 2025 पर 10:20 PM
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बाबुश्किन का यह बयान प्रधानमंत्री मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के भाषण में 'मिशन सुदर्शन चक्र' की घोषणा के कुछ दिनों बाद आया है

Russian Diplomat Babushkin: रूसी राजनयिक रोमन बाबुश्किन ने बुधवार को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान S-400 मिसाइल प्रणाली को 'सुदर्शन चक्र' कहकर सबको चौंका दिया। रूसी दूतावास में उप-प्रमुख मिशन बाबूश्किन से जब पूछा गया कि क्या भारत इजराइल के आयरन डोम जैसी प्रणालियों पर विचार करेगा, तो उन्होंने जवाब दिया: 'आपका मतलब सुदर्शन चक्र से है?' उन्होंने आगे मजाक में कहा, 'अगली बार हिंदी में पूछें, मैं बेहतर जवाब दे सकता हूं!'

बाबुश्किन का यह बयान प्रधानमंत्री मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के भाषण में 'मिशन सुदर्शन चक्र' की घोषणा के कुछ दिनों बाद आया है। यह मिशन इजरायल के आयरन डोम की तर्ज पर एक स्वदेशी वायु रक्षा कवच विकसित करने की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य भारत की महत्वपूर्ण नागरिक और रणनीतिक संपत्तियों को बाहरी खतरों से सुरक्षित करना है। बाबुश्किन ने ब्रीफिंग के दौरान भारत-रूस संबंधों की सराहना की। उन्होंने अपनी बातचीत की शुरुआत हिंदी में की, 'शुरुआत करेंगे... श्री गणेश करेंगे!'


क्या है 'सुदर्शन चक्र'?

यह एक वायु रक्षा प्रणाली है। भारत ने रूस से S-400 मिसाइल प्रणाली खरीदी है, जिसे भारत में 'सुदर्शन चक्र' भी कहा जाता है। इस प्रणाली ने मई में पाकिस्तान के साथ हुए सैन्य संघर्ष के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और पाकिस्तान के मिसाइल और ड्रोन को मार गिराए थे।

बाबुश्किन ने की अमेरिकी व्यापार नीतियों की आलोचना

रूसी राजनयिक ने अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ की भी कड़ी आलोचना की, यह दावा करते हुए कि ऐसे कदम विश्वास की कमी और राष्ट्रीय संप्रभुता के प्रति अनादर को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए शुल्कों के कारण भारतीय वस्तुओं को अमेरिकी बाजार में प्रवेश करने में कठिनाई होती है, तो रूस उनका 'स्वागत' करेगा।

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