Saayoni Ghosh News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी अब अकेली पड़ गई हैं। बंगाल की सत्ता से बेदखल होने के बाद तृणमूल कांग्रेस में लगातार टूट जारी है। दर्जनों विधायक और सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं। उनकी पार्टी के 20 से अधिक सांसद बागी हो गए हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की उभरती हुई चर्चित नेताओं में गिनी जाने वाली सायोनी घोष का बागी सांसदों के गुट में शामिल होने का फैसला ममता बनर्जी की TMC के कई लोगों के लिए हैरानी भरा रहा है। वह पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की करीबी मानी जाती रही हैं। लेकिन घोष अब टीएमसी की बागी गुट में शामिल हो गई हैं।
तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आजाद और सागरिका घोष फिलहाल ममता के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। कीर्ति आजाद ने सायोनी घोष पर तंज भी कसा है। आजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सोमवार को लिखा, "'क्या हुआ तेरा वादा, वो कसम वो इरादा...?" इसके साथ ही कीर्ति आजाद ने घोष की एक तस्वीर भी शेयर की है। दरअसल, बाकी TMC सांसदो के बगावत पर उतनी चर्चा नहीं हो रही है जिसना सायोनी घोष को लेकर बहस चल रही है।
ममता बनर्जी के करीबी एक सीनियर TMC नेता ने कहा, "हमने कभी नहीं सोचा था कि सायोनी बागी गुट में शामिल होंगी, क्योंकि अभिषेक बनर्जी ही उन्हें राजनीति में लाए थे और ममता बनर्जी हमेशा उन्हें प्राथमिकता देती थीं। उन्होंने सायनी को तब नेता बना दिया था जब उन्होंने अपनी काबिलियत भी साबित नहीं की थी। यह ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के लिए भी एक सबक है, क्योंकि उन्होंने पार्टी के फुल-टाइम कार्यकर्ताओं और नेताओं के बजाय हमेशा फिल्मी कलाकारों पर ज्यादा भरोसा किया।"
TMC के बागी सांसदों ने NCPI में विलय का किया ऐलान
तृणमूल कांग्रेस का संकट 18 जून को उस वक्त और गहरा गया जब बागी सांसदों ने बेहद कम चर्चित नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय की घोषणा की और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलकर सदन में अलग बैठने की व्यवस्था का अनुरोध किया। वहीं, तृणमूल कांग्रेस संसदीय दल के नेता अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर से आग्रह किया कि वह इस अलग हुए गुट को कोई मान्यता नहीं दें।
लोकसभा सदस्य सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि बागी गुट असली तृणमूल कांग्रेस के तौर पर मान्यता पाने के लिए अदालत में भी लड़ाई लड़ेगा और पार्टी के चुनाव चिह्न पर अपना दावा पेश करेगा। लोकसभा स्पीकर से मुलाकात के बाद बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने बिरला को सौंपे गए लेटर पर हस्ताक्षर किए हैं।
नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया त्रिपुरा की एक कम प्रसिद्ध रजिस्टर्ड लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है। इसकी कोई खास राजनीतिक मौजूदगी नहीं है। पार्टी ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में कुछ सीटों पर चुनाव लड़ा था जिसमें इसके उम्मीदवार या तो 'नोटा' से पीछे रहे या उन्हें उससे बस कुछ ही अधिक वोट मिले।
बागी गुट के अनुसार, लोकसभा स्पीकर ने उन 20 सांसदों के हस्ताक्षर की पुष्टि की है जिन्होंने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब तृणमूल कांग्रेस नेता कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने भी रविवार को स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की।
उन्होंने तृणमूल कांग्रेस लोकसभा संसदीय दल के नेता अभिषेक बनर्जी द्वारा लिखा गया एक पत्र लोकसभा स्पीकर को सौंपा, जिसमें उनसे किसी भी कथित अलग गुट को मान्यता न देने का आग्रह किया गया है। इस पत्र में तर्क दिया गया है कि संविधान किसी मौजूदा राजनीतिक दल के भीतर एक अलग समूह बनाने की अनुमति नहीं देता है।