दिल्ली की सड़कों पर घूम रहे हैं गैस मास्क वाले सैंटा, जानें ये कोई मार्केटिंग ट्रिक है या किसी समस्या की तरफ इशारा

क्रिसमस का समय पास आते ही सड़कों, मॉल्स या स्कूल-कॉलेजों में सैंटा क्लॉस बने लोग तोहफे देते हुए नजर आने लगते हैं। लेकिन इस बार दिल्ली की सड़कों पर सैंटा क्लॉस की ड्रेस पहने ये लोग गैस मास्क लगाए हुए नजर आ रहे हैं। आइए जानते हैं उनके इस कदम का आखिर क्या मकसद है

अपडेटेड Dec 22, 2025 पर 10:44 AM
एक प्रमुख छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने एक वॉक आयोजित की थी।

दिल्ली के साउथ एक्सटेंशन और कनॉट प्लेस में क्रिसमस के मौके पर अलग ही रौनक रहती है। हर थोड़ी दूर पर सैंटा क्लॉस की ड्रेस पहने लोग वहां आने वालों को कैंडीज बांटते नजर आते हैं। लेकिन इस साल त्योहारों की इस रौनक के बीच सैंटा की ड्रेस पहने ये लोग कुछ अलग लग रहे हैं। इन्होंने अपने चेहरे पर गैस मास्क लगाया हुआ था। पता चला कि ये लोग ऐसा दिल्ली में हवा के चिंताजनक स्तर के प्रति अपना विरोध जताने के लिए कर रहे हैं।

सर्दियों का मौसम शुरू होने के साथ ही दिल्ली का प्रदूषण लोगों का दम घोंटने लगता है। हवा की गुणवत्ता का स्तर लगातार चिंताजनक बना हुआ है। लेकिन हाल ही में इसे लेकर हो रहे प्रोटेस्ट का एक नया रंग देखने को मिला। यही वजह है दिल्ली के साउथ एक्सटेंशन और कनॉट प्लेस में खरीदारी कर रहे लोग कई सांता क्लॉज को गैस मास्क पहने बाजारों में घूमते देख रहे हैं। ये सांता फोटो खिंचवाने या जश्न मनाने के लिए नहीं आ रहे, बल्कि दिल्ली की प्रदूषित हवा के बारे में बात कर रहे हैं। एक प्रमुख छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने एक वॉक आयोजित की थी। इसमें सांता के कपड़े पहने वॉलंटियर्स भीड़ भरे बाजारों में घूमे और लोगों को मास्क, टॉफियां और छोटे-छोटे नोट दिए। इन नोट में दिल्ली की हवा की क्वालिटी और यह कितनी खतरनाक हो गई है, इसके बारे में लिखा था।

इस पर सुप्रीम कोर्ट से लेकर सरकार तक चिंता जता चुके हैं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला है। दिल्ली की हवा का स्तर लगातार खतरनाक बना हुआ है। बच्चों और बुजुर्गों के साथ ही अब सेहतमंद वयस्क भी इसका शिकार बन रहे हैं। सैंटा बने वॉलंटियर्स ने जो नोट बांटे, उसमें संदेश साफ था। दिल्ली का एक्यूआई 500 के पार हो गया है, और प्रदूषण का स्तर सुरक्षित सीमा से कहीं ज्यादा है। रोजाना इस हवा में सांस लेने से बच्चों, बुजुर्गों और यहां तक कि स्वस्थ वयस्कों पर भी असर पड़ रहा है। कई लोग नोट पढ़ने के लिए रुके और पूछा कि यह स्थिति कब तक जारी रहेगी।

वॉलंटियर्स ने रखीं ये मांगें :

  • प्रदूषण कंट्रोल करने वाले अधिकारियों की तुरंत जवाबदेही
  • प्रदूषण के मुख्य स्रोतों पर सख्त कंट्रोल
  • एक पारदर्शी और व्यापक स्वच्छ हवा का रोडमैप
  • बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर आबादी के लिए विशेष सुरक्षा
  • उन्होंने नागरिकों से भी इस आंदोलन में शामिल होने, स्वच्छ हवा की याचिका पर साइन करने और अपनी आवाज उठाने की अपील की ताकि सांस लेने के अधिकार को एक मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता मिले। एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने कहा कि साफ हवा अब कोई विकल्प नहीं बल्कि जरूरत है। चौधरी ने कहा, ‘जब दिल्ली में सांता को भी मास्क पहनना पड़ रहा है, तो यह दिखाता है कि सरकारें कितनी बुरी तरह फेल हुई हैं। हमारे बच्चे गैस चैंबर में बड़े हो रहे हैं, और नागरिकों को जश्न और जिंदगी के बीच चुनने के लिए मजबूर किया जा रहा है।’


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