पश्चिम बंगाल में एक ओर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर हमलावर है, तो वहीं दूसरी ओर पार्टी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद के नाम पर मस्जिद बनाने की नींव रखकर और नई पार्टी बनाकर सियासी तापमान बढ़ा रहे है।
इसी बीच सोमवार (21 दिसंबर) को कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में BLA के साथ बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR को लेकर भाजपा पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा, "चुनाव से ठीक पहले लोकतंत्र को छीना जा रहा है। अब तक 46 लोगों की मौत हो चुकी है। मतुआ, अल्पसंख्यक और आदिवासियों के वोट छीने जा रहे हैं।"
वहीं, मुख्यमंत्री ने बैठक में मौजूद कार्यकर्ताओं और नेताओं से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा, "BJP आपको पैसे देकर फूट डालने की कोशिश कर रही है। हमलोग को एकजुट रहना चाहिए।" राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी के इस बयान के दो संकेत हैं। पहला, SIR को लेकर भाजपा पर जिम्मेदारी डालना और दूसरा, हुमायूं कबीर से होने वाले नुकसान की आशंका को भी भाजपा की साजिश बताना।
हालांकि, बैठक के अंत में ममता बनर्जी ने मतुआ समाज, अनुसूचित जाति और आदिवासी समुदाय को भरोसा दिलाया कि उन्हें डरने की कोई ज़रूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि बंगाल में किसी भी वर्ग के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और सभी को मिलकर लोकतंत्र की रक्षा करनी होगी।
दूसरी ओर आज मुर्शिदाबाद में TMC से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने अपनी नई पार्टी के गठन की घोषणा कर दी। उन्होंने न सिर्फ पार्टी का नाम और घोषणापत्र जारी किया, बल्कि कई विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम भी घोषित कर दिए। इस दौरान हुमायूं कबीर ने ममता पर जमकर हमला किया और कहा, "मुर्शिदाबाद के 22 विधानसभा सीटों में से शून्य सीट देंगे, ममता को एक भी सीट नहीं जीतने देंगे।"
बता दे कि TMC पहले से ही हुमायूं पर 'धार्मिक ध्रुवीकरण' का आरोप लगाता रहा है। 6 दिसंबर को बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की नींव रखने के कार्यक्रम से पहले तृणमूल के वरिष्ठ नेता फिरहाद हकीम ने साफ कहा था कि पार्टी इस तरह के धार्मिक मुद्दों का समर्थन नहीं करती और धर्मनिरपेक्ष राजनीति में विश्वास रखती है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक एक ओर TMC अपने पारंपरिक वोट बैंक को एकजुट रखने की कोशिश में है, वहीं दूसरी ओर नई पार्टियों और SIR जैसे मुद्दों के कारण बंगाल की राजनीति में अनिश्चितता और बढ़ती दिख रही है।