'मुस्कान वाली गली...', : मकान महीनों से सूना...खरीददार गायब, मालिक बोला- लोग कदम रखने से भी डरते हैं

Saurabh Rajput Murder Case : करीब एक साल बाद भी लोग इस घर में रहने से डरते हैं। न कोई किराए पर लेना चाहता है और न ही खरीदने की हिम्मत दिखा रहा है। इस घटना ने पूरे इलाके को बदनाम कर दिया है और वहां का माहौल आज भी भारी और डरा हुआ महसूस होता है। मुस्कान के पिता भी अपना घर बेचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें भी कोई खरीदार नहीं मिल रहा

अपडेटेड Dec 09, 2025 पर 4:12 PM
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Meerut murder case: ब्रह्मपुरी के इंदिरा नगर की तंग गलियों में आज भी उसका असर साफ दिखाई देता है।

मेरठ में हुए चर्चित “ब्लू ड्रम मर्डर केस” को नौ महीने बीत चुके हैं, लेकिन ब्रह्मपुरी के इंदिरा नगर की तंग गलियों में आज भी उसका असर साफ दिखाई देता है। जिस घर में 31 साल के NRI सौरभ राजपूत की हत्या हुई थी, वह अब डर का दूसरा नाम बन चुका है। लोग उस जगह को अब बस “मुस्कान वाली गली” कहकर ही याद करते हैं। मुस्कान पर आरोप है कि उसने अपने पति सौरभ की हत्या की, फिर उसके शरीर को नीले प्लास्टिक के ड्रम में सीमेंट में भर दिया। मुस्कान पिछले नौ महीनों से जेल में बंद है। जिस किराए के घर में वह अपने पति के साथ तीन साल रही, वह अब बिक्री के लिए तैयार है — लेकिन उसे खरीदने वाला कोई नहीं मिल रहा।

घर का नहीं मिल रहा कोई खरीदार

करीब एक साल बाद भी लोग इस घर में रहने से डरते हैं। न कोई किराए पर लेना चाहता है और न ही खरीदने की हिम्मत दिखा रहा है। इस घटना ने पूरे इलाके को बदनाम कर दिया है और वहां का माहौल आज भी भारी और डरा हुआ महसूस होता है। मुस्कान के पिता भी अपना घर बेचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें भी कोई खरीदार नहीं मिल रहा। मर्डर वाली जगह से करीब 200 मीटर दूरी पर मुस्कान के पिता प्रमोद रस्तोगी का दो मंजिला घर है। वह इसे 70–75 लाख रुपये में बेचना चाहते हैं, लेकिन अब तक कोई भी व्यक्ति इसे खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा।


पूरे इलाके की बदनामी!

घर देखने आने वाले लोग बताते हैं कि जैसे ही उन्हें पता चलता है कि यह इलाका ब्लू ड्रम मर्डर केस से जुड़ा है, वे गली में आगे बढ़ने की हिम्मत ही नहीं करते। इस बदनामी ने सिर्फ एक घर को नहीं, बल्कि पूरे मोहल्ले को प्रभावित कर दिया है। प्रमोद और उनकी पत्नी कविता अभी भी ब्रह्मपुरी वाले इसी घर में रहते हैं। उनके साथ बच्चे और मुस्कान की बड़ी बेटी भी है, जिसकी परवरिश वे उसकी गिरफ्तारी के बाद से कर रहे हैं। सामान्य जीवन जीने की उनकी कोशिशों के बावजूद, हत्या की इस घटना का साया उनके परिवार पर बना हुआ है। समाज से दूरी और आर्थिक परेशानियाँ उनकी मुश्किलें और बढ़ा रही हैं।

सौरभ के भाई राहुल राजपूत का कहना है कि रस्तोगी परिवार का मेरठ छोड़ने की तैयारी करना यह दिखाता है कि समाज ने उनसे किस हद तक दूरी बना ली है। मर्डर सामने आने के कुछ समय बाद ही मुस्कान के छोटे भाई की नौकरी चली गई, उनका ज्वेलरी का बिज़नेस बंद हो गया और परिवार को किसी भी सामाजिक कार्यक्रम में बुलाना भी लोगों ने बंद कर दिया। एक बार तो हालात इतने खराब हो गए कि प्रमोद रस्तोगी का नाम शादी के कार्ड से ही हटा दिया गया और उन्हें "शर्मिंदगी से बचने" के लिए समारोह में नहीं आने की सलाह दी गई। राहुल कहते हैं, “इससे साफ दिखता है कि इस परिवार को कितनी गहरी बदनामी का सामना करना पड़ रहा है।”

सौरभ के परिवार का यह भी दावा है कि ब्रह्मपुरी वाला घर, जिसे प्रमोद बेचने की कोशिश कर रहे हैं, सौरभ की लंदन में की गई कमाई से बनाया गया था। राहुल का आरोप है कि सौरभ कई सालों तक अपनी पूरी सैलरी मुस्कान और उसके परिवार को भेजता रहा। वह कहते हैं, “आज जिस घर को बेचने की बात हो रही है, वह मेरे भाई की मेहनत की कमाई से बना था।”

एक मर्डर जिसने पूरे मोहल्ले को डरा दिया

जांच अधिकारियों के अनुसार, यह पूरी घटना 10 से 12 मार्च 2025 के बीच शुरू हुई, जब मुस्कान और उसके बॉयफ्रेंड साहिल ने कथित तौर पर सौरभ की हत्या की योजना बनाई। पुलिस का कहना है कि 12 मार्च की रात दोनों ने सौरभ के खाने में नींद की गोलियां मिला दीं, ताकि वह पूरी तरह बेहोश हो जाए। जैसे ही सौरभ गिरा, साहिल ने उस पर धारदार हथियार से हमला किया और उसके सीने पर वार किया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद जो हुआ, वह और भी भयावह था।

जांच टीम के मुताबिक, मुस्कान और साहिल ने ब्रह्मपुरी वाले घर के वॉशरूम में सौरभ के शरीर को चार हिस्सों में काटने में कई घंटे लगाए। फिर इन हिस्सों को एक बड़े नीले प्लास्टिक के ड्रम में भरकर, ऊपर से सीमेंट डालकर सील कर दिया गया। ड्रम को घर के अंदर ही रखा गया ताकि किसी पड़ोसी को किसी तरह का शक न हो।

एक ऐसी प्रॉपर्टी जिसे कोई खरीदना नहीं चाहता

मर्डर वाले घर को 4 नवंबर को बिक्री के लिए लिस्ट किया गया था। चार–पांच लोग इसे देखने भी आए, लेकिन कोई दोबारा लौटकर नहीं आया। वजह साफ है—डर, अंधविश्वास, उस पते से जुड़ी बदनामी और यह बेचैनी कि इस घर की कहानी को लोग नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते। न कोई इसे किराए पर लेना चाहता है और न ही खरीदने में दिलचस्पी दिखाता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, कई खरीदार जैसे ही सुनते हैं कि यही वह गली है जहाँ “नीले ड्रम वाला मर्डर” हुआ था, वे तुरंत वापस लौट जाते हैं।

मुस्कान के पिता प्रमोद का घर भी, जो इस जगह से केवल 200 मीटर दूर है, अब बिकने लायक नहीं रह गया है। मेरठ के प्रॉपर्टी डीलरों का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं देखा कि किसी मर्डर केस की वजह से पूरे इलाके की प्रॉपर्टी कीमतें इतनी तेजी से गिर जाएँ।

इसी बीच, रस्तोगी परिवार मुस्कान की बड़ी बेटी पीहू की परवरिश अपने ब्रह्मपुरी वाले घर में कर रहा है। वे कोशिश कर रहे हैं कि बच्ची को उस गली से जुड़े डर और तनाव से दूर रखा जाए, जबकि खुद वे उसी माहौल से निकलने की कोशिश कर रहे हैं।

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