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SBI Loan Recovery: विधवा पत्नी की एफडी से बैंक ने गुपचुप की पति के लोन की वसूली, हाईकोर्ट ने सुनाया ब्याज सहित पैसा लौटाने का फैसला

SBI Loan Recovery: लखनऊ स्थित एसबीआई बैंक ने पति की मौत के बाद उसके लोन की भरपाई के लिए विधवा पत्नी की निजी एफडी तोड़ कर 2 लाख रुपये निकाल लिए। मामला खुलने पर हाईकोर्ट बैंक को कड़ी फटकार लगाई और महिला को ब्याज सहित उसका पैसा लौटाने का फैसला सुनाया

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 19, 2026 पर 11:20 AM
SBI Loan Recovery: विधवा पत्नी की एफडी से बैंक ने गुपचुप की पति के लोन की वसूली, हाईकोर्ट ने सुनाया ब्याज सहित पैसा लौटाने का फैसला
अदालत ने बैंक के इस रवैये को ‘बैंकिंग नीति का घृणित उल्लंघन’ भी बताया।

SBI Loan Recovery: लखनऊ स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बैंक (SBI) से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां की एक एसबीआई ब्रांच ने पति की असमय मृत्यु के बाद पत्नी की निजी एफडी गुपचुप तरीके से तुड़वा कर लोन की बकाया रकम काट ली। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोट की लखनऊ बेंच ने बैंक को कड़ी फटकार लगाई और महिला को ब्याज सिहत रकम लौटाने का आदेश दिया है। अपनी टिप्पणी में अदालत ने बैंक के इस रवैये को ‘बैंकिंग नीति का घृणित उल्लंघन’ भी बताया। इस मामले ने एक बार फिर बैंक पर ग्राहकों के अटूट भरोसे पर सवाल खड़े किए हैं।

बैंक ने सीज किया वेतन खाता

यह मामला लखनऊ के रिंग रोड स्थित मेडिसिन अस्पताल में सहायक प्रोफेसर की पत्नी नेहा मिश्रा से जुड़ा हुआ है। नेहा के पति ने नवंबर 2020 में एसबीआई से 15 लाख रुपए का पर्सनल लोन लिया था। दुर्भाग्यवश, कोविड संक्रमण के कारण मई 2021 में उनके पति का निधन हो गया। न्यूज 18 की खबर के अनुसार, बैंक ने सितंबर 2025 में एसबीआई ने नेहा मिश्रा को कानूनी नोटिस भेजा और 13.87 लाख रुपए के बकाया लोन का भुगतान करने की मांग की। हालांकि, आरबीआई लोकपाल के हस्तक्षेप के बाद यह रोक हटा दी गई। अभी बैंक और महिला के बीच बकाया लोन भुगतान पर बातचीत चल रही थी। लेकिन इसी बीच एसबीआई ने गुपचुप तरीके से महिला की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) भुना ली और उसमें से 19.90 लाख रुपए कर्ज के नाम पर डेबिट कर लिए।

नेहा मिश्रा ने किया हाईकोर्ट का रुख

बैंक की इस हरकत का पता चलने के बाद पीड़िता नेहा मिश्रा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच का रुख किया। मिश्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पाया कि मृत प्रोफेसर की पत्नी न तो इस लोन की सह-उधारकर्ता थीं और न ही गारंटर, जमानतदार, क्षतिपूर्तिकर्ता या नॉमिनी। कर्ज के इस लेनदेन में उन्होंने बैंक के साथ किसी भी तरह का करार नहीं किया था। इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी गौर किया कि कर्ज एक बीमा पॉलिसी से कवर था, जिसके लिए मृतक ने प्रीमियम का भुगतान किया था।

अदालत ने एसबीआई को लताड़ लगाते हुए कहा कि बैंक यह साबित करने में पूरी तरह असफल रहा कि किस कानूनी प्रावधान के तहत उसने पति के कर्ज की भरपाई के लिए पत्नी के निजी खाते से रकम काटी है। कोर्ट ने एसबीआई को महिला का पूरा पैसा एफडी के लागू ब्याज दर के साथ चार हफ्ते के भीतर वापस करने का आदेश दिया। साथ ही बैंक को 1 लाख रुपए का दंडात्मक मुआवजा देने का भी निर्देश दिया। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि बैंक अपने ग्राहकों के धन के संरक्षक होते हैं और जनता के पैसों को एक ट्रस्ट के रूप में रखते हैं।

बैंक का गुपचुप वसूली का तरीका ग्राहक अधिकारों का हनन

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